फरीदाबाद: फरीदाबाद में अब घायल, बीमार और बेसहारा पशुओं को समय पर इलाज और सुरक्षित आश्रय मिलने की सुविधा उपलब्ध है. इससे न केवल बेजुबान जानवरों की जान बच रही है बल्कि आम लोगों को भी राहत मिल रही है. सड़क पर घायल पशुओं की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के साथ-साथ यह पहल आसपास के गांवों की महिलाओं और दिव्यांग बच्चों को रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर भी दे रही है.
साल 2021 में हुई थी देवाश्रय गौशाला की स्थापना
Local18 से बातचीत में फरीदाबाद सर्वोदय हॉस्पिटल की मैनेजिंग डायरेक्टर अंशु गुप्ता बताती हैं कि यह देवाश्रय गौशाला वर्ष 2021 में शुरू की गई थी. इसका उद्घाटन केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने किया था. अंशु गुप्ता बताती हैं उनकी सहायता से ही इस परियोजना की शुरुआत हुई. आज यहां करीब 80 लोग काम कर रहे हैं.
गांव की महिलाओं को मिला रोजगार
अंशु गुप्ता बताती हैं आसपास के गांवों की महिलाओं को रोजगार दिया गया है जिससे वे अपनी आजीविका चला रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं.
अंशु गुप्ता बताती हैं कई ऐसी घटनाएं देखने को मिलीं जहां किसी गाय के बछड़े पर वाहन चढ़ गया या कोई पशु गंभीर रूप से घायल हालत में सड़क किनारे पड़ा था. ऐसी स्थिति में लोगों के पास कोई व्यवस्था नहीं होती थी कि वे किसे फोन करें और पशु को मदद कैसे मिले. अंशु गुप्ता बताती हैं तभी उन्हें महसूस हुआ कि ऐसी व्यवस्था की बहुत जरूरत है और इसी सोच के साथ देवाश्रय एनिमल हॉस्पिटल की शुरुआत की गई.
देवाश्रय एनिमल हॉस्पिटल में हैं ढेरों सुविधाएं
अंशु गुप्ता बताती हैं अस्पताल में 24 घंटे रेस्क्यू टीम, कॉल सेंटर, एम्बुलेंस और डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं. कहीं से भी घायल या बीमार पशु की सूचना मिलने पर टीम तुरंत मौके पर पहुंचती है और पशु को अस्पताल लाकर उसका इलाज करती है. अंशु गुप्ता बताती हैं यहां ओपीडी से लेकर सर्जरी और पुनर्वास तक की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं.
अंशु गुप्ता बताती हैं मेरा उद्देश्य शहर में ऐसी व्यवस्था बनाना है जहां हर घायल और बीमार पशु को समय पर और उचित उपचार मिल सके. अंशु गुप्ता बताती हैं आने वाले समय में मैं पशुओं के लिए एक बड़े तपोवन जैसी व्यवस्था विकसित करना चाहती हैं जहां उन्हें सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिल सके.
अंशु गुप्ता बताती हैं इस समय गौशाला में करीब 350 गायों की देखभाल की जा रही है. इसके अलावा यहां कुत्ते, बंदर और अन्य कई बेजुबान पशु भी हैं. अंशु गुप्ता बताती हैं कुल मिलाकर लगभग 400 पशु यहां आश्रय और उपचार प्राप्त कर रहे हैं.
अंशु गुप्ता बताती हैं मेरी सोच सिर्फ पशुओं की सेवा तक सीमित नहीं है. मैंने यहां एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जिसमें पशुओं की देखभाल के साथ-साथ आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. रेस्क्यू किए गए पशुओं को आश्रय, चारा और पानी उपलब्ध कराया जाता है वहीं गाय के गोबर से कई तरह के उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं.
गौशाला में दिव्यांग बच्चों को प्रशिक्षण
अंशु गुप्ता बताती हैं गौशाला में दिव्यांग बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और भविष्य में अपना काम शुरू कर सकें. अंशु गुप्ता बताती हैं आसपास के गांवों की महिलाओं को भी प्रशिक्षण दिया जाता है. ये महिलाएं गोबर से बने उत्पाद तैयार करती हैं और इसके बदले उन्हें रोजगार भी दिया गया है.
अंशु गुप्ता बताती हैं मेरा प्रयास एक ऐसी इकोनॉमी तैयार करना है जो पशुओं के संरक्षण और रोजगार दोनों को साथ लेकर चले. अंशु गुप्ता बताती हैं गौशाला में एकत्र होने वाले गोबर से जैविक खाद, गोबर की लकड़ी और अन्य कई उत्पाद बनाए जाते हैं. इसके अलावा इको-फ्रेंडली पेंट भी तैयार किया जा रहा है. इससे होने वाली आय को पशुओं की देखभाल और उपचार पर खर्च किया जाता है.
3 एकड़ में फैली है गौशाला
अंशु गुप्ता बताती हैं यह गौशाला करीब तीन एकड़ जमीन में फैली हुई है. अंशु गुप्ता बताती हैं यहां एक तरफ अत्याधुनिक पशु अस्पताल है जबकि दूसरी तरफ हेल्दी विंग और गोबर आधारित उत्पाद तैयार करने के लिए प्लांट लगाया गया है. अंशु गुप्ता बताती हैं यहां तैयार होने वाले उत्पादों और अन्य गतिविधियों से मिलने वाली आय का उपयोग बेजुबान पशुओं की सेवा और देखभाल में किया जाता है.