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डी-कंपनी का सीक्रेट मैन! जिसके पास दाऊद इब्राहिम और ISI के कई...


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वो शख्स जिसके पास दाऊद इब्राहिम और ISI के कई राज, मिली थी छोटा राजन की सुपारी

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अंडरवर्ल्ड की दुनिया में मुन्ना झिंगड़ा का नाम इसलिए भी चर्चित रहा क्योंकि उसने स्थानीय गैंगस्टर से लेकर अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश की. यही वजह है कि उसका नाम अक्सर दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क से जोड़कर देखा जाता रहा है.

वो शख्स जिसके पास दाऊद इब्राहिम और ISI के कई राज, मिली थी छोटा राजन की सुपारीZoom

दाऊद इब्राहिम के कहने पर ही मुन्ना झिंगड़ा ने छोटा राजन को मारने की कोशिश की थी. (फाइल फोटो)

मुंबई की अंडरवर्ल्ड दुनिया में कई ऐसे नाम रहे हैं जिन्होंने खौफ की अलग पहचान बनाई, लेकिन मुन्ना झिंगड़ा उर्फ सैयद मुदस्सर हुसैन का नाम उन चुनिंदा अपराधियों में गिना जाता है, जिन पर भारत की सुरक्षा एजेंसियां वर्षों से नजर रखती रही हैं. कभी मुंबई के जोगेश्वरी इलाके का रहने वाला यह शख्स आज दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क और पाकिस्तान से जुड़े कथित संबंधों के कारण चर्चा में रहता है.

सूत्रों के मुताबिक, मुन्ना झिंगड़ा लंबे समय तक दाऊद इब्राहिम और उसके सबसे करीबी सहयोगी छोटा शकील के लिए काम करता रहा. उसकी पहचान एक ऐसे शूटर की थी जो बेहद जोखिम भरे मिशनों को अंजाम देने में माहिर माना जाता था. बताया जाता है कि दाऊद को उसकी निशानेबाजी पर इतना भरोसा था कि उसने अपने कई दुश्मनों को रास्ते से हटाने की जिम्मेदारी झिंगड़ा को सौंपी थी. गैंगस्टर अरुण गवली पर हमले की जिम्मेदारी भी उसी को दी गई थी.

1997 में कथित तौर पर दाऊद ने उसे नेपाल के रास्ते पाकिस्तान बुलाया. इसके बाद वह कराची में बस गया और डी-कंपनी के नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा बन गया. कराची में रहते हुए उसने अंडरवर्ल्ड की कई गतिविधियों में भूमिका निभाई.

साल 2000 में उसे एक और बड़ा मिशन सौंपा गया. आरोप है कि दाऊद ने उसे फर्जी पाकिस्तानी पासपोर्ट पर बैंकॉक भेजा, जहां उसका मकसद दाऊद के कट्टर प्रतिद्वंद्वी छोटा राजन को खत्म करना था. इस हमले में छोटा राजन तो बच गया, लेकिन उसका करीबी सहयोगी रोहित वर्मा मारा गया. हमले के तुरंत बाद थाई पुलिस ने मुन्ना झिंगड़ा को गिरफ्तार कर लिया.

बैंकॉक की हाई-सिक्योरिटी जेल में वर्षों तक बंद रहने के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच उसकी नागरिकता को लेकर कानूनी लड़ाई चली. भारत ने डीएनए और पारिवारिक दस्तावेजों के आधार पर उसे भारतीय नागरिक बताया, जबकि पाकिस्तान ने दावा किया कि वह मोहम्मद सलीम नाम का पाकिस्तानी नागरिक है. लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद थाई अदालत ने उसे पाकिस्तानी नागरिक के रूप में मान्यता दे दी.

बताया जाता है कि 2019 में डी-कंपनी और आईएसआई से जुड़े तत्वों की मदद से वह कराची पहुंच गया. भारतीय एजेंसियों के अनुसार, उस पर मुंबई में हत्या, रंगदारी, गैंगवार और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े 70 से अधिक मामले दर्ज हैं. सुरक्षा एजेंसियां उसे केवल एक गैंगस्टर नहीं, बल्कि भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े संभावित नेटवर्क की अहम कड़ी मानती हैं.

मुन्ना झिंगड़ा की कहानी सिर्फ एक अपराधी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस अंडरवर्ल्ड तंत्र की झलक भी है, जिसने मुंबई की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक अपना जाल फैलाया.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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