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Monsoon Bird Care Tips: मानसून के मौसम में पालतू पक्षियों में संक्रमण, फंगल रोग और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में उनकी विशेष देखभाल करना बेहद जरूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार पक्षियों के पिंजरे को हमेशा सूखा और साफ रखें, गीला या बासी दाना-पानी तुरंत बदलें तथा उन्हें पर्याप्त धूप और स्वच्छ हवा मिलती रहे, इसका ध्यान रखें. बीमार दिखने पर बिना देरी किए पशु चिकित्सक से सलाह लें. संतुलित आहार और साफ-सफाई के साथ नियमित निगरानी रखने से मानसून में भी पालतू पक्षियों को स्वस्थ और सुरक्षित रखा जा सकता है.
बारिश का मौसम इंसानों के साथ-साथ पालतू पक्षियों की सेहत पर भी असर डालता है.इस दौरान बढ़ी हुई नमी, गंदगी और बैक्टीरिया-फंगस के कारण पक्षियों में कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.अगर समय पर ध्यान नहीं दिया जाए तो छोटी-सी लापरवाही भी पक्षियों की जान पर भारी पड़ सकती है.
उदयपुर के बर्ड पार्क के वेटनरी डॉक्टर हंसराज सिंह ने बताया कि मानसून के मौसम में तोता, बजरीगर, कॉकटेल, लव बर्ड, फिंच और अन्य पालतू पक्षियों की विशेष देखभाल करना बेहद जरूरी है. इस मौसम में उनके पिंजरे की साफ-सफाई, खानपान और आसपास के वातावरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
डॉ. हंसराज सिंह के अनुसार, बारिश के दौरान सबसे ज्यादा खतरा फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण का रहता है. पिंजरे में नमी रहने या गंदगी जमा होने से पक्षियों को सांस लेने में परेशानी, दस्त, सुस्ती, भूख कम लगना और पंख फुलाकर बैठे रहने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.यदि पक्षी लगातार चुप रहने लगे या खाना-पीना कम कर दे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
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उन्होंने बताया कि मानसून में पिंजरे को हमेशा सूखी और हवादार जगह पर रखें.बारिश का पानी या तेज हवा सीधे पिंजरे तक नहीं पहुंचनी चाहिए.रोजाना पिंजरे की सफाई करें और नीचे बिछाए गए पेपर या बिछावन को बदलते रहें, ताकि नमी और गंदगी जमा न हो. खानपान को लेकर भी सावधानी जरूरी है. पक्षियों को हमेशा ताजा दाना और साफ पानी दें. कटे हुए फल और हरी सब्जियां लंबे समय तक पिंजरे में न छोड़ें, क्योंकि बारिश के मौसम में ये जल्दी खराब हो जाती हैं और संक्रमण का कारण बन सकती हैं. पानी के बर्तन को भी रोज अच्छी तरह साफ करना चाहिए.
डॉ. सिंह ने बताया कि कई लोग पक्षियों को खुले में धूप और बारिश का आनंद लेने के लिए छोड़ देते हैं, लेकिन लगातार भीगना उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है.अगर पक्षी भीग जाए तो उसे जल्द सूखे और गर्म वातावरण में रखें.साथ ही, पिंजरे के आसपास मच्छरों और कीड़ों से भी बचाव करें, क्योंकि इनके जरिए भी कई संक्रमण फैल सकते हैं.
उन्होंने सलाह दी कि यदि पक्षी की आंखों या नाक से पानी आ रहा हो, बार-बार छींक आ रही हो, सांस लेने में दिक्कत हो, दस्त हो रहे हों या वह सुस्त दिखाई दे तो घरेलू इलाज करने की बजाय तुरंत किसी पशु चिकित्सक से संपर्क करें. समय पर इलाज मिलने से अधिकांश बीमारियों से बचाव संभव है. डॉ. हंसराज सिंह का कहना है कि थोड़ी-सी सावधानी और नियमित देखभाल से मानसून के दौरान पालतू पक्षियों को स्वस्थ रखा जा सकता है.