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कोडरमा जिले के डोमचांच स्थित महथाडीह के रहने वाले 22 वर्षीय सचिन प्रजापति मधुमक्खी पालन के माध्यम से लाखों रुपए की आय अर्जित कर रहे हैं। वे 15 विभिन्न प्रकार के शहद तैयार करते हैं और उनकी मार्केटिंग देश के हर हिस्से में करते हैं। सचिन कोडरमा जिले के एकमात्र युवा उद्यमी हैं, जो बड़े पैमाने पर शहद का कारोबार कर रहे हैं। उन्होंने ‘उमा बी फार्म’ नामक एक कंपनी स्थापित की है, जिसके माध्यम से वे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से शहद का व्यापार करते हैं। कीमत 500 से 1400 रुपए प्रति किलोग्राम
सचिन ने बताया कि मधुमक्खी पालन और शहद निकालने का कार्य मौसम और फल-फूल की उपलब्धता के अनुसार बिहार, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में किया जाता है। हालांकि, शहद की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और डिलीवरी वे अपने डोमचांच स्थित आवास से ही करते हैं। उनके फर्म में तुलसी हनी, मोरिंगा हनी, कश्मीरी हनी, ब्लैक फॉरेस्ट बेरी हनी, रेड फॉरेस्ट हनी, लीची हनी, सरसों हनी, करंज हनी, लाल घास हनी, नीम हनी और जामुन हनी सहित विभिन्न प्रकार के शहद उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 500 से 1400 रुपए प्रति किलोग्राम है। शहद प्रोसेसिंग के लिए सचिन ने पीएमएफएमई (PMFME) योजना के तहत 35 प्रतिशत अनुदान पर साढ़े चार लाख रुपए का ऋण लेकर एक प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया है। सचिन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा डोमचांच के सीएम प्लस टू उच्च विद्यालय से प्राप्त की और 2020 में रांची से बीसीए की पढ़ाई पूरी की। पिता फुटपाथ पर नाश्ते का ठेला लगाते हैं
सचिन ने बताया कि उन्होंने पढ़ाई के दौरान ही भविष्य में व्यापार करने का निश्चय कर लिया था। उनके पिता राजेंद्र पंडित कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में फुटपाथ पर नाश्ते का ठेला लगाते हैं।
यूट्यूब से बी फार्मिंग (मधुमक्खी पालन) की मिली जानकारी सचिन ने बताया कि परिवार द्वारा उसके भविष्य के योजनाओं को समर्थन मिलने के बाद वह अपने सपने को पूरा करने के लिए अलग-अलग प्रकार के व्यापार की जानकारी के लिए यूट्यूब देखने लगे। जहां अलग-अलग प्रकार के व्यापार की जानकारी मिली। इस दौरान बी फार्मिंग (मधुमक्खी पालन) का व्यापार सबसे ज्यादा भा गया। इस व्यापार से संबंधित सारी जानकारी इकट्ठा की और इसकी ट्रेनिंग के लिए 2022 में पटना (बिहार) चले गए। जहां 5 दिनों की बेसिक ट्रेनिंग लेने के बाद मास्टर ट्रेनिंग (CBRTI) लेने के लिए पुणे (महाराष्ट्र) पहुंचे। ट्रेनिंग लेने के बाद 2023 में वापस डोमचांच आए और व्यापार करने की शुरुआत की। मां से एक लाख रुपए लेकर शुरू किया कारोबार
सचिन की मां उमा देवी ने बताया कि उनके बेटे सचिन ने रांची से बीसीए किया और उम्मीद थी कि उनका बेटा नौकरी करेगा। लेकिन, उसने बिजनेस करने की बात कही और बेटे की कुशलता पर विश्वास कर हमने उसके इस विचार पर हामी भर दी। उन्होंने बताया कि पुणे से प्रशिक्षण लेकर सचिन जब वापस घर लौटा तो उसने अपने नए व्यापार के लिए उनसे एक लाख रुपए की मांग की। शुरू में मैंने थोड़ा सोचा, लेकिन बाद में बेटे को व्यवसाय के लिए रुपए दे दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में थोड़ा डर सा बना रहा लेकिन आज उनका बेटा शहद का कारोबार कर लाखों रुपए कमा रहा है। उन्होंने बताया कि बेटे ने फर्म का नाम भी उनके नाम पर रखा और वे भी सचिन की हर संभव मदद करती है। सचिन ने बताया कि शुरुआत में मां से एक लाख रूपये मिलने के बाद उन्होंने मधुमक्खी पालन के लिए 15 बॉक्स खरीदे और उसी से शुरुआत की। सचिन ने इस कारोबार से जुड़े लोगों की एक टीम बनाई, जिसमें मधुमक्खी पालन के अलग-अलग राज्य में अलग-अलग टीम है, जबकि प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का काम वे खुद करते है। कुरियर से होती है देशभर में सप्लाई
सचिन को अपने फर्म के वेबसाइट के माध्यम से देश के अलग-अलग राज्यों से शहद की डिमांड मिलती है और कुरियर के माध्यम से वे पेमेंट लेने के बाद सप्लाई करते हैं। उन्होंने बताया कि उनका यह शहद देश के हर हिस्से में मिलने के साथ स्थानीय झुमरीतिलैया बाजार के कई होटलों में भी उपलब्ध है। इसके अलावे पैकेजिंग के शीशा का जार और ढक्कन फरीदाबाद से मंगाते हैं। साल का 9 से 10 लाख रुपए का होता है मुनाफा सचिन ने बताया कि शुरुआत में उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी। शहद को बाजार तक लाने में उन्होंने दिन रात एक कर दिया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में वे लोकल स्तर पर अपना व्यापार कर रहे थे। इससे उनकी आमदनी काम चलाऊ तक ही सीमित थी। बाद में उनके शहद को लोग पसंद करने लगे। आज उनकी महीने की करीब 1 टन से अधिक की शहद की सप्लाई पूरे भारतवर्ष में हो रही है। इससे उन्हें साल में करीब 9 से 10 लाख रुपए की आमदनी हो रही है। क्या होता है मधुमक्खी पालन
बी फार्मिंग (मधुमक्खी पालन) एक अत्यंत लाभदायक कृषि-आधारित व्यवसाय है। इसमें शहद, मोम, पराग (पोलन) और रॉयल जेली जैसे उत्पादों से अच्छी कमाई होती है। साथ ही, मधुमक्खियां फसलों में परागण कर पैदावार बढ़ाने में मदद करती है। इसे छोटे स्तर से भी शुरू किया जा सकता है।
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