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बुरी तरह फंस गए हेमंत सोरेन! नियुक्तियां रद कर 2000 लोगों को...


रांची. झारखंड में सरकारी नौकरियों में नियुक्ति-बरखास्तगी को लेकर खतरनाक खेल चल रहा है. सरकार ने जेपीएससी, जेएससी और अन्य परीक्षाओं के जरिए करीब 2000 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देकर 8 महीने पहले ही 30 दिसंबर 2025 को अपनी पीठ थपथपाई थी. इन नियुक्तियों में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर 3 सप्ताह से अधिक समय तक छात्रों ने आंदोलन किया. छात्रों की 2 प्रमुख मांगें थीं. नियुक्ति परीक्षाएं तत्काल रद की जाएं और मामले की सीबीआई जांच कराई जाए. सरकार ने परीक्षाएं तो रद कर दीं. नियुक्ति पाए लोगों को डिसमिस करने का आदेश भी जारी कर दिया. पर, हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर स्टे लगा दिया है. सरकार जांच तो कराना चाहती है, लेकिन सीआईडी जांच की जिद छोड़ने को तैयार नहीं है. छात्रों को सीआईडी पर भरोसा ही नहीं है. अलबत्ता उन्होंने जजों की कमेटी से कराने पर संतुष्टि का आश्वासन जरूर दिया है.

छात्र सीबीआई जांच पर अड़े

सरकार सीबीआई या जजों से जांच कराने का छात्रों का सुझाव मानने को अब भी तैयार नहीं है. जांच की जिद दोनों ओर है. मसलन सरकार सीआईडी से जांच को पर्याप्त मानती है तो छात्र सीबीआई जांच से कम पर अब तैयार नहीं. वे हेमंत सोरेन का जिलावार पुतला दहन कर रहे हैं तो पुलिस और गठबंधन सरकार में अग्रणी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) समर्थक आंदोलनकारियों को सबक सिखा रहे हैं. गिरिडीह में जेएमएम समर्थकों ने न सिर्फ पुतला दहन से रोका, बल्कि दौड़ा-दौड़ा कर उन पर डंडे भी बरसाए. रांची में पुलिस ने आंदोलनकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया. यहां पुलिस ने डंडे के जोर पर पुतला जलाने जुटे आंदोलनकारियों को भगाया. छात्रों का मानना है कि सीआईडी राज्य सरकार के अधीन है. इसलिए सही जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती. वे सीीबआई जांच की मांग को लेकर अब भी आंदोलनरत हैं.

फंसते जा रहे हैं हेमंत सोरेन

हेमंत कई कारणों से बुरे फंस गए हैं. एक तो उन्होंने जितने लोगों की नौकरी नियुक्ति के बाद छीनने की कोशिश की है, वे उनके दुश्मन बन गए हैं. परीक्षाएं रद करने की मांग पर 25 दिनों के आंदोलन का परिणाम यह हुआ कि सरकार ने छात्रों की मांग मान ली. 2014 से अब तक हुई जेपीएससी, जेएससी जैसी समस्थाओं द्वारा ली गई 22 परीक्षाएं रद कर दी. इसके लिए आनन-फानन आदेश भी जारी कर दिया. अदालत में सही तरीके से पक्ष नहीं रख पाने के कारण सरकार को बड़ा झटका लगा. हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर अंतिम फैसला आने तक रोक लगा दी. आंदोलनकारी छात्रों के बीच अब यह मैसेज जोर-शोर से प्रसारित हो रहा है कि जान-बूझ कर सरकार ने अपना कमजोर पक्ष रखा. हेमंत की नीयत साफ नहीं है वे आंदोलनकारियों से छल कर रहे हैं. सही नीयत होती तो वे सीबीआई जांच की शर्त मान लेते. साथ ही अदालत में सरकार मजबूती से अपना पक्ष रखती. आंदोलनकारियों की नजरों में हेमंत अब भी दुश्मन बने हुए हैं. यानी उन्होंने दोहरे दुश्मन बना लिए हैं. जिनकी नौकरी जाने वाली थी, वे खफा हैं तो उनकी नौकरी खत्म करने पर छात्र आमादा हैं.

हेमंत पर मजा ले रही BJP

झारखंड में चल रही इस सरकारी नौटंकी का भरपूर आनंद भाजपा ले रही है. हेमंत सोरेन आंदोलनकारियों के आगे एक बार झुक चुके हैं. सीबीआई की मांग मान लेते हैं तो वे एक बार और उनके आगे नतमस्तक होंगे. जिस आयोग का गठन उन्होंने अपने पद के रसूख का इस्तेमाल करते हुए किया था, वह अअब भंग हो चुका है. अध्यक्ष को सीआईडी ने अरेस्ट किया है तो बाकी सदस्यों ने खतरा भांप कर खुद ब खुद इस्तीफा दे दिया है. भाजपा ने भी छात्रों के आंदोलन को हवा देनी शुरू कर दी है. सीधे तौर पर भाजपा आंदोलन में शरीक भले न हो, लेकिन वह इसे हवा देने में पीछे नहीं रह रही.

गृहमंत्री शाह ने दिया गुरुमंत्र

हाल ही में भाजपा के प्रदेश स्तर के 8 बड़े नेताओं ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की थी. इनमें 4 तो पूर्व मुख्यमंत्री ही थे. इस मीटिंग का बड़ा संदेश यह था कि आपसी भेदभाव भुला कर हेमंत सोरेन की सरकार पर हमले तेज करें. सियासत के ठंडे बस्ते में पड़े रघुवर दास भी इस आंदोलन के दौरान खूब सक्रिय रहे हैं. हालांकि उनके कार्यकाल की परीक्षाएं भी रद हुई हैं. बहरहाल, गृहमंत्री अमित शाह ने छात्र आंदोलन को सियासी टूल बनाने का निर्देश भाजपा को दिया है. उनका मानना है कि यह जेन जी का मामला है, जिसे अवसर के रूप में भाजपा कोो भुनाना चाहिेए. उसके बाद ही भाजपा ने हेमंत के पुतला दहन का कार्यक्रम बनाया. अब तो भाजपा ने जेन जी से सीधा संवाद करने की रणनीति भी बनाई है.

कोर्ट से CBI जांच की आस

मामला हाईकोर्ट में है. सरकार अगर इस मामले की सीबीआई से जांच कराने का आदेश नहीं देती है तो कोर्ट से उम्मीद बनती है. इसलिए कि जिन लोगों की नौकरी खत्म करने का आदेश दिया है, उनमें सही कैंडिडेट भी हो सकते हैं. कौन सही है और कौन पैसे-पैरवी से नौकरी पाया है, यह पड़ताल किए बगैर नैसर्गिक न्याय नहीं हो सकता. इसलिए इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि हाईकोर्ट मामले की जांच सीबीआई को सौंप दे. ऐसा हुआ तो हेमंत सोरेन की मुसीबतें और बढञ सकती हैं. इसलिए कि राज्य की ीसआईडी ने जिस तरह धर-पकड़ शुरू की है और गिरफ्तार लोग पैसे के लेन-देन और परीक्षा कराने वाली एजेंसी की गड़बड़ियां सामने आई हैं, उससे तो यह बात साफ है कि कुछ तो गड़बड़ है.



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