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पलामू के डाल्टनगंज में युवाओं ने एक नई पहल की है. वे असहाय और बेसहारा बुजुर्गों के लिए निःशुल्क वृद्धाश्रम चला रहे हैं. यहां बुजुर्गों को रहने, खाने और इलाज की मुफ्त सुविधा मिल रही है. युवाओं की यह टीम बुजुर्गों को परिवार जैसा सुरक्षित माहौल और सहारा दे रही है.
पलामूः आज के आधुनिक जीवन की भागदौड़ में बुजुर्गों का अकेलापन और उपेक्षा बड़ी सामाजिक चुनौती बनती जा रही है. जहां उम्र के उस पड़ाव पर जब उन्हें सबसे ज्यादा अपनापन, सहारे और देखभाल की जरूरत होती है, कई बुजुर्ग अकेले जीवन गुजारने को मजबूर हो जाते हैं. ऐसे बुजुर्गों के लिए पलामू में युवाओं की एक टोली ने संवेदनशील पहल शुरू की है. डाल्टनगंज के बाईपास रोड में युवाओं द्वारा निःशुल्क वृद्धाश्रम संचालित किया जा रहा है, जहां बुजुर्गों को रहने से लेकर भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं तक बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जा रही हैं.
सिर्फ आशियाना नहीं, परिवार जैसा माहौल
संचालिका नंदिनी सिंह ने बताया कि इस वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ आवास की व्यवस्था की गई है. जहां पौष्टिक भोजन और शुद्ध पेयजल के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच, चिकित्सा सहायता और जरूरी दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाती हैं. बुजुर्गों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए योग, ध्यान और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियां भी कराई जाती हैं. किसी आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है.
25 बुजुर्गों के लिए उपलब्ध है व्यवस्था
नंदिनी सिंह ने आगे बताया कि बुजुर्गों के लिए बेहतर और सम्मानजनक माहौल तैयार करना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है. इसके लिए रोजाना का शेड्यूल तैयार कर अलग-अलग गतिविधियां कराई जाती हैं. वर्तमान में करीब 25 बुजुर्गों के रहने के लिए बेड की व्यवस्था है. बुजुर्गों की रोजमर्रा की जरूरतों और सेवा के लिए मीडिएटर समेत टीम के सदस्य लगातार अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं. इस पूरी पहल में करीब 30 युवा अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं.
सेवा को मिशन मानकर जुटे युवा
आगे कहा कि आज के समय में बुजुर्गों की सेवा के लिए बहुत कम लोग आगे आते हैं. इसी सोच के साथ युवाओं ने मिलकर इस काम की शुरुआत की. अब यह पहल एक मिशन का रूप ले चुकी है. टीम का प्रयास है कि समाज में जो बुजुर्ग असहाय हैं और जिन्हें सहारे की जरूरत है, उन तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित वातावरण और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. ‘प्रवीण यूथ एसोसिएट्स’ के माध्यम से युवा साथी मिलकर इस वृद्धाश्रम को निःशुल्क चला रहे हैं.
पत्नी के साथ मिला नया सहारा
सुदना निवासी रामपति सिंह अपनी पत्नी के साथ इसी वृद्धाश्रम में रह रहे हैं. उनका कहना है कि उनका कोई बच्चा नहीं है. उम्र बढ़ने के साथ परिस्थितियां ऐसी हो गईं कि अकेले जीवन गुजारना मुश्किल होने लगा. रामपति सिंह ने लोकल18 बताया कि वह आंखों से देख नहीं सकते, जबकि उनकी पत्नी चलने-फिरने में असमर्थ हैं. जब उन्हें इस वृद्धाश्रम के बारे में जानकारी मिली तो यहां आकर रहने लगे. अब सुबह की चाय से लेकर नाश्ता, भोजन और जरूरत की दूसरी सुविधाएं उन्हें निःशुल्क मिल रही हैं. उनके लिए यह जगह महज रहने की जगह नहीं, बल्कि जीवन के इस पड़ाव में एक सुरक्षित सहारा बन गई है.
जहां सेवा ही सबसे बड़ा रिश्ता है
बता दें कि पलामू के इन युवाओं की पहल यह संदेश देती है कि बुजुर्गों को सिर्फ सहारे की नहीं, सम्मान और अपनापन की भी जरूरत होती है. निःशुल्क वृद्धाश्रम के जरिए युवा न सिर्फ असहाय बुजुर्गों को छत दे रहे हैं, बल्कि उनके जीवन में सुरक्षा, सम्मान और सुकून लौटाने की बेहतर कोशिश भी कर रहे हैं.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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