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बंद होने से बचेंगे शून्य नामांकन वाले पांच विद्यालय… नए सिरे से...




सिमडेगा | रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित जैसोवा मेला में सिमडेगा की स्वयं सहायता समूह की दीदियों ने पलाश स्टॉल लगाया। सिमडेगा की उपायुक्त कंचन सिंह ने स्टॉल का भ्रमण किया और पलाश ब्रांड के विभिन्न उत्पादों को देखकर ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे सामानों की जानकारी ली। स्टॉल पर दीदियों ने स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों को बेहद आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया था। इस अवसर पर दीदियों ने उपायुक्त को पलाश ब्रांड के उत्पादों से युक्त गिफ्ट हैंपर भेंट किया, जिसे दीदियों के सम्मान, आत्मीयता और अपने उत्पादों पर भरोसे का प्रतीक बताया गया। बताया गया कि जैसोवा मेला जैसे आयोजनों में पलाश स्टॉल की सहभागिता से स्थानीय उत्पादों को बड़ा मंच मिलता है, जिससे उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच बनती है और महिला उद्यमियों को नए अवसर प्राप्त होते हैं। ऐसे मंच ग्रामीण महिलाओं के कौशल, कड़ी मेहनत और उद्यमशीलता को बढ़ावा देकर उन्हें सशक्त बनाने में भूमिका निभाते हैं। भास्कर न्यूज | सिमडेगा जिले के पांच सरकारी विद्यालय पिछले तीन वर्षों से बच्चों के नामांकन का इंतजार कर रहे हैं। लगातार तीन साल तक नामांकन नहीं होने के कारण इन विद्यालयों को बंद करने या दूसरे विद्यालयों में मर्ज करने का प्रस्ताव प्रखंड शिक्षा समितियों की ओर से जिला समिति को भेजा गया था। लेकिन अब इन विद्यालयों के बंद होने पर फिलहाल विराम लग गया है। उपायुक्त कंचन सिंह ने विद्यालयों को बंद करने के बजाय एक बार फिर नामांकन बढ़ाने का प्रयास करने का निर्देश दिया है। इसके बाद शिक्षा विभाग नए सिरे से सर्वे कराकर बच्चों और उनके अभिभावकों से संपर्क करेगा, ताकि विद्यालयों का संचालन जारी रखा जा सके। जिले के जलडेगा, कोलेबिरा और ठेठईटांगर प्रखंड के पांच विद्यालयों में पिछले तीन वर्षों से एक भी बच्चे का नामांकन नहीं हुआ है। लगातार नामांकन शून्य रहने पर प्रखंड शिक्षा समितियों द्वारा बंद या विलय के लिए भेजे गए प्रस्ताव में पांच विद्यालय शामिल हैं। शिक्षा विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर जिला समिति के स्तर से विचार किया जा रहा था। इसी दौरान उपायुक्त कंचन सिंह ने इन विद्यालयों को बंद करने से पहले एक और प्रयास करने का निर्देश दिया। उपायुक्त का मानना है कि विद्यालयों को बंद करने का निर्णय लेने से पहले नामांकन बढ़ाने की संभावनाओं को पूरी तरह तलाशना जरूरी है। नामांकन बढ़ा तो जारी रहेगा विद्यालयों का संचालन जिला शिक्षा अधीक्षक दीपक कुमार राम के अनुसार, विभाग का प्रयास रहेगा कि पांचों विद्यालयों में बच्चों का नामांकन सुनिश्चित हो और उनका संचालन जारी रखा जा सके। फिलहाल, तीन वर्षों से शून्य नामांकन के कारण बंद या मर्ज करने के प्रस्ताव में शामिल इन पांच विद्यालयों को एक और अवसर मिला है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग का नया सर्वे और नामांकन अभियान इन विद्यालयों में फिर से बच्चों की चहल-पहल लौटाने में कितना सफल होता है। उपायुक्त के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग अब पांचों विद्यालयों में नामांकन की स्थिति का नए सिरे से आकलन करेगा। जिला शिक्षा अधीक्षक दीपक कुमार राम ने बताया कि विभाग एक बार फिर सर्वे कराएगा। इस कार्य में सीआरपी और संबंधित एनजीओ की मदद ली जाएगी। सर्वे के दौरान संबंधित विद्यालयों के आसपास रहने वाले बच्चों की संख्या, स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों और नामांकन की संभावनाओं का पता लगाया जाएगा। इसके अलावा अभिभावकों से बातचीत कर यह जानने का प्रयास होगा कि पिछले तीन वर्षों से इन विद्यालयों में बच्चों का नामांकन क्यों नहीं हो रहा है। इसके बाद बच्चों को विद्यालय से जोड़ने और अभिभावकों को जागरूक करने की पहल की जाएगी।



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