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Purnia News: पूर्णिया में शशि कुमार उर्फ मिट्ठू ने कोरोना काल में एक मानसिक रोगी को नाली से खाना खाते देखने के बाद बेसहारा लोगों को भोजन कराने का संकल्प लिया. ‘श्रीकृष्ण सेवा ट्रस्ट नव भारत सामूहिक रसोई’ अब तक 1107 दिनों से लगातार गरीब, लाचार, दिव्यांग और मानसिक रोगियों को भोजन उपलब्ध करा रही है. जानें मानवता की मिसाल की ये अनोखी कहानी.
पूर्णिया: मौसम चाहे भीषण गर्मी का हो, कड़ाके की शीतलहर का या फिर मूसलाधार बारिश का. पूर्णिया शहर की सड़कों पर गुजरने वाली हर रात कुछ बेबस और असहाय जिंदगियों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आती है. शहर के चौक-चौराहों और सड़कों के किनारे जीवन बिताने वाले मानसिक रूप से विक्षिप्त, दिव्यांग और बेघर लोगों के लिए ‘श्रीकृष्ण सेवा ट्रस्ट नव भारत सामूहिक रसोई’ एक मजबूत सहारा बन चुका है. संस्था द्वारा चलाए जा रहे इस निःशुल्क भोजन सेवा अभियान ने हाल ही में सफलता के 1100 दिन पूरे कर लिए हैं. इस खास उपलब्धि के अवसर पर संस्था के सदस्यों ने केक काटकर खुशियां बांटीं और यह संकल्प दोहराया कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, यह सेवा कार्य निरंतर जारी रहेगा.
कोरोना काल के एक झकझोर देने वाले मंजर से हुई शुरुआत
इस नेक पहल की शुरुआत करने वाले शशि कुमार उर्फ मिट्ठू बताते हैं कि कोरोना काल के दौरान सदर अस्पताल के पास एक मानसिक रोगी को नाली से और लाइन बाजार में एक अन्य लाचार को कचरे के डस्टबिन से खाना खाते हुए देखा था. इस अमानवीय और दिल को झकझोर देने वाले दृश्य ने उनके अंदर की इंसानियत को झकझोर दिया. उसी पल उन्होंने प्रण लिया कि वे सड़कों पर लावारिस और मानसिक रूप से अस्वस्थ घूम रहे लोगों को भूखा नहीं रहने देंगे. इसके बाद उन्होंने अपने करीबी दोस्तों चंदन तिवारी, रमन कुमार और अन्य साथियों के साथ मिलकर इस सामुदायिक रसोई की नींव रखी. आज यह कारवां इतना बड़ा हो चुका है कि रोजाना लगभग 200 असहाय लोगों के पेट की आग बुझाई जा रही है.
आंधी-तूफान में भी नहीं रुकते कदम
श्रीकृष्ण सेवा सदन की टीम प्रतिदिन रात के समय शहर के विभिन्न इलाकों में घूम-घूमकर सड़कों पर सो रहे लाचार, दिव्यांग और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों तक गुणवत्तापूर्ण और गर्म भोजन पहुंचाती है. संस्था का सिर्फ एक ही उद्देश्य है शहर में कोई भी असहाय व्यक्ति रात को भूखे पेट न सोए. इस अभियान से जुड़े विकास वर्मा, शनि कुमार, सुमित यादव, संगम यादव, पुष्पराज, धीरज यादव, आशु वर्मा, कन्हैया, दिव्यांशु, पुष्कर और प्रशांत सिंह जैसे समर्पित युवा हर दिन बिना थके इस पवित्र कार्य को अंजाम दे रहे हैं.
जनभागीदारी की मिसाल: बिना सरकारी मदद के चल रहा कारवां
इस सेवा अभियान की सबसे बड़ी खासियत इसकी पारदर्शी और सामुदायिक कार्यप्रणाली है. संगठन ने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है. जिससे पूर्णिया ही नहीं बल्कि बिहार के विभिन्न जिलों, अन्य प्रदेशों और विदेशों तक से बुद्धिजीवी और युवा वर्ग जुड़े हुए हैं. लोग अपने जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ, पूर्वजों की पुण्यतिथि या अन्य खास अवसरों पर केक काटने या पार्टी करने के बजाय इस ग्रुप के माध्यम से आर्थिक या खाद्य सामग्री का सहयोग करते हैं.
सच्ची मानवता जरूरमंदों की आंसुओं को पोछने में
श्रीकृष्ण सेवा सदन के अध्यक्ष शशि कुमार ने कहा कि इसी जनभागीदारी और लोगों के स्नेह की बदौलत यह अभियान बिना किसी सरकारी अनुदान के पिछले 1100 से अधिक दिनों से लगातार चल रहा है. असहायों के चेहरे पर भोजन पाने के बाद आने वाली मुस्कान ही हमारी असली ताकत है. समाज के सक्षम लोगों को भी ऐसे निस्वार्थ सेवा कार्यों से प्रेरणा लेनी चाहिए. पूर्णिया की सड़कों पर ठंड और भूख से लड़ते लोगों के लिए शशि कुमार और उनकी टीम किसी मसीहा से कम नहीं है. इनकी यह कहानी हमें यह सिखाती है कि सच्ची मानवता जरूरतमंदों के आंसुओं को पोछने में है.
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अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …
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