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बाबा बैद्यनाथ की नगरी में इंसानियत की मिसाल, भूखों का पेट भर...


देवघर: महंगाई के इस दौर में जहां 10 रुपये में एक पैकेट बिस्कुट खरीदना भी मुश्किल है. वहीं, बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में महज 10 रुपये में लोगों को भरपेट भोजन कराया जा रहा है, लेकिन इस पहल की सबसे खास बात सिर्फ सस्ता खाना नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी एक ऐसी सोच है, जो जरूरतमंदों की भूख मिटाने के साथ उनके आत्मसम्मान का भी ख्याल रखती है. आखिर कौन कर रहा है यह अनूठी पहल? कैसे महज 10 रुपये में लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है? और कैसे लोग अपने जन्मदिन, शादी और दूसरे मांगलिक अवसरों की खुशियां जरूरतमंदों के साथ बांट रहे हैं? देवघर के वीआईपी चौक के समीप चल रही यह पहल समाज को सेवा और इंसानियत का एक नया संदेश दे रही है. आइये जानते हैं इसके बारे में

जानें क्या कहते हैं आयोजक

देवघर के वीआईपी चौक के समीप चल रही इस पहल का उद्देश्य उन लोगों तक भोजन पहुंचाना है, जिनके लिए कई बार दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो जाता है. इस व्यवस्था के मुख्य आयोजक चंदन बरनवाल हैं, जो बिहार के जमुई के रहने वाले हैं. चंदन बरनवाल बताते हैं कि पिछले एक साल से यह कार्य कर रहे है. इस व्यवस्था में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक लोगों को 10 रुपये के टोकन पर भोजन दिया जाता है.

उन्होंने बताया कि दिल्ली की एक संस्था के साथ मिलकर इस पहल को संचालित किया जा रहा है. इसकी सबसे खास बात यह है कि यहां लोगों को मुफ्त भोजन देने के बजाय महज 10 रुपये का टोकन दिया जाता है, ताकि भोजन करने वाले किसी भी व्यक्ति को यह महसूस न हो कि वह किसी के सामने हाथ फैलाकर खाना मांग रहा है. छोटी-सी रकम लेकर भोजन करने की यह व्यवस्था जरूरतमंदों को सहायता देने के साथ उनके आत्मसम्मान को भी बनाए रखने की कोशिश है.

जानें क्या कहते है राहगीर

आज के समय में महंगाई के बीच कम आमदनी वाले लोगों के लिए खाने-पीने का खर्च उठाना भी बड़ी चुनौती बन जाता है. कोई मजदूरी करने शहर पहुंचता है, तो किसी को काम की तलाश में दिनभर बाहर रहना पड़ता है. वहीं, कई बार अचानक आई परेशानी के कारण भी लोगों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो जाता है. ऐसी परिस्थितियों में देवघर की यह पहल लोगों के लिए राहत का सहारा बन रही है.

यहां आने वाले राहगीर छोटू श्याम कहते हैं कि आज के समय में 10 रुपये में एक पैकेट बिस्कुट तक मिलना मुश्किल है, लेकिन यहां गरीबों को महज 10 रुपये में भरपेट भोजन मिल रहा है. उनके मुताबिक, जरूरतमंदों के लिए इससे बड़ी राहत की बात क्या हो सकती है. भूखे व्यक्ति को भोजन मिल जाए, तो उसके लिए यह किसी अमृत से कम नहीं है.

कई लोग भी करते है मदद

इस पहल की एक और खास बात यह है कि इसमें लोगों को दूसरों की खुशियों में शामिल होने का अवसर भी दिया जा रहा है. आयोजक चंदन बरनवाल बताते हैं कि कई लोग अपने परिवार में बच्चे के जन्म, अन्नप्राशन, जन्मदिन, शादी या शादी की वर्षगांठ जैसे खास अवसरों पर भोजन का अनुदान करते हैं. लोग अपनी इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार एक, दो या तीन दिनों के भोजन की व्यवस्था में योगदान देते हैं. इसके अलावा इच्छुक लोग भोजन सामग्री उपलब्ध कराकर भी इस सेवा का हिस्सा बन सकते हैं. यानी परिवार में खुशियों का अवसर हो, तो उन खुशियों को जरूरतमंदों के साथ बांटने का रास्ता भी यहां मिलता है. इससे किसी का खास दिन जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाने का माध्यम बन जाता है.



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