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बार-बार क्यों जीत जाती है बीजेपी? Axis My India वाले प्रदीप गुप्ता...


क्या बीजेपी सिर्फ हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की वजह से चुनाव जीतती है? यह सवाल स‍ियासत में लंबे समय से पूछा जाता रहा है. लेकिन देश के सबसे चर्चित चुनाव विश्लेषकों में गिने जाने वाले प्रदीप गुप्‍ता ने इस थ्योरी को सीधे खारिज कर दिया है. Axis My India के चेयरमैन प्रदीप गुप्ता ने साफ कहा कि बीजेपी की लगातार चुनावी जीतों को सिर्फ सांप्रदायिक राजनीति से जोड़ना गुड गवर्नेंस और डिलीवरी का अपमान है.

उन्होंने कहा, जीत-हार हिंदू-मुस्लिम राजनीति से तय नहीं होती. अगर आप ऐसा कहते हैं तो फिर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दूसरे राज्यों में बीजेपी की लगातार वापसी को कैसे समझेंगे? वहां की सरकारों के काम, गवर्नेंस और डिलीवरी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

सिर्फ ध्रुवीकरण से चुनाव नहीं जीते जाते

प्रदीप गुप्ता ने खास तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि अगर बीजेपी सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण के भरोसे चुनाव जीतती, तो अलग-अलग राज्यों में बार-बार सत्ता में वापसी संभव नहीं होती. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी लगातार दो बार सत्ता में लौटी. मध्य प्रदेश में लंबे समय तक पार्टी का दबदबा बना रहा. बिहार में NDA गठबंधन लगातार मजबूत बना हुआ है.

प्रदीप गुप्ता के मुताबिक, इन नतीजों के पीछे गुड गवर्नेंस, योजनाओं की डिलीवरी और संगठन की ताकत बड़ी वजह है. यानी उनके हिसाब से बीजेपी की चुनावी मशीनरी सिर्फ भावनात्मक मुद्दों पर नहीं, बल्कि “लाभार्थी राजनीति और जमीनी नेटवर्क पर भी टिकी हुई है.

बीजेपी की असली ताकत क्या है?

पिछले एक दशक में बीजेपी ने खुद को सिर्फ एक वैचारिक पार्टी नहीं, बल्कि चुनाव जीतने वाली हाई-परफॉर्मेंस मशीन में बदला है. प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी योजनाओं ने करोड़ों लोगों तक सीधा असर पहुंचाया. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बीजेपी ने वेलफेयर , नेशनलिज्म और मजबूत लीडरशिप का ऐसा कॉम्बिनेशन बनाया, जो विपक्ष के लिए चुनौती बन गया.

प्रशांत किशोर पर भी बोले प्रदीप गुप्ता

बातचीत में गुप्ता ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत क‍िशोर का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर किसी भी पार्टी के साथ तभी जुड़ते हैं, जब उन्हें वहां स्पार्क यानी उभरती हुई संभावनाएं दिखाई देती हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि तमिलनाडु में DMK के साथ काम करने के दौरान I-PAC को यह समझ आ गया था कि एक नया नेतृत्व उभर रहा है. इसी संदर्भ में उन्होंने अभिनेता और नेता व‍िजय की बढ़ती लोकप्रियता का भी जिक्र किया.

विपक्ष आखिर कहां चूक जाता है?

बीजेपी की जीत को लेकर दो तरह की सोच दिखाई देती है. एक पक्ष मानता है कि धार्मिक ध्रुवीकरण बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत है. दूसरा पक्ष कहता है कि विपक्ष बीजेपी की संगठन क्षमता, बूथ मैनेजमेंट और योजनाओं की पहुंच को कम आंकता है. प्रदीप गुप्ता का बयान इसी दूसरे नजरिए को मजबूत करता है.

उनका कहना है कि अगर हर चुनावी जीत को सिर्फ हिंदू-मुस्लिम राजनीति कहकर समझाया जाएगा, तो फिर मतदाताओं के फैसले और सरकारों के काम दोनों को हल्के में लेना होगा. और शायद यही वजह है कि भारतीय राजनीति में बीजेपी को समझना सिर्फ नारों से नहीं, बल्कि वोटर बिहेवियर, वेलफेयर मॉडल और संगठन की गहराई से जुड़ा मामला बन चुका है.



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