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तीन साल से अटकी घाटों की टेंडर प्रक्रिया प्रत्येक वर्ष 72 करोड़...




भास्कर एक्सक्लू​िसव जिले में बालू घाटों की टेंडर प्रक्रिया पिछले ढाई साल से अधर में लटकी हुई है। इसका फायदा बालू माफिया खुलकर उठा रहे हैं। हालात यह है कि जिले की विभिन्न नदियों से हर दिन 500 से अधिक ट्रैक्टरों के जरिए अवैध बालू उठाव किया जा रहा है। 4000 रुपए प्रति ट्रैक्टर बालू बिक रहा है, इस तरह औसतन हर महीने 6 करोड़ रुपए की बालू चोरी हो रही है। टेंडर नहीं होने से सरकार को मिलने वाली प्रति ट्रैक्टर 150 रुपए राजस्व के हिसाब से प्रति वर्ष करीब 3 करोड़ का नुकसान हो रहा है। जानकार बताते हैं कि 2023 से टेंडर की प्रकि​या चल रही है, लेकिन टेंडर फाइनल नहीं हुआ। इसके कारण अब तक तीन साल में करीब 9 करोड़ रुपए का नुकसान सरकार हो हो चुका है, जबकि करीब 216 करोड़ की बालू चोरी हो चुकी है। गौरतलब है कि कैटेगरी ए और बी के कुल 7 घाटों की नीलामी होनी थी। लेकिन अब तक न तो किसी घाट का टेंडर पूरा हो सका और न ही पंचायतों को बालू उठाव का अधिकार दिया गया। टेंडर प्रक्रिया में देरी के लिए कभी झारखंड स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (जेएसएमडीसी) से आदेश नहीं मिलने का हवाला दिया गया, तो कभी पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया लंबित बताकर मामला टाल दिया गया। इस बीच बालू माफियाओं ने नदी घाटों पर कब्जा जमा रखा है, और बिना भय जिले के नदी घाटों से बालू का उठाव करने में लगे हुए है। जल्द टेंडर की प्रक्रिया पूरी होगी : डीएमओ रवि कुमार सिंह, जिला खनन पदाधिकारी, बोकारो। दामोदर नदी से ट्रैक्टर में बालू निकालते तस्कर। गांव से शहर तक चल रहा अवैध कारोबार गांव से लेकर शहरी इलाकों तक अवैध बालू का कारोबार खुलेआम चल रहा है। घाटों पर रात होते ही दर्जनों ट्रैक्टर और हाइवा नदी घाटों पर पहुंच जाते हैं और पूरी रात बालू की ढुलाई होती है। कहीं-कहीं दिन के उजाले में भी उठाव होता है। विभाग की मिली भगत का भी आरोप लगता है। इसके कारण अवैध कारोबारी बिना भय के खुलेआम ढुलाई कर मनमाने दाम पर बेच रहे है। बालू की वैध बिक्री बंद रहने से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। मकान निर्माण और अन्य कार्यों के लिए लोगों को 3000 से 5000 रुपए प्रति ट्रैक्टर तक बालू खरीदना पड़ रहा है। बाजार में बालू की किल्लत हो गई है, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। मानना है कि यदि जल्द टेंडर प्रक्रिया पूरी कर घाटों को चालू नहीं किया गया, तो अवैध कारोबार और बढ़ेगा। वहीं विभाग और प्रशासन का कहना है कि इसे रोकने के लिए नियमित छापेमारी और दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि जमीनी स्तर पर अब तक इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। बालू घाटों की टेंडर प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी और प्रशासनिक ढिलाई ने जिले में अवैध खनन को बढ़ावा दिया है। 4000 रुपए प्रति ट्रैक्टर ब्लैक में खरीद रहे बालू



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