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पर्यावरण दिवस पर गाजीपुर में पौधारोपण की हकीकत, दम तोड़ रहे पौधे...


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विश्व पर्यावरण दिवस पर हर साल करोड़ों पौधे लगाने के दावे किए जाते हैं और सरकारी रिकॉर्ड में हरित अभियान की सफलता की लंबी कहानियां भी दर्ज होती हैं, लेकिन गाजीपुर में जमीनी हकीकत इन दावों से काफी अलग दिखाई दे रही है. पौधारोपण पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई पौधे पर्याप्त देखभाल के अभाव में दम तोड़ रहे हैं, जबकि उनकी सुरक्षा के लिए लगाए गए ट्री गार्ड भी टूट-फूटकर बेकार हो चुके हैं.

गाजीपुरः विश्व पर्यावरण दिवस पर हर साल करोड़ों पौधे लगाने के दावे किए जाते हैं और सरकारी रिकॉर्ड में हरित अभियान की सफलता की लंबी कहानियां भी दर्ज होती हैं, लेकिन गाजीपुर में जमीनी हकीकत इन दावों से काफी अलग दिखाई दे रही है. पौधारोपण पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई पौधे पर्याप्त देखभाल के अभाव में दम तोड़ रहे हैं, जबकि उनकी सुरक्षा के लिए लगाए गए ट्री गार्ड भी टूट-फूटकर बेकार हो चुके हैं.

इस स्थिति की पड़ताल करने के लिए लोकल 18 की टीम आरटीआई चौराहा से मेडिकल कॉलेज रोड तक पहुंची, जहां सड़क किनारे लगाए गए पौधों की हालत कई सवाल खड़े करती नजर आई. निरीक्षण के दौरान दर्जनों ऐसे पौधे मिले जिनके ट्री गार्ड टूट चुके थे. कई स्थानों पर ट्री गार्ड तो मौजूद थे लेकिन उनकी जाली गायब थी। कुछ पौधे झुके हुए मिले तो कई की शाखाएं टूट चुकी थीं.

ट्री गार्ड टूटे-फूटे मिले

सड़क किनारे लगे पौधों के आसपास गंदगी और कचरे का ढेर भी दिखाई दिया. हालात ऐसे हैं कि पेड़ों से ज्यादा उनके ट्री गार्ड संरक्षण की मांग करते नजर आ रहे हैं. करीब 20 से 25 ऐसे पौधे मिले जिनके ट्री गार्ड पूरी तरह क्षतिग्रस्त थे या उनकी सुरक्षा व्यवस्था नदारद थी.

स्थानीय लोगों का कहना है कि पौधारोपण के समय विभागीय अधिकारी और कर्मचारी सक्रिय दिखाई देते हैं, लेकिन बाद में पौधों की देखभाल और निगरानी लगभग बंद हो जाती है. गर्मी के मौसम में पानी देने और पौधों को बचाने की जिम्मेदारी अक्सर स्थानीय नागरिकों पर आ जाती है. महराजगंज निवासी हरिवंश यादव ने लोकल 18 से बताया कि हर साल बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन उनकी देखभाल नहीं होती. उन्होंने कहा कि कई जगह ट्री गार्ड तक नहीं लगाए गए हैं. स्थानीय लोग खुद पौधों को पानी देकर उन्हें बचाने की कोशिश करते हैं. यदि लोग ध्यान न दें तो कई पौधे सूख सकते हैं.

पौधे बड़े होकर दें छाया तभी सफलता

उन्होंने यह भी कहा कि केवल पौधों की संख्या बढ़ाने से पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं होगा. असली सफलता तब मानी जाएगी जब लगाए गए पौधे सुरक्षित रहकर बड़े पेड़ों का रूप लें और लोगों को छाया, स्वच्छ हवा तथा पर्यावरणीय लाभ प्रदान करें. विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि पौधारोपण के बाद उनकी देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी कौन तय करेगा. जब तक पौधों के रखरखाव की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक करोड़ों पौधे लगाने के दावे केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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