रांचीः अगर आपके इरादे मजबूत हों, तो गरीबी और लाचारी भी आपका रास्ता नहीं रोक सकती. यह कहानी है झारखंड के तेज तर्रार आईएएस अधिकारी रमेश घोलप की. महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने सफलता का एक बड़ा मुकाम हासिल किया है.
बचपन में पोलियो अटैक
रमेश घोलप का जन्म 30 अप्रैल 1988 को महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के महागांव में हुआ था. बचपन में ही उनके बाएं पैर में पोलियो हो गया था. परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी. उनके पिता गोरख घोलप एक छोटी सी साइकिल रिपेयरिंग की दुकान चलाते थे. लेकिन शराब की लत के कारण पिता की तबीयत खराब रहने लगी. अंत में दुकान बंद करनी पड़ी.
इसके बाद परिवार चलाने के लिए उनकी मां विमल घोलप पास के गांवों में चूड़ियां बेचने लगीं. रमेश भी अपने पोलियोग्रस्त पैर के बावजूद सड़कों पर मां के साथ घूम-घूमकर चूड़ियां बेचते थे. ऐसे दिन भी आए जब मां को मजदूरी करनी पड़ी.
पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के नहीं थे पैसे
रमेश पढ़ाई में बहुत तेज थे. वह स्कूल में हमेशा पहले स्थान पर आते थे. साल 2005 में उनके जीवन में एक बड़ा दुखद मोड़ आया. जब वह 12वीं में थे, तब उनके पिता का निधन हो गया.
पिता के अंतिम संस्कार में जाने के लिए रमेश की जेब में बस का किराया तक नहीं था. उनके पास 2 रुपये भी नहीं थे. अंत में पड़ोसियों की मदद से वह घर पहुंच सके. इस घटना ने रमेश को अंदर तक हिला दिया। उन्होंने समझ लिया कि गरीबी से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता शिक्षा ही है.
पहले बने शिक्षक फिर क्रैक किया UPSC
12वीं के बाद रमेश ने डी.एड. (D.Ed.) किया और शिक्षक बन गए. इससे घर का खर्च चलने लगा. इसके साथ ही उन्होंने यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी (YCMOU) से इतिहास में बीए की डिग्री हासिल की.
कॉलेज के दिनों में उनकी मुलाकात एक तहसीलदार से हुई. उनसे प्रेरित होकर रमेश ने आईएएस बनने का सपना देखा. उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और पुणे जाकर यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी.
उधार के पैसों से की तैयारी
साल 2010 में रमेश ने पहली बार सिविल सेवा परीक्षा दी, लेकिन असफलता मिली. इसके बाद उनकी मां ने गांव के लोगों से पैसे उधार लिए, ताकि रमेश अपनी पढ़ाई जारी रख सकें.
रमेश ने बिना किसी बड़ी कोचिंग के रोज 12 से 14 घंटे पढ़ाई की. उनकी मां हमेशा उनसे कहती थीं कि पढ़ाई ही उनका सबसे बड़ा हथियार है.
2012 में पूरा हुआ आईएएस बनने का सपना
रमेश की कड़ी मेहनत रंग लाई. साल 2012 में उन्होंने ऑल इंडिया 287वीं रैंक के साथ यूपीएससी परीक्षा पास कर ली. दिव्यांग कोटे से उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में हो गया.
वर्तमान में निभा रहे हैं बड़ी जिम्मेदारियां
झारखंड कैडर के 2012 बैच के आईएएस अधिकारी रमेश घोलप अंग्रेजी, मराठी और हिंदी भाषा के जानकार हैं. वह चतरा के उपायुक्त (DC), पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में विशेष सचिव और ऊर्जा विभाग में संयुक्त सचिव जैसे प्रमुख पदों पर काम कर चुके हैं.
वर्तमान में वह 11 फरवरी 2026 से झारखंड के नागरिक सुरक्षा विभाग में आयुक्त के पद पर तैनात हैं. रमेश घोलप का जीवन आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है.