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Palamu Low Rainfall Solution: पलामू में कम बारिश होने के कारण धान की रोपनी काफी प्रभावित हुई है और बहुत से किसानों के खेत खाली पड़े हैं. ऐसे में कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार ने अरहर की खेती की सलाह दी है. सरकार अरहर बीज उत्पादन पर ₹4,500 प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि दे रही है
पलामू. इस बार बरसात का मौसम किसानों के लिए परेशानी लेकर आया है. क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी के अनुसार, पलामू में जुलाई महीने में अब तक करीब 217 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि जून में सामान्य से करीब 60 प्रतिशत कम बारिश हुई. कम बारिश की वजह से जिले के कई किसानों की धान की रोपनी अब तक नहीं हो सकी है. खासकर टांड़ वाली जमीनें अभी भी खाली पड़ी हैं. ऐसे में किसानों के सामने यह सवाल है कि आखिर अब कौन सी फसल लगाई जाए.
इसकी खेती है विकल्प
ऐसी परिस्थिति में क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार किसानों को अरहर की खेती करने की सलाह दे रहे हैं. कंटीजेंसी प्लान के तहत अगस्त से सितंबर तक भी अरहर की बुआई की जा सकती है. यह कम पानी में अच्छी तरह तैयार होने वाली फसल है और लगभग आठ महीने में तैयार होती है. इसलिए जिन किसानों की धान की खेती नहीं हो पाई है, उनके लिए यह बेहतर विकल्प साबित हो सकती है.
सरकार दे रही प्रोत्साहन राशि
उन्होंने बताया कि पलामू जिले में अरहर की खेती का विशेष महत्व है. इसे लेकर झारखंड सरकार और भारत सरकार किसानों को अरहर के बीज उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं. अगर किसान फाउंडेशन बीज लगाकर उसका सर्टिफाइड बीज तैयार करते हैं, तो सरकार उन्हें प्रति क्विंटल 4,500 रुपये की प्रोत्साहन राशि देती है.
अगर कोई किसान 10 क्विंटल तक बीज उत्पादन करता है, तो उसे 45 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि लागत खर्च के रूप में मिल सकती है. इसके अलावा तैयार बीज की बिक्री से अलग आय भी होगी, जिससे किसानों का मुनाफा और बढ़ जाएगा.
एक एकड़ में इतने बीजों की जरूरत
एक एकड़ में लगभग 6 से 8 किलोग्राम फाउंडेशन बीज की आवश्यकता होती है और अच्छी खेती होने पर 4 से 5 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है. फिलहाल कई किसानों को इस योजना के तहत फाउंडेशन बीज उपलब्ध कराकर खेती कराई जा रही है, ताकि वे बेहतर उत्पादन के साथ सरकारी लाभ भी प्राप्त कर सकें.
उन्होंने बताया कि हालांकि, इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को समय पर पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा. रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित की गई है. ऐसे में अगर आपके खेत अभी भी खाली हैं और धान की रोपनी नहीं हो पाई है, तो अरहर की खेती आपके लिए कम लागत, कम पानी और सरकारी प्रोत्साहन के साथ बेहतर कमाई का अवसर बन सकती है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …
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