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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में पश्चिम बंगाल के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की. बांग्लादेश, नेपाल और भूटान सीमा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ राज्य में नए पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत संगठित अपराधों पर कड़ा एक्शन लेने का खाका तैयार किया गया है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बंगाल दौरा.
कोलकाता. पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा को लेकर देश की राजधानी दिल्ली से लेकर कोलकाता तक हलचल बेहद तेज हो गई है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कोलकाता के दक्षिणी हिस्से में राज्य के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की. इस बैठक में सूबे की कानून व्यवस्था से लेकर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा और हाल ही में लागू हुए कड़े कानूनों के लागू करने को लेकर बेहद गंभीर चर्चा हुई. इस बैठक में सीएम सुवेंदु अधिकारी के साथ-साथ राज्य के वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारी मौजूद रहे. इस महत्वपूर्ण बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) सिद्ध नाथ गुप्ता समेत गृह मंत्रालय और राज्य सुरक्षा से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
गृह मंत्री का यह दौरा और सीधे अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक करना न केवल प्रशासनिक रूप से अहम माना जा रहा है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक और रणनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं. समीक्षा बैठक के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के निर्देश दिए. राज्य की 2,217 किलोमीटर लंबी बांग्लादेश सीमा इस मीटिंग के केंद्र में था. पश्चिम बंगाल की सीमा बांग्लादेश के साथ 2,217 किलोमीटर का एक विशाल भूभाग साझा करती है. गृह मंत्री ने सीमा पार से होने वाली अवैध घुसपैठ, मवेशी तस्करी और जाली नोटों के कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल और राज्य पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की बात कही.
बांग्लादेश, नेपाल और भूटान मोर्चे पर मुस्तैदी
बांग्लादेश के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की सीमाएं नेपाल और भूटान जैसे देशों से भी मिलती हैं. इन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा की खामियों को दूर करने और किसी भी प्रकार की राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को रोकने के लिए खुफिया तंत्र को और अधिक सक्रिय करने का निर्देश दिया गया. यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब कुछ ही हफ्ते पहले राज्य में बेहद कड़ा ‘वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल Activities एक्ट’ पारित किया गया है.
यह कानून राज्य सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को असामाजिक तत्वों और अपराधियों के खिलाफ अभूतपूर्व शक्तियां प्रदान करता है.अधिनियम के तहत मुख्य क्षेत्रगृह मंत्री के कड़े निर्देश और एक्शन प्लानसंगठित अपराध और रंगदारीसिंडिकेट राज और व्यापारियों से होने वाली जबरन वसूली को जड़ से खत्म करने के लिए कठोरतम कदम उठाए जाएं. माफियाओं के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त किया जाए. बढ़ते डिजिटल फ्रॉड और वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए पुलिस की तकनीकी विंग को मजबूत किया जाए. कानून व्यवस्था को हाथ में लेने वाले या अशांति फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ बिना किसी पक्षपात के त्वरित कार्रवाई हो.
अमित शाह के इस दौरे के क्या हैं राजनीतिक मायने?
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक रूप से हमेशा से ही कानून व्यवस्था एक बेहद संवेदनशील और विवादित मुद्दा रहा है. नई राजनीतिक परिस्थितियों और कड़े कानूनों के आने के बाद केंद्र सरकार का सीधे राज्य के शीर्ष अधिकारियों के साथ संवाद करना यह दिखाता है कि केंद्र अब बंगाल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी भी प्रकार का ढीला रवैया बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है.
कुलमलिकार गृह मंत्री अमित शाह का यह दौरा साफ संदेश है कि नए सुरक्षा कानून के पारित होने के बाद अब अधिकारियों के पास अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पर्याप्त कानूनी अधिकार हैं. गृह मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस और प्रशासन को बिना किसी राजनीतिक दबाव के काम करना होगा ताकि राज्य में कानून का इकबाल बुलंद हो सके.
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