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Betla Jungle Safari: मानसून में पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला नेशनल पार्क में जंगल सफारी हर साल तीन महीने के लिए बंद कर दी जाती है. फिलहाल सुबह और शाम ओपन सफारी जारी है, अगर घूमने का प्लान है तो अभी हो आएं. यहां पर्यटकों के लिए ठहरने की भी अच्छी सुविधा है.
पलामू. मानसून का सीजन शुरू हो चुका है और इसके साथ ही पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला नेशनल पार्क में जंगल सफारी के सीमित दिनों की उल्टी गिनती भी शुरू हो गई है. हर वर्ष की तरह इस बार भी मानसून के दौरान सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए बेतला में जंगल सफारी तीन महीने के लिए बंद कर दी जाएगी. ऐसे में अगर आप पलामू टाइगर रिजर्व की प्राकृतिक खूबसूरती और वन्यजीवों का रोमांच करीब से देखना चाहते हैं, तो अभी आपके पास सुनहरा अवसर है.
हर साल मानसून में तीन महीने के लिए बंद होती है सफारी
भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार देश के अधिकांश टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यानों में मानसून के दौरान जंगल सफारी पर अस्थायी रोक लगाई जाती है. इसी नियम के तहत पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला नेशनल पार्क में भी हर वर्ष लगभग तीन महीने तक सफारी बंद रहती है. पिछले वर्ष भी एक जुलाई से सफारी पर रोक लगाई गई थी और बारिश का मौसम खत्म होने के बाद इसे फिर से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया था. हर साल लगभग इसी समय से पार्क बंद होता है.
अभी सुबह और शाम दोनों समय मिल रहा सफारी का आनंद
फॉरेस्ट स्टाफ निरंजन कुमार के अनुसार, फिलहाल बेतला नेशनल पार्क में जंगल सफारी सामान्य रूप से संचालित हो रही है. पर्यटक सुबह 6 बजे से 10 बजे तक और दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक ओपन सफारी का आनंद ले सकते हैं. उन्होंने बताया कि पार्क अभी बंद नहीं हुआ है, इसलिए अगले कुछ दिनों तक पर्यटक यहां आकर जंगल की खूबसूरती और वन्यजीवों का दीदार कर सकते हैं.
बाघ से लेकर गौर तक, वन्यजीवों का मिलता है रोमांचक दीदार
बेतला नेशनल पार्क अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. यहां पर्यटकों को बाघ, तेंदुआ, बाइसन, गौर, चीतल, सांभर, हिरण, भालू सहित कई वन्यजीव प्राकृतिक वातावरण में देखने का अवसर मिलता है. घने जंगल, हरियाली और वन्यजीवों की गतिविधियां जंगल सफारी को रोमांचक अनुभव बना देती हैं. बारिश से पहले का मौसम वन भ्रमण के लिए भी काफी अनुकूल माना जाता है.
रुकने की बेहतरीन सुविधा भी उपलब्ध
उन्होंने कहा कि बेतला आने वाले पर्यटकों के लिए वन विभाग ने आधुनिक सुविधाओं की भी व्यवस्था की है. यहां कॉटेज, ट्री हाउस और पूर्णतः वातानुकूलित कमरे उपलब्ध हैं. इसके अलावा कैंटीन और स्मृति-चिह्न (सुवेनियर) शॉप भी पर्यटकों के लिए संचालित हैं. ओपन सफारी के दौरान पर्यटक जंगल के प्राकृतिक वातावरण और मौसम को करीब से महसूस कर सकते हैं. वहीं, रात में ठहरने वाले पर्यटकों को जंगल की शांत फिजा के बीच वन्यजीवों की हलचल और प्रकृति की अनूठी अनुभूति भी देखने को मिलती है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें