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डिमांड इतनी कि 24 घंटे करनी पड़ती है पहरेदारी, जानिए क्यों खास...


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कोडरमा के मसनोडीह गांव का 63 साल पुराना आम बागान इन दिनों चर्चा में है. इस बागान में एक हजार से अधिक आम के पेड़ हैं, जिनमें एक दर्जन से ज्यादा किस्मों के आम लगाए गए हैं. यहां लोगों को पेड़ों पर प्राकृतिक रूप से पके ताजे आम मिलते हैं. यहां के आम की मांग झारखंड और बिहार के अलावा दिल्ली तक है. पिछले साल यहां के आम अमेरिका भी भेजे गए थे. बढ़ती मांग को देखते हुए बागान की 24 घंटे निगरानी की जाती है.

कोडरमा: झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड स्थित मसनोडीह गांव का आम बागान इन दिनों अपने खास स्वाद और आम की विभिन्न किस्मों के कारण चर्चा में है. रूपक सिंह परिवार के इस विशाल बागान में एक हजार से अधिक आम के पेड़ हैं, जिनमें एक दर्जन से ज्यादा किस्मों के आम लगाए गए हैं. पेड़ों पर प्राकृतिक रूप से पके ताजे आमों की उपलब्धता के कारण यहां प्रतिदिन दूर-दराज से लोग खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं. इस बागान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां ग्राहकों को सीधे पेड़ों पर पके ताजे आम मिलते हैं. यही वजह है कि 20 से 30 किलोमीटर दूर से भी लोग यहां आम खरीदने आते हैं. वहीं, बिहार समेत अन्य जिलों के ग्राहक भी ट्रेन और बस के जरिए ऑर्डर पर यहां के आम मंगवाते हैं.

मालदा से जर्दालू तक, कई किस्मों के आम उपलब्ध
बागान की देखरेख कर रहे राजू मेहता ने बताया कि उनके जिम्मे 55 आम के पेड़ों की देखभाल है. इन पेड़ों में मालदा, जर्दालू, गुलाब खास, बम्बईया, हिमसागर, किशुन भोग, बेलखास, मणिका, सीपिया और फ़ज़ली जैसी किस्में शामिल हैं. इसके अलावा अचार के लिए मशहूर बिजुआ और सुकूल किस्म के आम भी यहां लगाए गए हैं.राजू मेहता ने बताया कि वह पिछले 20 वर्षों से आम के कारोबार से जुड़े हुए हैं. मसनोडीह के आम की मांग इतनी अधिक है कि एक बार एक नियमित ग्राहक को दूसरे स्थान का आम भेजा गया, लेकिन उसे वह पसंद नहीं आया. इसके बाद उसने अगले वर्ष फिर मसनोडीह के आम की ही मांग की.

दिल्ली से अमेरिका तक पहुंचा मसनोडीह का स्वाद
उन्होंने बताया कि मसनोडीह का आम अब केवल कोडरमा या झारखंड तक सीमित नहीं है. यहां के आम दिल्ली तक भेजे जा चुके हैं. पिछले वर्ष कोडरमा के एक व्यक्ति ने अमेरिका में रहने वाले अपने परिचितों के लिए 30 किलो आम मंगवाया था, जिसे 10-10 किलो के पैकेट बनाकर भेजा गया था. रूपक सिंह परिवार हर साल आम की फसल तैयार होने पर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य विशिष्ट लोगों को भी उपहार स्वरूप आम भेजता है. लोगों को हर वर्ष इस बागान के आम का बेसब्री से इंतजार रहता है.

आम की सुरक्षा के लिए 24 घंटे निगरानी
बढ़ती मांग के साथ आम चोरी होने की आशंका भी बनी रहती है. इसी कारण पूरे बागान में 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था की गई है. राजू मेहता ने बताया कि बागान की रखवाली तीन शिफ्टों में की जाती है. वे स्वयं, उनकी पत्नी और उनका बेटा बारी-बारी से आठ-आठ घंटे तक निगरानी करते हैं. रात में बड़े टॉर्च की मदद से पूरे बागान पर नजर रखी जाती है. सुरक्षा के लिए कई स्थानों पर बांस के मचान भी बनाए गए हैं.

63 साल पुरानी विरासत
मसनोडीह का यह आम बागान रूपक सिंह परिवार के पूर्वजों ने वर्ष 1963 में लगाया था. कुछ वर्षों बाद पेड़ों में फल आने शुरू हुए और तब से यह सिलसिला लगातार जारी है. छह दशक से अधिक समय बाद भी यह बागान स्वादिष्ट आमों का उत्पादन कर रहा है और अपनी मिठास के लिए दूर-दूर तक पहचान बना चुका है. यही कारण है कि मसनोडीह का नाम आज क्षेत्र के प्रमुख और प्रसिद्ध आम बागानों में शुमार है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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