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india prepares to send oil tankers through strait of hormuz for new oil lpg supplies: ईरान अमेरिका जंग से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है. इस कारण दुनिया के तमाम देशों में तेल के दाम बढ़ गए हैं. इस बीच भारत ने अपनी रणनीति बदल दी है. शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के टैंकर सरकार और नौसेना की अंतिम मंजूरी के बाद होर्मुज को चीरकर मध्य पूर्व के देश तक जाने को तैयार हैं.
भारत ने होर्मुज में अपने शिप को भेजने की तैयारी कर ली है.
India Prepares To Send Tankers Through Hormuz: ईरान-अमेरिका के बीच जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण भारत सहित पूरी दुनिया में तेल का संकट पैदा हो गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम काफी बढ़ गया है. इसका असर तमाम देशों के घरेलू बाजारों पर भी पड़ा है. खुद अमेरिका में पेट्रोल-डीजल के दाम में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है. इस बीच भारत में भी पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ाने पड़े हैं. इस संकट का एलपीजी की सप्लाई पर भी असर पड़ा है. लेकिन, भारत अब कुछ बड़ा करने जा रहा है. दरअसल, भारत ने तय किया है कि वह अपने तेल टैंकर होर्मुज का सीना चीरकर उसके आर-पार भेजेगा. वह अमेरिका और ईरान की धमकियों को दरकिनार कर ऐसा करने जा रहा है. क्योंकि एक तरफ अमेरिका और दूसरी तरफ ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं.
मध्य पूर्व के सप्लायर देशों से तेल लाएंगे ये टैंकर
ये टैंकर मध्य पूर्व के तेल सप्लायर देशों से तेल लेने जाएंगे. इस पूरे मामले से जुड़े लोगों के हवाले से ब्लूमबर्ग ने लिखा है कि ईरान-अमेरिका- इजरायल जंग भड़कने के बाद से ऐसा पहली बार होने जा रहा है. इसको लेकर पूरी योजना तैयार कर ली गई है और जैसे ही सरकार की ओर से अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो भारतीय जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की ओर बढ़ने लगेंगे. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शीर्ष स्तर पर इसको लेकर गंभीर चर्चा हुई है. हालांकि अभी जहाजों की टाइमिंग और उनकी संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.
सरकार ने मंजूरी दी या नहीं… यह स्पष्ट नहीं
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भारत के इस योजना को अमेरिका और ईरान में किसी एक या फिर दोनों ने मंजूरी दी है या नहीं. क्योंकि ये दोनों देश इस वक्त स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आमने सामने हैं. माना जा रहा है कि उनकी मंजूरी के बिना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जाना खतरनाक हो सकता है.
इस बीच बीते दिनों नई दिल्ली आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ मीटिंग की थी. भारत अपने पारंपरिक मध्य पूर्व के देशों से तेल आयात जारी रखना चाहता है. क्योंकि वैकल्पिक स्रोतों से तेल मंगाने में समय लगता है और दूरी अधिक होने के कारण वह आयात महंगा भी पड़ता है.
उधर, भारतीय नौसेना ने इस इलाके में अपने युद्धपोतों की संख्या डबल कर दी है. ताकि वह इलाके की स्थिति पर पैनी नजर रख सके. ये युद्ध पोत भारतीय झंडे के साथ चल रहे टैंकरों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं. हालांकि इस पूरी योजना के बारे में भारत के पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय और भारतीय नौसेना ने कोई टिप्पणी नहीं की है.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें