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कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार एक बड़े विवाद में घिर गई है. साल 2022 में कलबुर्गी के अलंद में हुए ‘लाडले मशक दरगाह’ दंगों से जुड़े 7 गंभीर आपराधिक मामलों को सरकार ने वापस ले लिया है. इन मामलों में पुलिस पर जानलेवा हमला, हत्या का प्रयास और दंगा भड़काने जैसे संगीन आरोप शामिल थे. स्पीकर यूटी खादर की सिफारिश पर लिए गए इस फैसले से 100 से अधिक आरोपियों को राहत मिलेगी. इस कदम के बाद बीजेपी आक्रामक हो गई है और कांग्रेस सरकार पर अपराधियों और दंगाइयों को बचाने का गंभीर आरोप लगाया है.
पुलिस पर तलवार चलाने वालों के केस वापस लिए सिद्धारमैया सरकार.
बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिस पर भारी सियासी घमासान मच गया है. सरकार ने साल 2022 में अलंद कस्बे के ‘लाडले मशक दरगाह’ में हुए भीषण दंगों से जुड़े 7 गंभीर आपराधिक मामलों को वापस लेने का आदेश दिया है. इस फैसले से दंगा भड़काने और पुलिस पर जानलेवा हमला करने के 100 से अधिक आरोपियों के खिलाफ दर्ज केस खत्म हो जाएंगे.
यह विवाद मार्च 2022 का है. कैबिनेट के गोपनीय दस्तावेजों के मुताबिक, अलंद कस्बे में तनाव के दौरान बंदोबस्त में लगे पुलिस अधिकारियों पर हथियारों से लैस उग्र भीड़ ने हमला कर दिया था. भीड़ के हाथों में लोहे की रॉड, तलवारें और लाठियां थीं, और वे धार्मिक नारे लगाते हुए पुलिस की तरफ बढ़े थे. इस जानलेवा हमले (Attempt to murder) में एक डीएसपी (DSP) और एक कांस्टेबल गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इसी मामले में मुख्य आरोपियों में से एक आकिब अंसारी पर हिंसा के दौरान पुलिस को धमकाने का भी आरोप है.
स्पीकर यू.टी. खादर की सिफारिश पर एक्शन
आश्चर्यजनक रूप से, इन संगीन मामलों को वापस लेने की सिफारिश कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर यू.टी. खादर (U.T. Khader) द्वारा की गई थी. इन मामलों में दंगा करने (Rioting), हत्या का प्रयास और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर धाराएं लगी हुई थीं. आलोचकों का आरोप है कि राज्य सरकार ने बिना किसी शोर-शराबे के इन दंगा मामलों को ‘विरोध-प्रदर्शन’ से जुड़े सामान्य मामलों के साथ क्लब कर दिया, ताकि किसी का ध्यान इस पर न जाए.
बीजेपी का सरकार पर तीखा हमला
इस फैसले के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सिद्धारमैया सरकार पर चौतरफा हमला बोल दिया है. बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस सरकार अपराधियों और दंगाइयों का बचाव कर रही है. बीजेपी का कहना है कि सरकार तुष्टिकरण की राजनीति के तहत पुलिस का मनोबल गिरा रही है और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ कर रही है. वहीं दूसरी ओर, राज्य के गृह मंत्री ने इस फैसले का बचाव करते हुए इसे एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया बताया है.
कर्नाटक सरकार ने हाल ही में कौन से विवादित आपराधिक मामले वापस लिए हैं?
कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने साल 2022 में कलबुर्गी जिले के अलंद कस्बे में हुए ‘लाडले मशक दरगाह’ दंगों से जुड़े 7 गंभीर आपराधिक मामलों को वापस ले लिया है.
अलंद दंगे में आरोपियों पर किस तरह के आरोप लगे थे?
कैबिनेट दस्तावेजों के अनुसार, आरोपियों पर तलवारों और रॉड से लैस होकर ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों पर जानलेवा हमला करने, हत्या का प्रयास करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप थे.
इन दंगा मामलों को वापस लेने की सिफारिश किसने की थी?
इन मामलों को वापस लेने की सिफारिश कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर यू.टी. खादर (U.T. Khader) द्वारा की गई थी.
इस फैसले पर बीजेपी की क्या प्रतिक्रिया रही है?
बीजेपी ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कांग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने और अपराधियों व दंगाइयों का समर्थन कर पुलिस का मनोबल गिराने का आरोप लगाया है.
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