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नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम करने जा रहे हैं. लेकिन इस पड़ाव से एक दिलचस्प तुलना भी सामने आती है. जवाहरलाल नेहरू और नरेंद्र मोदी दोनों पीएम की कुर्सी तक पहुंचे, मगर उनके रास्ते बिल्कुल अलग थे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जवाहर लाल नेहरू.
मंजरी जोशी
10 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे. इस मौके पर यह देखना भी दिलचस्प है कि मोदी और जवाहरलाल नेहरू दोनों देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे जरूर, लेकिन वहां तक पहुंचने के उनके रास्ते पूरी तरह अलग थे.
जब जवाहरलाल नेहरू 1947 में देश के पहले प्रधानमंत्री बने, तब वे स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे बड़े नेताओं में से एक थे. उन्हें कांग्रेस संगठन का पूरा समर्थन हासिल था. महात्मा गांधी का भरोसा भी उनके साथ था और आजादी की लड़ाई से कांग्रेस को देशभर में जबरदस्त सम्मान मिला हुआ था.
उस समय भारत की राजनीति आज जैसी नहीं थी. कांग्रेस का पूरे देश में दबदबा था और विपक्षी दल बहुत कमजोर तथा बिखरे हुए थे. आजादी की खुशी और कांग्रेस के योगदान के कारण जनता का बड़ा वर्ग पार्टी के साथ खड़ा था. नेहरू के सामने नई आजाद हुई देश की संस्थाओं को खड़ा करने की बड़ी चुनौती थी, लेकिन प्रधानमंत्री बनने के रास्ते में उन्हें बहुत ज्यादा राजनीतिक मुकाबले का सामना नहीं करना पड़ा.
चुनावी संघर्ष से निकले मोदी
नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर बिल्कुल अलग दौर में शुरू हुआ. प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने संगठन में लंबे समय तक काम किया, जमीनी राजनीति की, चुनाव लड़े और प्रशासनिक अनुभव हासिल किया. जिस दौर में मोदी उभरे, उस समय भारतीय राजनीति गठबंधन सरकारों, क्षेत्रीय दलों, वैचारिक टकराव और कड़े चुनावी मुकाबलों से भरी हुई थी. राष्ट्रीय राजनीति में किसी एक पार्टी का वैसा दबदबा नहीं था जैसा आजादी के बाद कांग्रेस का हुआ करता था.
बीसवीं सदी के आखिरी वर्षों और इक्कीसवीं सदी के शुरुआती दौर में देश की राजनीति खंडित जनादेश, गठबंधन की मजबूरियों, भ्रष्टाचार के आरोपों और अलग-अलग राजनीतिक विचारों से प्रभावित रही. ऐसे माहौल में राष्ट्रीय नेतृत्व हासिल करने के लिए लगातार चुनाव जीतना और जनता का समर्थन बढ़ाना जरूरी था. पार्टी कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बनने तक मोदी का सफर लगातार चुनावी सफलताओं और जनसमर्थन पर आधारित रहा.
भारत की राजनीति के दो अलग दौर
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