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NIA ने लखनऊ में प्रमुख सरकारी इमारतों को निशाना बनाने की एक खौफनाक साजिश का खुलासा किया है. एजेंसी के मुताबिक, यह साजिश उसी आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी हुई है, जिस पर दिल्ली के रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले में शामिल होने का आरोप है. एनआईए का दावा है कि डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद ने फैमिटी ट्रिप के बहाने लखनऊ की रेकी की और वहां बम बनाने के सामान भी इकट्ठा किए थे.
एनआईए के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के सबसे संवेदनशील सरकारी ठिकाने आतंकियों के निशाने पर थे.
देश की राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार बम धमाका केस से जुड़े आतंकी मॉड्यूल की साजिश अब लखनऊ तक पहुंच गई थी. भारत की प्रमुख आतंकवाद निरोधक एजेंसी एनआईए की चार्जशीट में ऐसे खुलासे हुए हैं, जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए. जांच एजेंसी का दावा है कि इस टेरर मॉड्यूल से जुड़े दो डॉक्टरों डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद ने ‘फैमिली ट्रिप’ की आड़ में राजधानी लखनऊ में बड़े आतंकी हमले की जमीन तैयार कर ली थी. उत्तर प्रदेश के सबसे संवेदनशील सरकारी ठिकाने उनके निशाने पर थे.
NIA के मुताबिक, डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद अगस्त 2025 में फरीदाबाद से लखनऊ पहुंचे थे. ऊपर से यह सफर एक सामान्य पारिवारिक यात्रा लग रहा था, लेकिन जांच में सामने आया कि दोनों असल में शहर में आतंकी हमले के लिए रेकी कर रहे थे. चार्जशीट के अनुसार, दोनों 25 से 30 अगस्त के बीच लखनऊ में रहे. इस दौरान उन्होंने लालबाग इलाके के खंडारी बाजार स्थित घर और रिश्तेदारों के यहां ठहरकर पूरी रेकी को अंजाम दिया. एजेंसी का दावा है कि यही जगह आतंकी मॉड्यूल का अस्थायी ऑपरेशन सेंटर बनी हुई थी.
‘बम बनाने के केमिकल जुगाड़ रहे थे डॉक्टर’
सबसे चौंकाने वाला खुलासा TATP विस्फोटक को लेकर हुआ है. इसे दुनिया का बेहद खतरनाक विस्फोटक माना जाता है और इसे ‘मदर ऑफ सैटन’ कहा जाता है. NIA के अनुसार, डॉ. मुजम्मिल इंटरनेट पर लखनऊ की उन दुकानों को खोज रहा था, जहां इस विस्फोटक को बनाने वाले केमिकल मिल सकें.
एजेंसी का कहना है कि शाहीन सईद हाथ से उन दुकानों के नाम नोट कर रही थी. इतना ही नहीं, एक स्थानीय संपर्क को यह पता लगाने के लिए लगाया गया था कि क्या बड़ी मात्रा में केमिकल बिना शक पैदा किए खरीदे जा सकते हैं.
‘कई अहम ठिकानों की रेकी’
NIA की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने विधानसभा मार्ग पर स्थित कई हाई-सिक्योरिटी सरकारी परिसरों की रेकी की थी. इनमें उत्तर प्रदेश विधानसभा, मुख्यमंत्री सचिवालय वाला लोक भवन और बापू भवन शामिल हैं. चार्जशीट के मुताबिक, डॉ. मुजम्मिल इन इलाकों में पैदल घूमता रहा और सुरक्षा व्यवस्था, लोगों की आवाजाही, एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स और पुलिस तैनाती का बारीकी से अध्ययन करता रहा.
सिर्फ सरकारी इमारतें ही नहीं, बल्कि बड़ा इमामबाड़ा, अमीनाबाद और लालबाग जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों को भी कथित तौर पर संभावित टारगेट के रूप में देखा गया था. एजेंसी को शक है कि मॉड्यूल बड़े पैमाने पर धमाकों के जरिए दहशत फैलाना चाहता था.
NIA ने तकनीकी सबूतों का हवाला देते हुए कहा कि 28 अगस्त 2025 को शाहीन सईद का मोबाइल फोन विधानसभा-लोक भवन-बापू भवन इलाके के आसपास एक्टिव मिला था. इसे जांच एजेंसी साजिश की बड़ी कड़ी मान रही है. चार्जशीट में दावा किया गया है कि यह मॉड्यूल लखनऊ में गुप्त बम फैक्ट्री बनाकर रेड फोर्ट ब्लास्ट जैसी वारदात को अंजाम देना चाहता था. हालांकि अक्टूबर 2025 में मॉड्यूल का भंडाफोड़ हो गया और कथित आतंकी साजिश समय रहते नाकाम कर दी गई.