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26 साल में 87 बार ब्लड डेनेशन…. प्रेरक है कोडरमा के रितेश...


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कोडरमा के रितेश माधव 26 साल में 87 बार रक्तदान कर चुके हैं. उनका लक्ष्य 101 बार रक्तदान करने का है. उन्होंने सन 2000 में पटना से इसकी शुरुआत की थी. वे हर तीन-चार महीने में रक्तदान करते हैं. इतनी बार रक्तदान के बाद भी वे पूरी तरह स्वस्थ हैं.

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कोडरमा: विश्व रक्तदान दिवस के अवसर पर कोडरमा के जेजे कॉलेज के कर्मी रितेश माधव उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं. जिन्होंने जीवन में अभी तक एक बार भी रक्तदान नहीं किया है. 45 वर्ष की उम्र में वे अब तक 87 बार रक्तदान कर चुके हैं और अनगिनत जरूरतमंदों को नया जीवन देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. उनका लक्ष्य अपने जीवन में 101 बार रक्तदान करना है. रितेश माधव ने विशेष बातचीत में बताया कि रक्तदान की शुरुआत वर्ष 2000 में हुई. जब वे पटना विश्वविद्यालय के छात्र थे. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित एक रक्तदान शिविर में उन्होंने पहली बार रक्तदान किया. उसी दिन उन्होंने यह संकल्प लिया कि जीवनभर नियमित रूप से रक्तदान करेंगे और जरूरतमंदों की मदद करेंगे.

हर तीन से चार महीने में करते हैं रक्तदान
पिछले 25 वर्षों से रितेश माधव लगातार तीन से चार महीने के अंतराल पर रक्तदान करते आ रहे हैं. उनका कहना है कि रक्तदान केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि किसी अनजान व्यक्ति को जीवन देने का सबसे बड़ा माध्यम है. उनका ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है और जरूरत पड़ने पर वे बिना किसी हिचकिचाहट के रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं.

कोरोना काल में भी नहीं डगमगाया हौसला
उन्होंने बताया कि जब पूरा देश कोरोना महामारी के भयावह दौर से गुजर रहा था. तब भी उन्होंने रक्तदान करने की इच्छा जताई और सदर अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचे. हालांकि उस समय संक्रमण के खतरे को देखते हुए ब्लड बैंक कर्मियों ने उन्हें रक्तदान की अनुमति नहीं दी और वापस घर भेज दिया था.

दुर्घटना में घायल महिला को देकर बचाई जान
उन्होंने एक भावुक घटना साझा करते हुए बताया कि करीब दो साल पहले जेजे कॉलेज के सामने कार और ट्रक की टक्कर में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई थी. जबकि उसकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं. अस्पताल में रक्त की तत्काल आवश्यकता थी. ऐसे समय में रितेश माधव ने रक्तदान कर महिला के इलाज में सहयोग किया और उनका जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

रक्त शरीर में कुएं के पानी की तरह है
रक्तदान के महत्व को समझाते हुए रितेश माधव ने कहा कि शरीर का रक्त कुएं के पानी के समान है. यदि कुएं से लगातार पानी नहीं निकाला जाए तो वह सड़ने लगता है. उसी तरह शरीर में पुरानी रक्त कोशिकाएं भी समय के साथ नष्ट हो जाती हैं. यदि हम रक्तदान करते हैं तो शरीर नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है और हमारा स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है. इसलिए रक्तदान करके किसी की जिंदगी बचाना सबसे बड़ा पुण्य है.

87 बार रक्तदान के बाद भी पूरी तरह स्वस्थ
लगातार 87 बार रक्तदान करने के बावजूद रितेश पूरी तरह स्वस्थ हैं. उनका कहना है कि वे किसी विशेष डाइट का पालन नहीं करते, बल्कि सामान्य लोगों की तरह नियमित भोजन करते हैं और सामान्य जीवनशैली अपनाते हैं. उनका मानना है कि स्वस्थ व्यक्ति के लिए नियमित रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है.

कई मंचों पर हो चुके हैं सम्मानित
रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने और लगातार समाज सेवा करने के लिए रितेश माधव को जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक कई सामाजिक संस्थाओं और गैर सरकारी संगठनों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है. झारखंड सरकार भी उन्हें सम्मानित कर चुकी है. उनका मानना है कि ऐसे सम्मान दूसरों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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