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देश का अनोखा मंदिर, जहां मूर्ति की नाभि से आती है चंदन...


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तेलंगाना के इस मंदिर में भगवान की मूर्ति की नाभि से महकती है चंदन की सुगंध

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Telangana Mandir: तेलंगाना का एक प्रसिद्ध मंदिर अपनी अनोखी धार्मिक मान्यता और रहस्यमयी विशेषता के कारण श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि यहां विराजमान भगवान की मूर्ति की नाभि से चंदन जैसी सुगंध आती है और उस स्थान को स्पर्श करने पर वह मुलायम महसूस होती है. इस अनूठी विशेषता को देखने और अनुभव करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर की यह मान्यता वर्षों से लोगों की आस्था का हिस्सा रही है. धार्मिक महत्व के साथ यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के कारण भी पर्यटकों और भक्तों को विशेष रूप से आकर्षित करता है.

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हैदराबाद: भारत में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं जो अपने चमत्कारों और अनसुलझे रहस्यों के लिए जाने जाते हैं. ऐसा ही एक अनोखा और ऐतिहासिक मंदिर तेलंगाना के जयशंकर भूपालपल्ली जिले के घने जंगलों में स्थित है. मल्लूर गुट्टा पहाड़ी पर बने इस मंदिर को श्री हेमाचला लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर के नाम से जाना जाता है. लगभग दो हजार साल से भी पुराने इस मंदिर में भगवान नरसिम्हा की एक बेहद रहस्यमयी मूर्ति स्थापित है जिसे देखने और महसूस करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं.

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ स्थापित भगवान नरसिम्हा की करीब 10 फीट ऊँची स्वयंभू मूर्ति है. आमतौर पर देवी-देवताओं की मूर्तियाँ कठोर चट्टानों या धातुओं से बनी होती हैं, लेकिन यहाँ की मूर्ति का ऊपरी हिस्सा किसी आम पत्थर की तरह सख्त नहीं है. मंदिर के पुजारियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, जब मूर्ति के पेट या छाती वाले हिस्से को उंगली या तुलसी के पत्ते से धीरे से दबाया जाता है तो वह इंसानी त्वचा या स्पंज की तरह अंदर धंस जाता है. थोड़ी देर बाद वह हिस्सा अपने आप सामान्य रूप में वापस आ जाता है. विज्ञान के पास अभी तक इस घटना की कोई सटीक व्याख्या नहीं है.

पुजारी रोजाना नाभि पर ताजा चंदन का लेप
इसके अलावा, मंदिर से जुड़ा एक और बड़ा रहस्य भगवान की नाभि से होने वाला रिसाव है. मूर्ति की नाभि से लगातार एक विशेष लिक्विड निकलता रहता है. जिसमें से प्राकृतिक चंदन की महक आती है. इस रिसाव को रोकने और मूर्ति को शीतलता प्रदान करने के लिए पुजारी रोजाना नाभि पर ताजा चंदन का लेप लगाते हैं.

मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश पूरी तरह बंद
इस पहाड़ी के पास ही एक पवित्र जलधारा बहती है जिसे चिंतामणि तीर्थम कहा जाता है. घने जंगलों की दुर्लभ जड़ी-बूटियों के बीच से बहकर आने के कारण इस पानी को बेहद औषधीय माना जाता है. मान्यता है कि इसका पानी सालों-साल रखने के बाद भी कभी खराब नहीं होता. घने वन क्षेत्र में होने के कारण और प्राचीन परंपराओं को निभाते हुए सुरक्षा के लिहाज से शाम साढ़े पांच बजे के बाद इस मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया जाता है.

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Jagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…

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