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बाजरे की बंपर पैदावार का देसी फॉर्मूला, किसान ट्रैक्टर से कर रहे ‘कुरूप’

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Monsoon Farming Tips: भरतपुर के किसान बाजरे की फसल में अधिक उत्पादन के लिए ट्रैक्टर से ‘कुरूप’ का उपयोग कर रहे हैं. इस तरीके से फसल की जड़ों को पर्याप्त हवा मिलती है, खरपतवार नियंत्रित होते हैं और मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है. परिणामस्वरूप पौधों का विकास तेजी से होता है और पैदावार में सुधार देखने को मिलता है. किसानों का कहना है कि यह तकनीक लागत कम करने के साथ फसल को अधिक मजबूत भी बनाती है. कृषि विशेषज्ञ भी समय पर खेत प्रबंधन को बाजरे की अच्छी उपज के लिए जरूरी मानते हैं.

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भरतपुर: भरतपुर जिले के किसान बाजरे की फसल में एक खास पारंपरिक तकनीक कुरूप अपनाते हैं. जिससे बाजरे की फसल बेहतर होती है. यह तकनीक फसल की बढ़वार के दौरान ट्रैक्टर के माध्यम से की जाती है. जिसमें पौधों की जड़ों के आसपास हल्की जुताई की जाती है. किसानों का कहना है कि इस विधि से फसल की ग्रोथ तेज होती है और उत्पादन में भी अच्छा होता है. दरअसल कुरूप प्रक्रिया के तहत खेत में खड़ी फसल के बीच ट्रैक्टर चलाकर मिट्टी को हल्का ढीला किया जाता है.

इससे पौधों की जड़ों के आसपास की सख्त मिट्टी टूट जाती है और जड़ों को पर्याप्त हवा और पोषक तत्व मिलने लगते हैं. यह प्रक्रिया न केवल पौधों की मजबूती बढ़ाती है, बल्कि उनकी वृद्धि को भी गति देती है. भरतपुर के किसान लंबे समय से इस पारंपरिक तकनीक को अपनाते आ रहे हैं. आधुनिक कृषि उपकरणों के साथ इस तकनीक को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है. कुरूप करने से फसल में हरियाली बढ़ती है. पौधे मजबूत होते हैं और बालियां भी बेहतर विकसित होती हैं.

फसल में नराई-गुड़ाई के साथ कुरूप करना जरूरी
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक राधेश्याम मीणा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि बाजरे की फसल में नराई-गुड़ाई के साथ कुरूप करना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया फसल की जड़ों को सक्रिय करती है. जिससे पौधे तेजी से विकसित होते हैं. साथ ही खेत में नमी और पोषण का बेहतर संतुलन बना रहता है. जो अच्छी पैदावार के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे समय पर इस प्रक्रिया को अपनाएं. ताकि फसल को अधिकतम लाभ मिल सके कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक कम लागत में बेहतर उत्पादन देने वाली साबित हो रही है. जिससे किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है. भरतपुर के किसान पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक साधनों के मेल से खेती में नए नए काम कर रहे हैं. बाजरे की फसल में कुरूप तकनीक इसका एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभर रही है. जिसको भरतपुर के किसान अपना रहे हैं.

About the Author

Jagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

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