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पलामू टाइगर रिजर्व के ग्रामीणों को बड़ी राहत, अब मात्र ₹50 में...


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PTR Villagers Can Now Enjoy Safari In Rs. 50: पलामू टाइगर रिजर्व में स्थानीय ग्रामीण अब मात्र पचास रुपये शुल्क देकर जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे. बाहरी पर्यटकों के लिए शुल्क 1950 रुपये ही रहेगा. पलामू किला घूमने के लिए भी अब जंगल सफारी वाहन से जाना अनिवार्य होगा.

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पलामू. पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए राहत भरी खबर है. अब स्थानीय ग्रामीण मात्र 50 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क देकर जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे. पहले इसके लिए 1950 रुपये खर्च करने पड़ते थे. पीटीआर प्रबंधन ने स्थानीय समुदाय को पर्यटन से जोड़ने और उन्हें राहत देने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. यह सुविधा फिलहाल केवल पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए लागू होगी.

इसके तहत स्थानीय इको विकास समिति द्वारा संचालित सफारी वाहनों से ग्रामीण जंगल का भ्रमण कर सकेंगे. वहीं, बाहरी पर्यटकों के लिए पहले से निर्धारित 1950 रुपये का शुल्क यथावत रहेगा. ग्रामीणों से मिलने वाली 50 रुपये की राशि वाहन के रखरखाव और साफ-सफाई पर खर्च की जाएगी.

नियमों के तहत होगा संचालित
डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जैना ने लोकल18 को बताया कि बेतला नेशनल पार्क स्थित किला नाका में पीटीआर प्रबंधन की ओर से हाल ही में स्थानीय ग्रामीणों के साथ बैठक आयोजित की गई. बैठक में वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन व्यवस्था और स्थानीय लोगों की भागीदारी को लेकर चर्चा की गई. प्रबंधन ने साफ किया कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब पर्यटन गतिविधियों को निर्धारित नियमों के तहत संचालित किया जाएगा.

बिना सफारी नहीं मिलेगी पलामू किला में एंट्री
उन्होंने कहा कि पलामू किला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण स्थल है. इसके इतिहास को संरक्षित करने के लिए पीटीआर प्रबंधन की ओर से दस्तावेजीकरण कराया गया है और एक पुस्तक भी प्रकाशित की गई है. किले के रेस्टोरेशन के लिए प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है. इसके बाद झारखंड सरकार की ओर से भी इस दिशा में गंभीरता से काम किया जा रहा है. पलामू किला टाइगर रिजर्व के क्षेत्र में आता है, इसलिए यहां वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों का पालन अनिवार्य है.

पहले पर्यटक सीधे किले तक पहुंच जाते थे, लेकिन अब पारंपरिक तरीके से प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. अब किला देखने के लिए जंगल सफारी वाहन से जाना अनिवार्य होगा. इस क्षेत्र में कैमरा ट्रैप में चीतल, हाथी, तेंदुआ और बाइसन समेत कई वन्यजीवों की मौजूदगी दर्ज की गई है. ऐसे में नियंत्रित पर्यटन से वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है.

सफारी शुल्क का बड़ा हिस्सा स्थानीय लोगों को
बैठक में बताया गया कि सामान्य पर्यटकों से लिए जाने वाले 1950 रुपये के सफारी शुल्क में से लगभग 1450 रुपये सीधे स्थानीय समुदाय को मिलते हैं. शेष 500 रुपये वाहन संचालन, रखरखाव, साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च किए जाते हैं. इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आजीविका का अवसर मिलता है. प्रबंधन का उद्देश्य पर्यटन के माध्यम से ग्रामीणों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना है.

प्लास्टिक फैलाने पर लगेगा 2000 रुपये जुर्माना
पीटीआर प्रबंधन ने पर्यटन स्थलों पर प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध के पालन पर भी जोर दिया. जंगल या पर्यटन स्थल पर प्लास्टिक अथवा अन्य कचरा फैलाते हुए पकड़े जाने पर 2000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. ग्रामीणों और पर्यटकों से स्वच्छता बनाए रखने तथा वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करने की अपील की गई. यह पहल स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने के साथ जिम्मेदार पर्यटन और जंगल संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है.

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Raina Shukla

Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…

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