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प्रधानमंत्री सिर्फ यूपी-बिहार से क्यों, तमिलनाडु से भी बने कोई PM? विजय...


तमिलनाडु में परिसीमन का मुद्दा अब सिर्फ लोकसभा सीटों की संख्या तक सीमित नहीं रह गया है. विधानसभा में इस मुद्दे पर हुई बहस के दौरान सत्ताधारी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के नेता और लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुन ने देश की राजनीतिक सत्ता के संतुलन पर ही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पद किसी एक क्षेत्र या कुछ उत्तरी राज्यों की जागीर नहीं हो सकता. भविष्य में दक्षिण, खासकर तमिलनाडु से भी प्रधानमंत्री चुना जाना चाहिए.

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की ओर से पेश किए गए परिसीमन-विरोधी प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अर्जुन ने कहा कि भारत की राजनीति में जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व बढ़ाने की कोशिश दक्षिणी राज्यों के लिए चिंता का विषय है. उनके मुताबिक, जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण, अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें इसका राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना चाहिए.

‘सिर्फ 5-6 उत्तरी राज्यों से PM चुन लिया जाता है’

अर्जुन ने अपने भाषण में सीधे प्रधानमंत्री पद के चुनाव की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि आज भी ऐसी स्थिति है कि पांच या छह उत्तरी राज्यों के एक साथ आने पर प्रधानमंत्री चुना जा सकता है. उनके मुताबिक, इस व्यवस्था में बदलाव जरूरी है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक सत्ता केवल उत्तर प्रदेश, बिहार या गुजरात तक सीमित नहीं होनी चाहिए. तमिलनाडु विधानसभा में जिस तरह राज्य की आवाज उठती है, उसी तरह संसद में भी दक्षिण की आवाज प्रधानमंत्री के रूप में सुनाई देनी चाहिए.

अर्जुन ने दावा किया कि तमिलनाडु आर्थिक प्रदर्शन के मामले में देश के प्रमुख राज्यों में है, इसके बावजूद संसद में बनने वाले कई कानूनों को लेकर राज्य की चिंताएं सामने आती रही हैं. उन्होंने इसे मौजूदा राजनीतिक प्रतिनिधित्व की संरचना से जोड़ते हुए कहा कि जनसंख्या को राजनीतिक ताकत का मुख्य आधार बनाने से दक्षिणी राज्यों के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है.

‘उत्तर आगे बढ़ा, दक्षिण पिछड़ गया’

अपने भाषण में अर्जुन ने द्रविड़ आंदोलन के इतिहास का भी जिक्र किया. उन्होंने पेरियार ईवी रामासामी और सीएन अन्नादुरई के विचारों को सामने रखते हुए कहा कि भारत की मजबूती राज्यों की स्वायत्तता और उनके विकास से जुड़ी है. उन्होंने अन्नादुरई के उस विचार का हवाला दिया कि राज्यों की प्रगति को नजरअंदाज करके देश की प्रगति संभव नहीं है. अर्जुन ने कहा कि परिसीमन का सवाल सिर्फ सीटों की संख्या का नहीं, बल्कि राज्यों की राजनीतिक ताकत और स्वायत्तता का भी सवाल है.

टीवीके नेता ने आरोप लगाया कि दशकों पहले उठाया गया उत्तर-दक्षिण असंतुलन का मुद्दा आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. उनके मुताबिक, परिसीमन के जरिए अगर जनसंख्या के आधार पर सीटों का बड़ा बदलाव होता है तो दक्षिणी राज्यों को भविष्य में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के स्तर पर नुकसान हो सकता है.

NEET, GST और CAA का भी उठाया मुद्दा

अर्जुन ने तमिलनाडु के राजनीतिक हितों से जुड़े कई मुद्दों का जिक्र करते हुए NEET, GST और CAA का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने दावा किया कि राज्य के सांसदों ने इन मुद्दों पर संसद में तमिलनाडु की चिंताओं को मजबूती से उठाया, लेकिन इसके बावजूद पिछले वर्षों में ऐसे फैसले हुए जिन्हें राज्य सरकार और राजनीतिक दल तमिलनाडु के हितों के खिलाफ मानते हैं.

उन्होंने कहा कि अगर संसद में किसी राज्य की राजनीतिक ताकत उसकी जनसंख्या के आधार पर लगातार घटती जाती है तो उसके लिए राष्ट्रीय नीतियों पर प्रभाव डालना मुश्किल हो सकता है. अर्जुन ने इसे संविधान में निहित समानता और संघीय ढांचे से जोड़ते हुए सवाल उठाया.

अमेरिकी गृहयुद्ध से की तुलना

अर्जुन ने अपने भाषण में अमेरिका के गृहयुद्ध का भी उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि अब्राहम लिंकन के समय अमेरिका को उत्तर और दक्षिण के बीच संघर्ष का सामना करना पड़ा था. इसी तरह भारत में भी उत्तर और दक्षिण के बीच राजनीतिक और आर्थिक मतभेद बढ़ने की स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

हालांकि उन्होंने इस तुलना को भारत की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में रखा और संविधान के अनुच्छेद 14 में समानता के सिद्धांत का जिक्र किया. उनका कहना था कि राजनीतिक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें देश के सभी क्षेत्रों को समान महत्व और प्रतिनिधित्व मिले.

अन्नादुरई से लेकर करुणानिधि तक का जिक्र

अर्जुन ने तमिलनाडु की राजनीतिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि राज्यों की स्वायत्तता का मुद्दा केवल किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं रहा है. उन्होंने डीएमके नेता सीएन अन्नादुरई और एम. करुणानिधि के साथ-साथ एआईएडीएमके संस्थापक एमजी रामचंद्रन और पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के योगदान का भी जिक्र किया.

उनका कहना था कि राज्य के अधिकारों और संघीय ढांचे की रक्षा को लेकर अलग-अलग दौर में तमिलनाडु के कई बड़े नेताओं ने आवाज उठाई है. टीवीके भी इसी राजनीतिक विरासत और अन्नादुरई के सिद्धांतों का अनुसरण करने का दावा करती है.

परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पारित

दरअसल, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की ओर से बुधवार को विधानसभा में परिसीमन को लेकर प्रस्ताव पेश किया गया था. करीब दो घंटे तक चली चर्चा के बाद सदन ने इसे पारित कर दिया. प्रस्ताव में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि लोकसभा में कुल सीटों की संख्या 543 पर स्थायी रूप से तय रखी जाए. साथ ही 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग भी की गई है.



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