Last Updated:
पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, बिल्ली खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि घर में उसके रहने के लिए पर्याप्त जगह हो. साथ ही परिवार के किसी सदस्य को बिल्ली के बालों से एलर्जी तो नहीं है, इसकी भी जांच कर लेनी चाहिए. उन्होंने बताया कि बिल्लियों को घूमने-फिरने और खेलने के लिए खुली जगह की जरूरत होती है, इसलिए उनके लिए आरामदायक और पर्याप्त जगह की व्यवस्था करना जरूरी है. इससे बिल्ली स्वस्थ और सक्रिय रहती है.
बोकारो: आजकल लोगों में पालतू बिल्लियां पालने का शौक तेजी से बढ़ रहा है. खासकर देसी और विदेशी नस्ल की बिल्लियों की मांग लगातार बढ़ रही है. हालांकि, कई लोग बिना पूरी जानकारी और जांच-पड़ताल के बिल्ली खरीद लेते हैं, जिसके कारण बाद में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में बोकारो के चास स्थित एक पेट क्लीनिक के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने बिल्ली खरीदने और उसकी देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं.
डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि बिल्ली खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि घर में उसके रहने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है या नहीं. इसके साथ ही यह भी जान लेना जरूरी है कि परिवार के किसी सदस्य को बिल्ली के बालों से एलर्जी तो नहीं है, क्योंकि इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. उन्होंने बताया कि बिल्लियों को घूमने-फिरने और खेलने के लिए पर्याप्त जगह की जरूरत होती है. इसलिए उनके लिए खुले और आरामदायक स्थान की व्यवस्था करनी चाहिए. साथ ही उनकी साफ-सफाई और शौच की उचित व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है.
डॉ. अनिल ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पर्शियन या अन्य विदेशी नस्ल की बिल्ली खरीदने की योजना बना रहा है, तो उसके लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है. विदेशी नस्ल की बिल्लियां अधिक तापमान को आसानी से सहन नहीं कर पातीं, जिससे उनमें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इसलिए उनके लिए ठंडा और आरामदायक माहौल उपलब्ध कराना बेहतर होता है. जरूरत पड़ने पर एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था भी की जा सकती है.
डॉ. अनिल ने सलाह दी कि बिल्ली खरीदने से पहले उसकी शारीरिक जांच अवश्य कर लेनी चाहिए. बिल्ली के दांत, कान और आंखों की अच्छी तरह जांच करें. शरीर पर किसी प्रकार के घाव, कटने या चोट के निशान नहीं होने चाहिए, क्योंकि ये आगे चलकर स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का कारण बन सकते हैं. नई बिल्ली को घर लाने के बाद शुरुआती दिनों में वह डरी-सहमी रह सकती है. कई बार वह सोफे, बिस्तर या घर के किसी कोने में छिप जाती है. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है. उसे नए माहौल में खुद को ढालने के लिए समय देना चाहिए.
इसके लिए डॉ. अनिल कुमार ने ‘3-3-3 नियम’ अपनाने की सलाह दी है. इसके तहत पहले 3 दिनों तक बिल्ली को नए माहौल को समझने का समय दें. अगले 3 सप्ताह में उसे घर और परिवार के सदस्यों के साथ घुलने-मिलने का अवसर दें. वहीं पहले 3 महीनों तक उसके साथ भरोसेमंद रिश्ता बनाने पर ध्यान केंद्रित करें. उन्होंने कहा कि बिल्ली को स्वस्थ रखने के लिए समय-समय पर वैक्सीनेशन और डी-वॉर्मिंग कराना बेहद जरूरी है. साथ ही उसके खेलने के लिए खिलौनों की व्यवस्था भी करनी चाहिए, क्योंकि बिल्लियों को खेलना और नई चीजों को खरोंचना पसंद होता है.
डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, देसी और विदेशी दोनों नस्ल की बिल्लियों को अच्छी तरह पाला जा सकता है. हालांकि, देसी बिल्लियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत अधिक होती है, जबकि विदेशी नस्ल की बिल्लियों को अधिक देखभाल और विशेष वातावरण की आवश्यकता पड़ती है.
About the Author
न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें