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राष्ट्रपति भवन में गूंजी शिबू सोरेन के संघर्ष की आवाज: मरणोपरांत पद्म भूषण से नवाजे गए ‘गुरुजी’ दशकों तक झारखंड के जंगलों, पहाड़ों और खेतों में गूंजने वाली शिबू सोरेन (गुरुजी) के संघर्ष की आवाज आज राष्ट्रपति भवन में गूंजी। देश ने मौन शीश नवाकर इसे स्वीकार किया। मौका था राष्ट्रपति भवन में विशेष अलंकरण समारोह का, जहां मरणोपरांत झारखंड आंदोलन के नायक शिबू सोरेन को पद्म भूषण से नवाजा गया। मरणोपरांत शिबू सोरेन को देश का यह तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला है। व्हीलचेयर पर सम्मान लेने पहुंचीं पत्नी रूपी सोरेन, नम हुईं परिजनों की आंखें शिबू सोरेन के संघर्ष की सबसे अडिग गवाह उनकी पत्नी रूपी सोरेन व्हीलचेयर पर सवार होकर महामहिम द्रौपदी मुर्मू के सामने पहुंचीं। जैसे ही राष्ट्रपति ने झुककर रूपी सोरेन के हाथों में पद्म भूषण सौंपा, पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उस पल दर्शक दीर्घा में एक अलग ही दृश्य जीवंत हो रहा था। समारोह में मौजूद गुरुजी की बहू कल्पना सोरेन, हेमलता सोरेन और बेटी अंजनी सोरेन की आंखें गर्व से नम थीं। जब तक रूपी सोरेन के हाथों में सम्मान रहा, दीर्घा में बैठीं बेटियां और बहुएं इस ऐतिहासिक क्षण को अपनी स्मृतियों में दर्ज करती रहीं। सीएम हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर लिखा: “राष्ट्रपति व केंद्र का आभार, पर हमारे लिए गुरुजी भारत के रत्न थे और सदैव रहेंगे” मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा— “स्मृति शेष बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पद्म भूषण सम्मान से अलंकृत किया जाना उनके आजीवन संघर्ष, त्याग, जनसेवा और सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण को दिया गया सम्मान है। बाबा के संघर्ष की साथी, मां ने यह सम्मान ग्रहण किया।” मुख्य बिंदु: गुरुजी को मिला पद्म भूषण। मरणोपरांत शिबू सोरेन को मिला देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान। समारोह में शामिल हुईं बहू कल्पना-हेमलता व बेटी अंजनी।
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