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पलामू के हुसैनाबाद में सोहया पहाड़ स्थित दमदमी गांव के पास एक बंद माइंस के पानी भरे गहरे गड्ढे में डूबे पतरा खुर्द निवासी लवकुश कुमार गुप्ता (24) का शव लगभग 24 घंटे बाद गुरुवार को पानी की सतह पर उपलाता मिला। इस घटना ने जिले की आपदा प्रबंधन व्यवस्था और खदान क्षेत्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लवकुश बुधवार को माइंस के गहरे जलभराव वाले गड्ढे में डूब गया था। घटना के बाद पुलिस और ग्रामीणों ने घंटों तक उसकी तलाश की, जिसमें स्थानीय गोताखोरों को भी लगाया गया, लेकिन युवक का पता नहीं चल सका। बढ़ते दबाव के बीच प्रशासन ने पटना से एनडीआरएफ टीम को बुलाया था। हालांकि, टीम के पहुंचने से पहले ही युवक का शव पानी की सतह पर दिखाई दे गया। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए अनुमंडलीय अस्पताल भेज दिया। युवक का शव मिलने में देरी और बचाव कार्यों की कमी को लेकर ग्रामीणों और परिजनों में भारी नाराजगी देखी गई। लोगों ने सड़क जाम कर एनडीआरएफ बुलाने, खतरनाक जलभराव वाले गड्ढों की घेराबंदी करने और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि माइंस क्षेत्र में कई गहरे गड्ढे खुले पड़े हैं, जिनमें पानी भरा रहता है और वे लगातार हादसों का कारण बन रहे हैं। लवकुश की मौत के बाद झारखंड की आपदा प्रबंधन व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी डूबने जैसी घटनाओं से निपटने के लिए अब भी दूसरे राज्यों से विशेष टीम बुलानी पड़ती है, जिससे राहत और बचाव कार्य में देरी होती है। ग्रामीणों ने माइंस संचालकों और संबंधित विभागों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है, जिससे यह क्षेत्र लगातार हादसों का केंद्र बनता जा रहा है। ग्रामीणों ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा इंतजाम और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
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