भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

‘धोनी’ फिल्म की शूटिंग के दौरान सुशांत सिंह राजपूत यहीं आते थे...


होमफोटोलाइफ़फूड

‘धोनी’ फिल्म की शूटिंग के दौरान सुशांत सिंह राजपूत यहीं आते थे गोलगप्पे खाने

Last Updated:

Ranchi Famous Golgappa: रांची में बहुत सी जगहों पर गोलगप्पे मिलते हैं लेकिन लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल के बाहर का ‘चटपटा गोलगप्पा कॉर्नर’, शहर में काफी लोकप्रिय है. इनकी कीमत ज्यादा है पर लोग फिर भी स्वाद लेने आते हैं और भीड़ लगी ही रहती है. स्टॉल संचालक विवेक बताते हैं कि फिल्म ‘धोनी’ की शूटिंग के दौरान सुशांत सिंह राजपूत भी देर रात यहां गोलगप्पे खाने आते थे. उनके पास सुशांत की तस्वीर भी है.

रांची के डोरंडा स्थित लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल के बाहर शाम 5 से रात 8 बजे तक गोलगप्पा का स्टॉल लगता है. यह रांची के लोगों का फेवरेट और शहर का सबसे लोकप्रिय गोलगप्पा स्टॉल कहा जा सकता है. खास बात ये है कि रांची में जब ‘धोनी’ फिल्म की शूटिंग चल रही थी तब सुशांत सिंह राजपूत हर दिन यहां पर देर रात पहुंच जाते थे और किसी को भनक भी नहीं लगती थी.

यहां का टेस्ट ऐसा है कि एक बार खाएंगे तो बार-बार आएंगे. हालांकि, रांची में सबसे महंगा गोलगप्पा भी यहीं मिलता है. इसके बावजूद भी लोग 20 किलोमीटर दूर से इसे खाने के लिए आते हैं. आपको ₹20 में मात्र पांच पीस गोलगप्पा मिलेगा. लेकिन इसका स्वाद लेने के लिए हर शाम बहुत भीड़ लगती है. यह इतना हल्का होता है कि आप जितना भी खा लें आपको लगेगा आपने कुछ खाया ही नहीं है.

स्टॉल के संचालक विवेक बताते हैं, कि हमारी सबसे खास बात यह है कि हम जो मसाले इस्तेमाल करते हैं चाहे वह लाल मिर्च हो, जीरा पाउडर या फिर चाट मसाला, हम कुछ भी बाजार का इस्तेमाल नहीं करते बल्कि खुद तैयार करते हैं. इसके साथ ही खड़ा मसाला जो बाजार से लेते हैं उसकी क्वालिटी एवन होती है. इसे घर में धोकर, सुखाकर और फिर उसको पीसा जाता है. यही कारण है की हमारे जैसा टेस्ट आपको और कहीं नहीं मिलेगा.

Add News18 as
Preferred Source on Google

उन्होंने बताया कि पानी का खट्टापन भी इतना बैलेंस होता है कि आपको खटास ना अधिक लगेगी ना कम. यह सब काम करते-करते एक्सपीरियंस हो चुका है. पहले खुद टेस्ट करके देखता हूं और फिर बेचता हूं. हमारी जो पापड़ी है यानी कि जो गोलगप्पा होता है वह एकदम पतला होता है और इतना क्रिस्पी होता है की मुंह में जाते ही स्वाद का पटाखा फूटता है.

हमारे पास आपको गोलगप्पा, पापड़ी, चुरमुर खाने को मिलेगा. हम सखुए के पत्ते में परोसते हैं. मात्र तीन से चार घंटे में ही पूरे के पूरे आइटम आउट ऑफ स्टॉक हो जाते हैं. कई बार तो लोग 8 बजे आते हैं और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है. सुशांत सिंह राजपूत जब थे तब रेगुलर यहां पर टोपी लगाकर और नॉर्मल कपड़े पहनकर आते थे इसलिए लोग उनको पहचान नहीं पाते थे.

वे एकदम साधारण व्यक्ति की तरह गोलगप्पा खाकर निकल जाते थे और किसी को पता भी नहीं चलता था. हालांकि, वह देर रात आते थे, अपनी पूरी शूटिंग खत्म करके. आज भी उनकी फोटो हमारे साथ है. हमारे पास गोलगप्पे खाने 20-20 किलोमीटर दूर से लोग आते हैं और कहते हैं बस टेस्ट करने आया हूं आपका इतना नाम सुना है. इतना ही नहीं जब एक बार आते हैं तो फिर परमानेंट कस्टमर बन जाते हैं.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top