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ब्रेन मलेरिया की बात करें तो यह प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम मलेरिया का सबसे खतरनाक प्रकार है. डॉक्टर के अनुसार, ब्रेन मलेरिया के लगभग 90 प्रतिशत मामलों के लिए यही परजीवी जिम्मेदार होता है. यदि समय पर इलाज नहीं मिले, तो मरीज की हालत गंभीर हो सकती है.
पोटका में फैल रहा जानलेवा ब्रेन मलेरिया (AI इमेज)
जमशेदपुर: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. इलाके में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है. इसके बाद पूरे क्षेत्र में डर का माहौल है. हर दिन नए मरीज सामने आ रहे हैं. हालात को देखते हुए राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार की टीम ने भी मोर्चा संभाल लिया है. प्रभावित गांवों में लगातार जांच, दवा वितरण और फॉगिंग का काम चल रहा है.
70 नए संक्रमित मरीज
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, पोटका क्षेत्र में अब तक 1,250 लोगों की जांच की गई. इनमें 70 नए संक्रमित मिले हैं. सभी मरीजों का इलाज चल रहा है. 70 से अधिक मरीज एमजीएम अस्पताल और सदर अस्पताल में भर्ती हैं. डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं.
12,518 लोगों की जांच
वहीं, पूरे जिले में बुधवार को रिकॉर्ड 12,518 लोगों की जांच की गई. जांच के दौरान 128 नए मलेरिया मरीज मिले. इनमें सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि 98 मरीज प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम (PF) यानी ब्रेन मलेरिया से संक्रमित पाए गए हैं. केवल 28 मरीज सामान्य मलेरिया के मिले हैं. पिछले 11 दिनों में जिले में 52,480 लोगों की जांच की जा चुकी है.
लोगों की स्क्रीनिंग जारी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार गांव-गांव जाकर लोगों की स्क्रीनिंग कर रही हैं. बुखार से पीड़ित लोगों की जांच की जा रही है. जरूरतमंदों को दवाएं दी जा रही हैं. मच्छरों को खत्म करने के लिए दवा का छिड़काव भी किया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग ने 13 जुलाई तक पोटका के 11 गांवों में विशेष फॉगिंग अभियान चलाने का फैसला किया है.
मलेरिया का सबसे खतरनाक प्रकार
ब्रेन मलेरिया की बात करें तो यह प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम मलेरिया का सबसे खतरनाक प्रकार है. डॉक्टर के अनुसार, ब्रेन मलेरिया के लगभग 90 प्रतिशत मामलों के लिए यही परजीवी जिम्मेदार होता है. यदि समय पर इलाज नहीं मिले, तो मरीज की हालत गंभीर हो सकती है और जान का भी खतरा रहता है. ब्रेन मलेरिया में तेज बुखार, कंपकंपी, लगातार सिरदर्द, उल्टी, अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी, सुस्ती, दौरे पड़ना और बच्चों में असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं.
विशेष सावधानी बरतने की जरूरत
डॉक्टर के मुताबिक, कई मरीजों का पेशाब भी काले रंग का हो सकता है. जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उनमें खतरा ज्यादा रहता है. बच्चों, बुजुर्गों और डायबिटीज, किडनी या लिवर की बीमारी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. विशेषज्ञों का कहना है कि झारखंड के कई इलाके मलेरिया प्रभावित हैं. बरसात के मौसम में जंगलों, जलभराव, खुले गड्ढों और नालियों में मच्छर तेजी से पनपते हैं. यही कारण है कि मानसून के दौरान मलेरिया के मामले बढ़ जाते हैं. ऐसे में समय पर जांच, इलाज और बचाव ही इस बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें