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डीएमओ : जब्त बालू वहीं है:थानेदार बोले- डीएमओ के कहने पर बालू...




रातू थाना क्षेत्र के चटकपुर गांव मे 90 हजार सीएफटी बालू गायब होने का अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। सबसे बड़ी बात है कि बालू गायब होने के दो दिन बाद भी इस मामले में किसी ने थाना में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई है। जबकि, इस मामले में बालू कारोबारी ने पुलिस-प्रशासन पर बालू चोरी करने का आरोप लगाकर सनसनी मचा दी है। बालू कारोबारी बासुदेव पंडित और प्रवीण प्रजापति ने डीएमओ पर बालू चोरी कराने का आरोप लगाया। रात के अंधेरे में चिंटू,गोलू, मोंटी, राजा शमी सहित अन्य ने 3 पोकलेन और 15 हाइवा की मदद से बालू की चोरी की गई। इस मामले में उस समय ट्विस्ट आ गया जब डीएमओ ने बताया कि 2 दिन पहले चटकपुर में 90 हजार सीएफटी बालू जब्त किया गया था। थाना को सुपुर्द किया गया है। जब्त बालू उसी जगह पर है, जहां उसे जब्त किया गया है। जबकि, इसी मामले में रातू के थानेदार आदिकांत महतो ने डीएमओ के बयान के उलट बयान दिया। उन्होंने कहा कि रात में ही डीएमओ के कहने पर बालू को जब्त करके हाइवा से भेजा गया। बालू कहां गया, डीएमओ ही बता सकते हैं।

क्या है पूरा मामला: रात 11 से सुबह 4 बजे तक हाइवा से बालू ले गए चटकपुर में बासुदेव पंडित और प्रवीण प्रजापति अवैध स्टॉक यार्ड बनाकर बालू का स्टॉक किए हुए थे। इस सूचना पर डीएमओ अबु हुसैन ने 12 मई को शाम में छापेमारी की। इस दौरान स्टॉक यार्ड के पास कोई नहीं मिला। उन्होंने इसकी सूचना रातू थानेदार को दी और बालू जब्त करने को कहा। थाना से एक सिपाही को जब्त स्थल पर भेजा गया। लेकिन, उसी रात करीब 11 बजे से सुबह 4 बजे तक 15 हाइवा से जब्त बालू का उठाव होने लगा। इसकी सूचना मिलते ही बालू कारोबारी सहित स्थानीय लोग मौके पर और बालू उठाव का विरोध किया। वहां डीएमओ भी पहुंचे। ग्रामीण बालू ले जाने की वजह जानने पर अड़ गए। डीएमओ ने कहा कि जब्त बालू सरकारी संपत्ति है, इसलिए उसे अपने कब्जे में लिया गया है। हंगामे के बाद डीएमओ और पुलिसकर्मी ग्रामीणों को चेतावनी देकर चले गए। जो अवैध बालू जब्त किया गया, वह वहीं है डीएमओ के सामने ही जब्त बालू हाइवा से भेजा चटकपुर में जब्त बालू के मामले मंे उसी रात डीएओ का फोन आया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बालू जब्त करने के दौरान हंगामा कर रहे हैं, हमें तत्काल सुरक्षा चाहिए। तब रातू थाना से फोर्स को भेजा गया। डीएमओ भी वहीं पर थे। उनके सामने ही जब्त बालू को हाइवा से उठाकर भेजा गया। बालू कहां गया, मैं नहीं बता सकता। -आ​दिकांत महतो, रातू थानेदार रांची में बालू के खेल से पुलिस-प्रशासन से लेकर माफिया हो रहे लाल रांची जिले में पिछले आठ साल से बालू की अवैध खरीद-बिक्री हो रही है। जिले के 19 बालू घाटों का टेंडर हो चुका है, लेकिन मात्र 2 घाट ही उत्खनन के लिए तैयार हैं। ऐसे में रांची में रोजाना सैकड़ों हाइवा बालू अवैध रूप से पहुंचता है। शहर के आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बालू का स्टॉक किया जा रहा है। क्योंकि, 10 जून से नदी से बालू उत्खनन पर रोक लग जाएगी। इसे देखते हुए पुलिस-प्रशासन बालू माफियाओं के साथ बालू के इस खेल को सफल बनाने में जुट गया है। क्योंकि, इससे अधिकारी लाल हो रहे हैं। हाइवा, टर्बो और ट्रैक्टर जिस रूट से बालू लेकर गुजरते हैं, उससे नेता-पुलिस लाल हो रहे हैं।



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