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मजाक-मजाक में शुरू हुआ बाजार, आज हजारों का कारोबार..! यहां महिलाएं लगाती...


पलामू. आज की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं. शिक्षा, कृषि, व्यवसाय, विज्ञान, खेल, राजनीति और सामाजिक नेतृत्व जैसे हर क्षेत्र में वे अपनी प्रतिभा और क्षमता का परचम लहरा रही हैं. जरूरत केवल उन्हें सही अवसर, मंच और प्रोत्साहन देने की है. जब महिलाओं को संसाधन, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है, तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करती हैं, बल्कि समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं. चैनपुर के चेडाबार गांव का ग्रामीण हाट इसकी एक जीवंत मिसाल है, जहां स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने परिश्रम और सामूहिक प्रयास से सफलता की नई कहानी लिख रही हैं.

बन रहीं आत्मनिर्भर, बना रही पहचान
दरअसल, चैनपुर प्रखंड के चेडाबार गांव में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित ग्रामीण हाट आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनकर उभरा है. सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं. दीदी बाड़ी योजना जैसी पहल ने महिलाओं को सब्जी उत्पादन से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार का अवसर दिया है. कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज बाजार का संचालन कर रही हैं और अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

सरकारी योजनाओं से बदली महिलाओं की तस्वीर
ग्रामीण हाट की सफलता के पीछे स्वयं सहायता समूहों की सक्रियता और सरकारी योजनाओं का बड़ा योगदान है. महिलाओं ने दीदी बाड़ी योजना के तहत सब्जियों की खेती शुरू की और अपने उत्पादों के लिए स्थानीय बाजार तैयार किया. इससे उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए दूर शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. स्थानीय स्तर पर ही बाजार उपलब्ध होने से समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है. साथ ही, ग्रामीणों को ताजी सब्जियां और जरूरी सामग्री भी गांव में ही मिल जा रही है.

बैठक से शुरू हुई बाजार की अनोखी पहल
सुनीता देवी ने लोकल18 को बताया कि बटुआ की ग्रामीण हाट की शुरुआत वर्ष 2022 में एक साधारण बैठक के दौरान हुई थी. स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बैठक कर रही थीं, तभी एक महिला ने बताया कि उसके पास 15 से 20 किलो टमाटर है, जिसे बेचने के लिए उसे डालटनगंज जाना पड़ेगा.

इस पर समूह की अन्य महिलाओं ने मिलकर उसका पूरा टमाटर खरीद लिया. संयोग से वह दिन गुरुवार था. इसके बाद महिलाओं ने तय किया कि हर गुरुवार को स्थानीय स्तर पर बाजार लगाया जाएगा, ताकि किसी भी महिला को अपनी उपज बेचने के लिए दूर न जाना पड़े. यही छोटी पहल आज एक सफल ग्रामीण हाट का रूप ले चुकी है.

हर गुरुवार सजता है सब्जियों का बाजार
आज चेडाबार का ग्रामीण हाट आसपास के क्षेत्रों में पहचान बना चुका है. गुरुवार को यहां बड़े पैमाने पर बाजार लगता है, जिसमें 15 से 20 स्टॉल लगाए जाते हैं. महिलाओं द्वारा ताजी सब्जियों के अलावा फास्ट फूड, चूड़ी-कंगन, श्रृंगार सामग्री तथा रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं की बिक्री की जाती है. बाजार प्रतिदिन भी संचालित होता है, हालांकि गुरुवार को इसकी रौनक सबसे अधिक होती है. दोपहर तीन बजे से शाम सात बजे तक लगने वाला यह बाजार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है.

स्थायी शेड की मांग, मिलेगी और मजबूती
ग्रामीण हाट से जुड़ी सुनीता देवी बताती हैं कि बरसात, तेज धूप और आंधी-पानी के दौरान बाजार संचालन में काफी परेशानी होती है. खुले में बैठने के कारण सब्जियां खराब होने का खतरा बना रहता है. महिलाओं की मांग है कि सरकार यहां स्थायी शेड का निर्माण कराए, जिससे बाजार को और व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सके. यदि यह सुविधा मिलती है, तो ग्रामीण हाट का दायरा और अधिक बढ़ेगा तथा इससे जुड़ी महिलाओं की आय में भी बढ़ोतरी होगी.



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