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तारिक रहमान सरकार ने दिखा दिया अपना रंग, भारत संग डील में चीन को बना रहे चौधरी

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Tariq Rehman Government Sought China Involvement: बांग्लादेश की नई सरकार ने आखिरकार अपना रंग दिखा ही दिया है. उसने भारत के साथ एक अहम डील में चीन को चौधरी बनाने की बात कही है. ऐसे में सवाल यह है कि भारत के साथ द्विपक्षीय मुद्दों में चीन को एंट्री दिलाकर तारिक रहमान की सरकार क्या संदेश देना चाहती है.

तारिक रहमान सरकार ने दिखा दिया अपना रंग, भारत संग डील में चीन को बना रहे चौधरीZoom

बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान. फोटो- रायटर

Tariq Rehman Government Sought China Involvement: भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से अटके तीस्ता जल बंटवारा समझौते के बीच अब ढाका की नई सरकार ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने नई दिल्ली की चिंता बढ़ा दी है. बीएनपी के नेता तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार ने तीस्ता नदी पुनर्स्थापन परियोजना में चीन की भागीदारी और समर्थन मांगा है. इसे भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिहाज से बड़ा रणनीतिक संकेत माना जा रहा है.

दरअसल, बांग्लादेश लंबे समय से भारत पर 2011 के तीस्ता जल बंटवारा समझौते को लागू करने का दबाव बनाता रहा है. यह समझौता अब तक लागू नहीं हो पाया है. इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र के बीच सहमति का अभाव रहा. उस समय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस समझौते पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया.

ममता दीदी के हटने से बांग्लादेश की बढ़ी उम्मीद

बैठक में दोनों देशों के बीच तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना पर भी चर्चा हुई. यह परियोजना बांग्लादेश के लिए बेहद अहम मानी जा रही है. तीस्ता नदी भारत के सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है. ढाका इस परियोजना के जरिए नदी की ड्रेजिंग, तटबंध निर्माण और जल प्रबंधन को बेहतर बनाना चाहता है, ताकि बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया जा सके.

चीन ने खुलकर नहीं की बात

हालांकि, वांग यी ने खुलकर यह नहीं बताया कि चीन किस स्तर तक परियोजना में शामिल होगा, लेकिन उन्होंने कहा कि बीजिंग अपनी क्षमता के अनुसार बांग्लादेश को हर संभव सहायता देने को तैयार है. उन्होंने यह भी कहा कि चीन, बेल्ट एंड रोड इनेशिएटिव को बांग्लादेश की विकास रणनीतियों के साथ जोड़ना चाहता है. चीन ने यह संकेत भी दिया कि वह बांग्लादेश के साथ सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, जल संसाधन, हरित विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाना चाहता है.

दूसरी ओर खालिलुर रहमान ने चीन को बांग्लादेश का विश्वसनीय और अपरिहार्य मित्र बताया. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दक्षिण एशिया में चीन लगातार अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने में लगा हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि तीस्ता परियोजना में चीन की संभावित एंट्री भारत के लिए केवल जल बंटवारे का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सामरिक चुनौती भी बन सकती है. भारत पहले ही श्रीलंका, मालदीव और नेपाल में चीन की बढ़ती सक्रियता को लेकर सतर्क रहा है. अब बांग्लादेश में भी चीन की गहरी भागीदारी नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय बन सकती है.

तीस्ता नदी को लेकर भारत और बांग्लादेश के रिश्ते हमेशा संवेदनशील रहे हैं. बांग्लादेश का कहना है कि उसे नदी के पानी में न्यायसंगत हिस्सेदारी नहीं मिल रही, जबकि भारत में राज्य और केंद्र के बीच राजनीतिक सहमति का अभाव समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा रहा है.

About the Author

संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें



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