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नौकरी और पीएचडी एडमिशन पर पड़ रहा असर:आरयू के खाते में 100...




प्रबंधन की वित्तीय और प्रशासनिक लापरवाही से पोस्टल रिचार्ज खत्म रांची यूनिवर्सिटी (आरयू) की वित्तीय और प्रशासनिक लापरवाही अब सीधे छात्रों के भविष्य पर भारी पड़ रही है। हालत यह है कि परीक्षा विभाग के खाते में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा राशि मौजूद होने के बावजूद यूनिवर्सिटी के पास रजिस्टर्ड डाक से सर्टिफिकेट और जरूरी दस्तावेज भेजने तक के पैसे नहीं बचे हैं। पोस्टल डिस्पैच के लिए जमा राशि खत्म होने के कारण पिछले चार दिनों से विश्वविद्यालय का डाक सिस्टम पूरी तरह ठप पड़ा है। इसका असर डिग्री, ट्रांसक्रिप्ट, माइग्रेशन और अन्य जरूरी दस्तावेजों पर पड़ा है। ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन करने वाले छात्रों को अब अपने दस्तावेज मिलने का इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि यूनिवर्सिटी फिलहाल जरूरी डिग्री वेरिफिकेशन और सरकारी पत्राचार तक नहीं कर पा रही है। ऐसे में नौकरी, उच्च शिक्षा और विदेश आवेदन से जुड़े मामलों में छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जानकारी के मुताबिक परीक्षा विभाग ने अप्रैल महीने में ही पोस्टल रिचार्ज के लिए फाइल बढ़ा दी थी। सामान्य प्रक्रिया के तहत राशि खत्म होने से पहले रांची जीपीओ के नाम चेक जारी कर पोस्टल अकाउंट रिचार्ज कराया जाता है, ताकि डाक सेवा बाधित न हो। लेकिन इस बार फाइल निष्पादन की रफ्तार इतनी धीमी रही कि राशि पूरी तरह खत्म हो गई और समय पर रिचार्ज नहीं हो सका। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है
नौकरी और काउंसिलिंग के लिए जरूरी हैं दस्तावेज: रांची यूनिवर्सिटी से बड़ी संख्या में छात्र डिग्री, ट्रांसक्रिप्ट और अन्य प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते हैं। इसके अलावा राज्य समेत देश-विदेश से वेरिफिकेशन के लिए भी आवेदन आते हैं। डिग्री समेत अन्य दस्तावेज निबंधित डाक से संबंधित पते पर भेजे जाते हैं। इस बीच जानकारी मिली है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने रिचार्ज के लिए दो लाख रुपए की स्वीकृति दे दी है। हालांकि सोमवार शाम तक रिचार्ज नहीं हो सका था। बाहर के छात्रों की सबसे ज्यादा बढ़ी परेशानी: रांची यूनिवर्सिटी से हर साल बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों के छात्र भी पासआउट होते हैं। इनमें तकनीकी, प्रोफेशनल और शोध पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी शामिल हैं। ऐसे छात्रों को नौकरी, पीएचडी एडमिशन, स्कॉलरशिप और दूसरे विश्वविद्यालयों में नामांकन के लिए तत्काल डिग्री वेरिफिकेशन और मूल प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ती है। डिस्पैच बंद होने का सबसे ज्यादा असर इन्हीं छात्रों पर पड़ रहा है, क्योंकि उनके लिए हर बार रांची आकर दस्तावेज लेना संभव नहीं होता। ऐसे काम करता है यूनिवर्सिटी का डिस्पैच सिस्टम: रांची यूनिवर्सिटी के परीक्षा विभाग से हर महीने सैकड़ों डिग्री, वेरिफिकेशन लेटर और अन्य दस्तावेज डाक के जरिए भेजे जाते हैं। इसके लिए विश्वविद्यालय जीपीओ रांची में एडवांस राशि जमा कराता है। इसी राशि से स्पीड पोस्ट और रजिस्टर्ड डाक का खर्च काटा जाता है। राशि खत्म होने पर नया रिचार्ज कराना अनिवार्य होता है। इस प्रक्रिया में देरी होने पर पूरा डिस्पैच सिस्टम स्वतः बंद हो जाता है। डाक विभाग को दो लाख रुपए का चेक भेजा गया
^रांची यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने डाक विभाग को दो लाख रुपए का चेक भेज दिया है। तकनीकी समस्या के कारण चेक क्लियर नहीं हो सका है। राशि क्लियर होते ही डाक मशीन रिचार्ज होगी। रजिस्टर्ड डाक भेजना शुरू हो जाएगा। -डॉ स्मृति सिंह, पीआरओ, आरयू



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