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Parasnath Hill Jharkhand: झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध पारसनाथ पर्वत (सम्मेद शिखरजी) इन दिनों अध्यात्म और कुदरत के अद्भुत संगम का गवाह बना हुआ है. झारखंड का सबसे ऊंचा पर्वत शिखर होने के गौरव के साथ-साथ यह पवित्र स्थल अपनी असीम शांति और अलौकिक वादियों के लिए जाना जाता है. हाल ही में इलाके में हुई मानसूनी फुहारों के बाद इस पूरे पहाड़ी क्षेत्र की रंगत पूरी तरह बदल गई है और यह स्थान श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी मुख्य आकर्षण का केंद्र बन गया है.
मानसून की हल्की बारिश के बाद झारखंड का सबसे ऊंचा पर्वत पारसनाथ इन दिनों हरियाली की चादर ओढ़े नजर आ रहा है. बादलों से घिरी चोटियां, ठंडी हवाएं और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच यह विश्व प्रसिद्ध जैन तीर्थस्थल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक साथ आकर्षित कर रहा है. बारिश के बाद पूरा पर्वत घने पेड़ों और हरियाली से ढक गया है. बादलों से घिरी पहाड़ियां और ठंडी हवाएं यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अलग ही अनुभव करा रही हैं. मौसम ऐसा महसूस हो रहा है मानो सावन पूरे शबाब पर हो.
जहां एक ओर लोग प्रकृति के मनमोहक नजारों का आनंद ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हजारों श्रद्धालु 10 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा कर उस पवित्र तपस्या शिला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, जहां मान्यता के अनुसार भगवान पार्श्वनाथ को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी.जैन धर्म के इस सर्वोच्च और पावन महातीर्थ पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है.
जैन धर्म का सबसे पवित्र तीर्थस्थल- पारसनाथ पर्वत जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में गिना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि 24वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ ने पर्वत की चोटी पर स्थित पवित्र तपस्या शिला पर वर्षों तक कठोर साधना की थी. इसी स्थान पर उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई थी. यही वजह है कि देश-विदेश से जैन श्रद्धालु इस स्थल के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं.
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10 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर पहुंचते हैं श्रद्धालु- पारसनाथ पर्वत की चोटी तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है. कठिन चढ़ाई के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था उन्हें लगातार यहां खींच लाती है. तपस्या शिला के दर्शन के बाद श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर अपने और अपने परिवार के सुख, शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं.
आध्यात्मिक यात्रा के साथ प्रकृति का भी आनंद- मानसून के मौसम में पारसनाथ पर्वत का वातावरण और अधिक आकर्षक हो जाता है. हरियाली, पहाड़ों के बीच तैरते बादल और ठंडी हवा श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक यात्रा को यादगार बना देते हैं. बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी और पर्यटक भी यहां पहुंचकर इस प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं.
आस्था और पर्यटन दोनों को मिल रहा बढ़ावा- धार्मिक महत्व और प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा मेल पारसनाथ पर्वत को झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में भी शामिल करता है. स्थानीय लोगों का मानना है कि मानसून के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है. इससे क्षेत्र के पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है.
क्यों खास है पारसनाथ?- पारसनाथ पर्वत केवल झारखंड का सबसे ऊंचा पर्वत ही नहीं, बल्कि करोड़ों जैन श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी है. मानसून के दौरान यहां का प्राकृतिक सौंदर्य इस धार्मिक स्थल को और अधिक दिव्य बना देता है. यही कारण है कि यहां आने वाला हर श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति के साथ प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य का भी अनुभव लेकर लौटता है.
पहाड़ियों को छूकर गुजरने वाले काले बादल, चारों तरफ फैली धुंध और पहाड़ों से बहते छोटे-छोटे झरने यहाँ आने वाले लोगों को सावन के सुहावने मौसम का अहसास करा रहे हैं. सुबह और शाम के समय चलने वाली बर्फीली और ठंडी हवाएं इस आध्यात्मिक यात्रा के आनंद को दोगुना कर देती हैं. कुदरत का यह मनमोहक और जादुई रूप सैलानियों को अपनी ओर खींच रहा है और लोग इस विहंगम दृश्य को अपने कैमरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं.