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‘पहचानो, जड़ काटो और खत्म करो’: नशा कारोबारियों पर ‘कोई दया नहीं’,...


नई दिल्ली: देश में नशे के कारोबार के खिलाफ केंद्र सरकार अब निर्णायक लड़ाई के मूड में है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को साफ शब्दों में कहा कि ड्रग माफिया, तस्करों और उनके सरगनाओं को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने राज्यों से ‘पहचानो, जड़ काटो और पूरी तरह खत्म करो’ की रणनीति अपनाने का आह्वान करते हुए नशे के नेटवर्क पर बेरहम कार्रवाई करने के निर्देश दिए. नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि भारत को नशा मुक्त बनाने की लड़ाई अब आखिरी दौर में पहुंच चुकी है. उन्होंने कहा कि अगले तीन साल इस अभियान के लिए बेहद अहम होंगे और इसी दौरान ड्रग सिंडिकेट्स की कमर तोड़नी होगी.

शाह ने कहा, “आज हमारा देश नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में ऐसे नाजुक मोड़ पर खड़ा है कि अगले तीन साल यह तय करेंगे कि लत हम पर हावी होती है या हम लत पर काबू पाते हैं. अगले 100 वर्षों में देश के भविष्य के लिए, हमें अटूट संकल्प के साथ मिलकर इसका मुकाबला करना होगा. इसके लिए सभी सरकारों को एक मंच पर आना होगा. हमें इसमें जनता का मार्गदर्शन करने वाले संतों, भविष्य को आकार देने वाले युवाओं और मातृत्व की शक्ति को भी शामिल करना होगा.”

राज्यों के बीच बेहतर तालमेल का आह्वान करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, “ड्रग्स की तस्करी को पूरी तरह खत्म करने के लिए सभी राज्यों का एक समन्वित दृष्टिकोण होना चाहिए.” उन्होंने ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ सख्त रुख अपनाने और साथ ही पीड़ितों के पुनर्वास को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया. शाह ने कहा, “ड्रग्स के कारोबार में शामिल लोग सबसे बड़ी बाधा हैं. हमारी प्रतिक्रिया एक रोडमैप-आधारित दृष्टिकोण होनी चाहिए. हमें कठोर रवैये के साथ आगे बढ़ना होगा. हमें ड्रग्स की तस्करी में शामिल लोगों के प्रति कठोर रुख अपनाना होगा, जबकि पीड़ितों के प्रति नरम रुख दिखाना होगा.”

गृह मंत्री ने कहा कि चालू वर्ष के लिए सरकार की रणनीति स्पष्ट रूप से परिभाषित थी और अगले चरण की कार्रवाई तैयार करने से पहले अगले वर्ष इसकी समीक्षा की जाएगी. उन्होंने कहा, “किसी भी स्तर पर कोई भ्रम नहीं है. अगले वर्ष, हम ड्रग्स के खिलाफ अपनी लड़ाई की समीक्षा करेंगे और आगे के कदमों के लिए फिर से योजना बनाएंगे. इस वर्ष का रोडमैप स्पष्ट है.”

शाह ने इस बात पर भी जोर दिया कि NCORD बैठकें केवल संख्या बढ़ाने के बजाय परिणाम-उन्मुख होनी चाहिए. उन्होंने कहा, “मैं सभी मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों से आग्रह करता हूं कि वे NCORD बैठकों को परिणाम-उन्मुख बनाने की दिशा में आगे बढ़ें. बैठकों की संख्या निश्चित रूप से बढ़ रही है, लेकिन यह भी आवश्यक है कि वे परिणाम-उन्मुख हों. क्या बैठकों में लिए गए निर्णयों का प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन हो रहा है? क्या अगली बैठक में उन निर्णयों की समीक्षा की जाती है? क्या उनका कठोर और गंभीर विश्लेषण किया जाता है? बैठकों को परिणाम-उन्मुख बनाने की दिशा में राज्य स्तर पर किए गए प्रयास ही हमें सफलता दिला सकते हैं.”

पिछले वर्ष के दौरान समन्वय के स्तर का जिक्र करते हुए शाह ने कहा, “पिछले वर्ष ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में 15,876 बैठकें की गईं. हमें इसे आगे बढ़ाना होगा. बैठकें संतोषजनक हैं, लेकिन हमें यह समीक्षा करनी होगी कि क्या ये बैठकें उद्देश्य-उन्मुख हैं.” कार्रवाई की प्राथमिकताओं पर ज़ोर देते हुए, शाह ने कहा कि अधिकारियों को डार्क वेब की निगरानी बढ़ानी चाहिए, सिंथेटिक ड्रग बनाने वाली यूनिट्स को बंद करना चाहिए और तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना चाहिए.

शाह ने आगे कहा, “डार्क वेब की निगरानी, ​​ड्रग्स का प्रसार और सिंथेटिक ड्रग्स के लिए बनी लैब हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए… हमें तस्करों के नेटवर्क को तोड़ना होगा. हमें उस नेटवर्क को खत्म करना होगा. मुख्य सरगना (किंगपिन) को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए. ‘पता लगाना, रोकना और खत्म करना’ (Detect, Deduct and Destroy) – इन तीन लक्ष्यों के हिसाब से तैयारी करनी चाहिए.”

राज्यों से जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने का आग्रह करते हुए शाह ने कहा, “हमें हर हाल में रियल-टाइम जानकारी साझा करना सुनिश्चित करना होगा. इसके लिए NCB ने कई पोर्टल बनाए हैं. मैं सभी मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों से आग्रह करता हूं कि वे अपने-अपने राज्यों में अपराधों का विवरण तय समय के भीतर इन पोर्टल्स पर अपलोड करें. इससे भारत सरकार इन मामलों की समीक्षा कर सकेगी और आपको ज़रूरी फीडबैक और सुझाव दे सकेगी.”

अमित शाह ने कहा, “2004 से 2014 के दस वर्षों में 26 लाख किलोग्राम सिंथेटिक ड्रग्स ज़ब्त किए गए थे. इसके विपरीत, 2014 से 2026 के बीच हमने 118 लाख किलोग्राम सिंथेटिक ड्रग्स ज़ब्त किए हैं. इससे पता चलता है कि हमारा अभियान सफलता की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है. 2004 से 2014 के दौरान ज़ब्त किए गए ड्रग्स की कीमत लगभग 40,000 करोड़ रुपये थी, जबकि 2014 से 2026 के बीच ज़ब्त किए गए ड्रग्स की कीमत लगभग 1,84,000 करोड़ रुपये है. यह हमारी कार्रवाई की प्रभावशीलता और दायरे में हुई ज़बरदस्त बढ़ोतरी को दर्शाता है.”

26 जून को ‘नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जो संयुक्त राष्ट्र का एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस है. इस दिन का उद्देश्य नशीली दवाओं के इस्तेमाल के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाना और नशीली दवाओं के दुरुपयोग तथा अवैध व्यापार के खिलाफ लड़ना है. यह दिन 1839 में चीन में पहले अफ़ीम युद्ध से ठीक पहले, 25 जून को गुआंग्डोंग के हुमेन में लिन ज़ेक्सू (चीनी राजनीतिक दार्शनिक और राजनेता) द्वारा अफ़ीम के व्यापार को खत्म करने की घटना की याद में 1989 से मनाया जा रहा है.



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