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झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र का शुक्रवार को दूसरा दिन है। महज पांच कार्य दिवसों वाला यह सत्र बेहद छोटा है, लेकिन इसके काफी हंगामेदार होने के पूरे आसार हैं। विपक्ष ने की हेमंत सोरेन से इस्तीफे की मांग सत्र शुरू होने के पहले सदन के बाहर भाजपा विधायकों ने जेपीएससी और जेएसएससी में हुई धांधली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष ने कहा-छात्र लगातार प्रोटेस्ट कर रहे हैं। उनकी जो मांग है, वहीं हमारी भी मांग हैं। सरकार पेपर लीक नहीं, पेपर बेच रही है। उन्होंने हेमंत सोरेन हाय-हाय के नारे लगाए। हेमंत सोरेन से इस्तीफे की मांग की। वहीं, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा-जब से हेमंत सोरेन की सरकार बनी है। कौन सी जॉब कितने में बिक रहा है, सभी को यह पता है। राहुल गांधी को हेमंत सोरेन से बात करनी चाहिए। अगर हेमंत सोरेन उनकी नहीं सुन रहे हैं तो उन्हें सरकार से अलग होना चाहिए। गुरुवार को भी विपक्ष ने किया था हंगामा इधर, सत्र के पहले ही दिन गुरुवार को भी विपक्ष के तेवर तीखे नजर आए थे। भाजपा विधायक मास्क पहनकर सदन में पहुंचे। जिस पर लिखा था – न्याय चाहिए, धोखा नहीं। जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल सभी परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराओ। शुक्रवार को पहली पाली में प्रश्नकाल, फिर चालू वित्तीय वर्ष का पहला अनुपूरकबजट पेश होगा। इधर, सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायकों ने खड़े होकर जेपीएससी का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया, जिससे माहौल गर्म हो गया। विपक्ष का प्रदर्शन, एक्शन टेकेन रिपोर्ट पेश सदन के भीतर जहां एक ओर विपक्ष लगातार परीक्षा घोटाले के मुद्दे को उठाने की कोशिश करता रहा, वहीं स्पीकर का संबोधन भी समानांतर रूप से चलता रहा। इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने बजट सत्र के दौरान सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों पर एक्शन टेकेन रिपोर्ट (एटीआर) सदन में प्रस्तुत की। एटीआर के जरिए सरकार ने अपने वादों पर की गई कार्रवाई का ब्यौरा रखा, लेकिन विपक्ष का ध्यान मुख्य रूप से परीक्षा अनियमितताओं पर ही केंद्रित रहा। सदन में शोक प्रस्ताव भी लाया गया, जिसके बाद दिनभर की कार्यवाही को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। पहले ही दिन जिस तरह से विपक्ष ने आक्रामक रुख अपनाया, उससे साफ है कि आगामी दिनों में यह सत्र हंगामेदार रहने वाला है, खासकर JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर सियासत और तेज हो सकती है। सात दिनों के सत्र में पांच ही कार्य दिवस 6 से 12 अगस्त तक प्रस्तावित इस संक्षिप्त सत्र में कुल सात दिन निर्धारित हैं, लेकिन शनिवार और रविवार के अवकाश के कारण केवल पांच कार्य दिवस ही उपलब्ध होंगे।
8 और 9 अगस्त को साप्ताहिक अवकाश रहेगा। 10 अगस्त को प्रश्नकाल के बाद अनुपूरक बजट पर चर्चा और मतदान होगा, जबकि 11 अगस्त को प्रश्नकाल, राजकीय विधेयक और अन्य सरकारी कार्य निपटाए जाएंगे। 12 अगस्त को प्रश्नकाल के साथ राजकीय विधेयक, अन्य सरकारी कार्य और गैर-सरकारी संकल्प पर चर्चा होगी।
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