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दलमा में उल्लुओं की 7 प्रजातियां दर्ज, झारखंड में पहली बार देखा...


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जमशेदपुर के दलमा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में उल्लुओं की सात प्रजातियां दर्ज की गई हैं. हालिया सर्वे में 205 पक्षी प्रजातियों की पुष्टि हुई है. इनमें दुर्लभ ‘ब्राउन वुड आल’ पहली बार झारखंड में देखा गया है. दलमा का घना जंगल और समृद्ध खान-पान इन पक्षियों के लिए एक आदर्श आशियाना साबित हो रहा है.

जमशेदपुर के दलमा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में उल्लुओं की अलग-अलग प्रजातियों की मौजूदगी एक बार फिर यहां की समृद्ध जैव विविधता को सामने ला रही है. दलमा करीब 193 वर्ग किलोमीटर में फैला वन क्षेत्र है, जहां साल और मिश्रित पर्णपाती जंगलों के साथ कई तरह के पेड़-पौधे, जलस्रोत और वन्यजीव पाए जाते हैं. हालिया वैज्ञानिक अध्ययन में दलमा में 205 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई हैं, जिनमें उल्लुओं की कई प्रजातियां भी शामिल हैं.

Indian Eagle-owl (Bubo bengalensis) दलमा में पाई जाने वाली प्रमुख उल्लू प्रजातियों में शामिल है. यह आकार में बड़ा और बेहद प्रभावशाली उल्लू होता है. पुराने पक्षी सर्वे में इसे दलमा में नियमित रूप से मौजूद और सामान्य प्रजाति के रूप में दर्ज किया गया था. यह छोटे स्तनधारियों, पक्षियों और अन्य छोटे जीवों का शिकार करता है और इस तरह जंगल के खाद्य तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

Spotted Owlet (Athene brama) अपेक्षाकृत छोटा उल्लू है, जिसे जंगलों के अलावा पेड़ों वाले खुले क्षेत्रों में भी देखा जा सकता है. इसके शरीर पर सफेद धब्बे इसकी खास पहचान हैं. यह मुख्य रूप से कीड़े-मकौड़े और छोटे जीवों को भोजन बनाता है. दलमा जैसे प्राकृतिक क्षेत्र में इसकी मौजूदगी बताती है कि यहां छोटे जीवों और कीटों के लिए भी पर्याप्त भोजन उपलब्ध है, जो पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाता है.

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Brown Boobook (Ninox scutulata) रात में सक्रिय रहने वाला शिकारी पक्षी है. यह पेड़ों की शाखाओं के बीच रहकर छोटे पक्षियों, कीटों और अन्य छोटे जीवों का शिकार कर सकता है. दलमा के घने जंगल, पुराने पेड़ और शांत वातावरण ऐसी प्रजातियों के लिए उपयुक्त आवास उपलब्ध कराते हैं. यहां पक्षियों के लिए अलग-अलग माइक्रो-हैबिटैट मौजूद होना दलमा की जैव विविधता की बड़ी विशेषता है.

Barn Owl अपनी दिल के आकार जैसी चेहरे की बनावट और सफेद रंग के कारण आसानी से पहचाना जाता है. यह मुख्य रूप से रात में शिकार करता है और चूहे जैसे छोटे कृंतक इसके भोजन का हिस्सा होते हैं. जंगल और उसके आसपास ऐसे छोटे जीवों की उपलब्धता इसे भोजन देती है. यही वजह है कि उल्लू प्राकृतिक रूप से चूहों और दूसरे छोटे जीवों की संख्या नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं.

Indian Scops-owl (Otus bakkamoena) आकार में छोटा लेकिन बेहद कुशल शिकारी होता है. यह आमतौर पर पेड़ों और झाड़ियों के बीच छिपकर रहता है और रात में कीड़े-मकौड़े तथा छोटे जीवों का शिकार करता है. दलमा में घने पेड़, झाड़ियां और प्राकृतिक वनस्पतियां मौजूद हैं. वन विभाग भी दलमा की समृद्ध वनस्पति और विभिन्न प्रकार के पेड़, झाड़ियां व लताओं को इसकी जैव विविधता की महत्वपूर्ण वजह बताता है.

Jungle Owlet (Glaucidium radiatum) जंगलों से जुड़ी छोटी उल्लू प्रजाति है. इसका जीवन घने पेड़ों और प्राकृतिक वन क्षेत्र से जुड़ा रहता है. यह कीड़े-मकौड़ों के साथ छोटे पक्षियों और अन्य छोटे जीवों का शिकार कर सकता है. दलमा में 2025 के वैज्ञानिक सर्वे के दौरान कुल 205 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गईं और 93 प्रजातियों को कीटभक्षी बताया गया, जिससे यहां भोजन की विविधता का अंदाजा लगाया जा सकता है.

Brown Wood Owl की मौजूदगी दलमा के लिए विशेष महत्व रखती है. 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में दलमा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी से इस प्रजाति की झारखंड में पहली पुष्ट मौजूदगी को फोटोग्राफिक और जैव-ध्वनिक प्रमाणों के साथ दर्ज किया गया. यह खोज दलमा की पक्षी विविधता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

इन सभी प्रजातियों की मौजूदगी से यह समझ आता है कि दलमा सिर्फ हाथियों और दूसरे बड़े वन्यजीवों का घर नहीं, बल्कि रात में सक्रिय पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास है. जंगल में पर्याप्त भोजन, पेड़ों की उपलब्धता, प्राकृतिक जलस्रोत और अपेक्षाकृत शांत वातावरण उल्लुओं के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करते हैं.



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