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देव और शास्त्र सहज, पर गुरु का समागम दुर्लभ : मुनिश्री



ओडिशा प्रांत से तिलैया विहार के क्रम में मुनिश्री सुयश सागर महाराज का राजधानी रांची में मंगल प्रवेश हुआ। प्रातः 6 बजे बिरसा चौक से हरमू रोड–किशोरगंज होते हुए भुइयां टोली मार्ग से विहार कर वे करीब 8.30 बजे अपर बाजार जैन मंदिर पहुंचे। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पाद प्रक्षालन और आरती कर अगवानी की। मंदिर पहुंचने के बाद धर्मसभा में उन्होंने कहा कि रांचीवासियों का उत्साह पिछले प्रवास जैसा ही नहीं, उससे भी अधिक दिखाई दे रहा है। आगामी चतुर्मास रांची में ही जन्मे मुनि श्री 108 ज्ञेय सागर महाराज का हो रहा है। जिन धर्म का प्राप्त होना, देव शास्त्र की भक्ति प्राप्त होना सहज है, परंतु देव शास्त्र के साथ-साथ गुरु का समागम मिलना दुर्लभ है। गुरु के समागम के बिना देव शास्त्र की बातें समझ ही नहीं आती इसलिए गुरु का स्थान अग्रणी है व सर्वोत्तम है, इसलिए अरिहंत को सर्वप्रथम स्थान मिला है। प्रवचन में पद्मपुराण के प्रसंगों का उल्लेख भी किया गया। सभा में पूर्व अध्यक्ष पूरणमल सेठी, छीतरमल गंगवाल, नरेंद्र पांड्या, उपाध्यक्ष संजय छाबड़ा, पदम गोधा, कैलाश बड़जात्या स्मिता पांड्या, मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल समेत अन्य मौजूद थे।



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