बरसात का मौसम शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी है, लेकिन इस बीच किसान धान की रोपाई की तैयारी में जुट गए हैं. अगर आप किसान हैं और धान की रोपाई करना चाहते हैं और चाहते हैं कि आगे चलकर आपकी फसल में खरपतवार न आएं, तो रोपाई से पहले यह जरूरी काम जरूर कर लें. इससे आपकी धान की फसल में खरपतवार की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी. आइए जानते हैं कि वे कौन-से जरूरी उपाय हैं, जिनसे फसल में खरपतवार नहीं उगेंगे.
जानकारी के अभाव में किसान नहीं कर पाते सही खेती
लोकल 18 से बातचीत में जिला कृषि अधिकारी सोम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि पूर्वांचल में ज्यादातर किसान धान की खेती संडा विधि से करते हैं. इस विधि में पर्याप्त जानकारी के अभाव में किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. खरपतवार को नष्ट करने के लिए किसान काफी पैसा और रसायनों का उपयोग करते हैं, जबकि थोड़ी-सी जानकारी और सावधानी बरतकर इस अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है.
उन्होंने बताया कि वर्तमान में किसान धान की नर्सरी तैयार कर रहे हैं और लगभग 21 दिन बाद संडा की रोपाई की जाती है. रोपाई से पहले कुछ आवश्यक कार्य कर लेने से खरपतवार की समस्या काफी कम हो सकती है.
धान की रोपाई से 20-25 दिन पहले करें हल्की सिंचाई
सोम प्रकाश गुप्ता के अनुसार, जब खेत में अंतिम रोपाई करनी हो, तो उससे 20 से 25 दिन पहले किसी भी साधन से हल्की सिंचाई कर दें. इससे खेत में मौजूद खरपतवार के बीज अंकुरित होकर उगने लगेंगे.
हल्की सिंचाई के बाद खेत में उगने वाले अधिकांश खरपतवार बाहर आ जाते हैं. जब इन खरपतवारों में दो से तीन पत्तियां निकल आएं, तब रोपाई से पहले खेत में पानी भरकर कीचड़ वाली जुताई कर दें और खरपतवारों को मिट्टी में दबा दें. जब ये खरपतवार कीचड़ में दब जाएंगे और उसके बाद धान की रोपाई कर दी जाएगी, तो वे दोबारा नहीं उग पाएंगे.
80 प्रतिशत तक कम हो सकते हैं खरपतवार
उन्होंने बताया कि रोपाई से पहले हल्की सिंचाई करने पर उस मौसम में उगने वाले 80 से 90 प्रतिशत खरपतवार पहले ही अंकुरित हो जाते हैं. यदि इन खरपतवारों को रोपाई से पहले कीचड़ में दबा दिया जाए, तो लगभग 80 प्रतिशत तक खरपतवार की समस्या समाप्त हो सकती है.
इससे किसान खरपतवार नियंत्रण पर होने वाले अतिरिक्त खर्च से बच सकते हैं. धान की फसल में खरपतवार आने पर महंगे रसायनों और खरपतवारनाशकों का उपयोग करना पड़ता है, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ फसल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
इसलिए, यदि आप धान की रोपाई करने जा रहे हैं, तो पहले खेत में हल्की सिंचाई करें और उगे हुए खरपतवारों को जुताई के दौरान कीचड़ में दबा दें. इससे आपकी फसल मजबूत होगी और खरपतवार की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी.