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Inspiration Story: जमशेदपुर की 55 वर्षीय स्नेहलता देवी ने पति की मौत और दुर्घटना के बाद भी हार नहीं मानी, लोन लेकर टोटो खरीदी. इस उम्र में भी आज वह खुद चलाती हैं और आत्मनिर्भर होकर दूसरों की मदद भी करती हैं.
जमशेदपुर: जिंदगी में मुश्किलें हर किसी के सामने आती हैं, लेकिन कुछ लोग परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय उनसे लड़कर नई मिसाल कायम करते हैं. ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है जमशेदपुर की 55 वर्षीय स्नेहलता देवी की, जिन्होंने तमाम संघर्षों और शारीरिक परेशानियों के बावजूद हार नहीं मानी और आज टोटो चलाकर अपनी आजीविका चला रही हैं. आइये जानते हैं उनके बारे में.
15 साल पहले हो गई थी पति की मौत
स्नेहलता देवी के पति का निधन लगभग 15 वर्ष पहले हो गया था. पति के निधन के बाद उनके सामने जीवनयापन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई. हालांकि उन्होंने कभी परिस्थितियों को खुद पर हावी नहीं होने दिया. परिवार की जिम्मेदारियों और अपने जीवन को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत की. कभी राशन की दुकान चलाई, कभी सिलाई का काम किया और कभी कंपनी की कैंटीन में काम करके अपनी जीविका चलाती रही.
जीवन किसी तरह आगे बढ़ रहा था, लेकिन कुछ वर्ष पहले उनके सामने एक और बड़ी चुनौती आ गई. एक दुर्घटना में उनकी कमर और पैर की हड्डी टूट गई. स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण कंपनी में उनका काम भी छूट गया. कुछ समय तक वह घर पर रहीं, लेकिन खाली बैठना उन्हें मंजूर नहीं था. उनके भीतर कुछ नया करने और आत्मनिर्भर बने रहने की इच्छा लगातार बनी रही.
लोन के पैसे से ली टोटो गाड़ी
इसी दौरान उन्होंने टोटो खरीदने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने लोन लिया और खुद टोटो चलाने की ठानी. शुरुआत आसान नहीं थी. एक महिला होने के साथ-साथ उम्र और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी थीं. सड़क पर टोटो लेकर निकलने में झिझक और डर दोनों था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. धीरे-धीरे उन्होंने टोटो चलाना सीखा और आत्मविश्वास के साथ सड़क पर उतर गईं.
आज स्नेहलता देवी जमशेदपुर की उन चुनिंदा महिलाओं में शामिल हैं. जो इस उम्र में भी पूरी ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ टोटो चला रही हैं. वह रोजाना शहर की सड़कों पर यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं और सम्मानपूर्वक अपनी जीवन जी रही हैं. स्नेहलता देवी बताती हैं कि उन्हें कोई संतान नहीं है, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उनका मानना है कि मेहनत करने वाले व्यक्ति को कभी हार नहीं माननी चाहिए. जो भी कमाई होती है, उससे वे अपना जीवनयापन करने के साथ-साथ आसपास के जरूरतमंद लोगों की मदद करने का भी प्रयास करती हैं.
वह कहती हैं कि “बैठे रहने से कोई पैसा नहीं देता. अगर शरीर साथ दे रहा है तो काम करते रहना चाहिए. उम्र भले ही बढ़ गई हो, लेकिन मेरा हौसला और जज्बा आज भी जवान है.” स्नेहलता देवी की कहानी यह साबित करती है कि सफलता और आत्मनिर्भरता की राह में उम्र कभी बाधा नहीं बनती है. दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है. उनकी संघर्षगाथा आज समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें