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राज्य के विभिन्न विभागों के पीएल (पर्सनल लेजर) खातों में 18,902 करोड़ रुपए जमा पड़ी है। 4 वर्षों से अधिक समय से पड़ी इसराशि को लेकर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इसे राजकोष में जमा करने का निर्देश दिया है । कहा है कि यदि संबंधित विभाग राशि वापस नहीं करते हैं तो वित्त विभाग उसे स्वतः प्रत्यर्पित मानकर कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एक ओर मंईयां सम्मान योजना समेत विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने का प्रयास कर रही है, जबकि दूसरी ओर हजारों करोड़ रुपये पीएल खातों में निष्क्रिय पड़े रहना वित्तीय प्रबंधन के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। वित्त मंत्री ने बताया कि 31 मई 2026 तक नगर विकास विभाग के पीएल खाते में 2,876 करोड़ , ऊर्जा विभाग के 3,943 करोड़ , उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के 1,957 करोड़ , कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के 1,922 करोड़ तथा भवन निर्माण विभाग के 1,776 करोड़ रुपए जमा पड़े हैं। इसके अलावा डेढ़ दर्जन से अधिक विभागों के खातों में कुल मिलाकर 18,902 करोड़ जमा हैं। कई विभागों में यह राशि कब से खातों में रखी गई है, इसका पूरा ब्योरा विभागों के पास उपलब्ध नहीं है। उन्होंने वित्त सचिव को निर्देश दिया है कि चालू वित्तीय वर्ष समेत पिछले तीन वर्षों तक की राशि को केवल विशेष परिस्थितियों में ही री-वैलिडेशन करें। इसके अलावा चार वर्ष से अधिक समय से पीएल खातों में पड़ी राशि को राजकोष में जमा कराने के लिए सभी विभागीय सचिवों को फरमान भेजें। “पीएल खाते में सरकारी धन रखना वित्तीय अनुशासन के खिलाफ” वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी धनराशि को पीएल खातों में लंबे समय तक रखना निर्धारित मानकों और स्वस्थ वित्तीय प्रबंधन के विपरीत है। यह वित्तीय अनुशासनहीनता का भी संकेत है। कहा कि बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए एफआरबीएम एक्ट के तहत राज्य के ऋण लेने की सीमा हर वर्ष निर्धारित होती है। पीएल खातों में बड़ी राशि के संधारण का असर एफआरबीएम की सीमा पर भी पड़ता है। ऐसे में वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए इन खातों की समीक्षा जरूरी है।
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