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टीवी पर अमेरिकन ड्रामा देख इंस्पायर हुईं अदिति, बीएड छोड़, चुनी लॉ...


गढ़वा. बेटियां आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं बल्कि हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं. जरूरत है तो बस उन्हें निखारने की. झारखंड के गढ़वा जिले की एक बेटी ने परंपराओं से अलग अपनी पहचान बनाई है. जिस परिवार में पीढ़ियों से पूजा-पाठ और ज्योतिष का कार्य होता आया, उसी परिवार की पहली बेटी ने कानून की दुनिया को अपना करियर चुना.

बता दें कि यह कहानी गढ़वा जिले के गढ़वा की रहने वाली भवानी शंकर कुलमानी की बेटी अदिति राज लक्ष्मी की है, जिन्होंने संघर्ष, मेहनत और परिवार के सहयोग के दम पर ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) पास कर अधिवक्ता बनने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है. उन्हें कानून की पढ़ाई करने का आइडिया एक वेब सीरीज से आया.

परिवार की पहली वकील
गढ़वा के बिहारी मंदिर लेन की रहने वाली अदिति राज लक्ष्मी एक संयुक्त परिवार से आती हैं. उनके परिवार की पहचान वर्षों से बिहारी मंदिर में पूजा-पाठ और ज्योतिष सेवा से रही है. पिता भवानी शंकर कुलमानी व्यवसायी हैं, मां नीलम मिश्रा गृहिणी हैं, जबकि बड़े भाई भारत भूषण कुलमानी नौकरी करते हैं. वहीं, वह कानून की पढ़ाई कर अपने परिवार की पहली वकील बनी हैं.

बीएड छोड़ा, लॉ में लिया दाखिला
अदिति ने बताया कि उनके परिवार में कभी किसी ने कानून की पढ़ाई नहीं की थी. ऐसे में अदिति अपने पूरे खानदान की पहली लड़की बनीं, जिन्होंने वकालत को अपना करियर चुना. हालांकि, इंटर के बाद उन्होंने झारखंड बीएड प्रवेश परीक्षा भी पास कर ली थी और सीट भी सुरक्षित थी, लेकिन उनका सपना कुछ और था. परिवार के पूरे सहयोग से उन्होंने बीएड छोड़कर कानून की पढ़ाई करने का फैसला किया.

वेब सीरीज से मिली प्रेरणा
बचपन से ही अदिति को सिविक्स पढ़ना, डिबेट करना और लोगों के बीच अपनी बात रखना पसंद था. इसी दौरान उन्होंने अमेरिकी लीगल ड्रामा वेब सीरीज ‘Suits’ देखी, जिसने कानून और संविधान के प्रति उनकी रुचि को और मजबूत कर दिया. तभी उन्होंने तय कर लिया कि वे कानून के क्षेत्र में अपना योगदान देंगी. जिसके बाद वे आज यहां तक पहुंची हैं. इसी सोच के साथ इंटर में साइंस पढ़ने के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन में पॉलिटिकल साइंस विषय चुना, ताकि कानून की पढ़ाई के लिए मजबूत आधार तैयार हो सके.

कई चुनौतियों का किया सामना
उन्होंने बताया कि साल 2022 उनके जीवन का सबसे अहम मोड़ साबित हुआ, जब उन्हें इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में एलएलबी में दाखिला मिला, जिसे ‘ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट’ भी कहा जाता है. पहली बार घर-परिवार छोड़कर दूसरे शहर में रहना आसान नहीं था. बीमारी, अकेलापन और कई तरह की चुनौतियां सामने आईं. कई बार लगा कि सब छोड़कर घर लौट जाएं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.

ऐसे मिली सफलता
इसके बाद वर्ष 2023 से 2026 तक एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) की तैयारी शुरू की. कॉलेज की पढ़ाई और फाइनल परीक्षा के साथ-साथ वह रोजाना लगभग चार घंटे इस परीक्षा की तैयारी करती थीं. बेयर एक्ट्स, पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र और लगातार अभ्यास के दम पर उन्होंने यह कठिन परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली. अदिति का मानना है कि AIBE अब पहले की तुलना में ज्यादा कॉन्सेप्ट आधारित और चुनौतीपूर्ण हो चुका है. इसलिए नियमित पढ़ाई और सही रणनीति ही सफलता की कुंजी है.

उन्होंने बताया कि वर्तमान में वह इलाहाबाद हाई कोर्ट में अधिवक्ताओं के साथ कार्य करते हुए व्यावहारिक अनुभव हासिल कर रही हैं. उनका अगला लक्ष्य एलएलएम की पढ़ाई करना है, ताकि कानून की गहरी समझ विकसित कर सकें और भविष्य में न्यायाधीश (Judge) बनकर समाज को न्याय दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें.



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