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कोडरमा के सचिन प्रजापति ने मधुमक्खी पालन में कमाल किया है. वे 15 अलग-अलग किस्मों का शहद तैयार कर रहे हैं. देश भर में हर महीने एक टन शहद की सप्लाई होती है. इस कारोबार से वे सालाना 10 लाख रुपये कमा रहे हैं. यूट्यूब और सरकारी योजना से उन्हें यह कामयाबी मिली.
कोडरमाः आमतौर पर लोग एक-दो तरह के शहद के बारे में ही जानते हैं. लेकिन कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड के महथाडीह निवासी युवा उद्यमी सचिन प्रजापति ने शहद को नई पहचान दी है. उन्होंने मधुमक्खी पालन के जरिए 15 अलग-अलग किस्म का शहद तैयार कर न सिर्फ अपना सफल व्यवसाय खड़ा किया. बल्कि आज देशभर में अपने ब्रांड के माध्यम से शहद की सप्लाई भी कर रहे हैं. अपने इस कारोबार से सचिन सालाना 9 से 10 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं. सचिन उमा बी फार्म नाम से अपनी कंपनी संचालित करते हैं. उन्होंने अपनी मां उमा देवी के नाम पर ही फर्म का नाम रखा. जिन्होंने शुरुआत में उन पर भरोसा जताते हुए व्यवसाय शुरू करने के लिए एक लाख रुपये दिए थे.
यूट्यूब से मिली प्रेरणा, प्रशिक्षण लेकर शुरू किया कारोबार
सचिन ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा डोमचांच के सीएम प्लस टू उच्च विद्यालय से हुई. इसके बाद उन्होंने रांची के मारवाड़ी कॉलेज से वर्ष 2020 में बीसीए की पढ़ाई पूरी की. उनके पिता राजेंद्र पंडित कोलकाता में फुटपाथ पर नाश्ते का ठेला लगाते हैं. पिता के संघर्ष और व्यापारिक सोच ने सचिन को नौकरी के बजाय व्यवसाय करने के लिए प्रेरित किया. व्यापार की तलाश में उन्होंने यूट्यूब पर कई वीडियो देखे. जहां उन्हें बी फार्मिंग का विचार पसंद आया. इसके बाद उन्होंने वर्ष 2022 में पटना जाकर बेसिक ट्रेनिंग ली और फिर पुणे स्थित सीबीआरटीआई से मास्टर ट्रेनिंग प्राप्त की. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वर्ष 2023 में उन्होंने डोमचांच लौटकर कारोबार की शुरुआत की.
15 बॉक्स से शुरू होकर देशभर तक पहुंचा कारोबार
उन्होंने बताया कि मां से मिले एक लाख रुपये से उन्होंने शुरुआती दौर में 15 मधुमक्खी बॉक्स खरीदे. आज उनके साथ अलग-अलग राज्यों में मधुमक्खी पालन करने वाली टीमें जुड़ी हैं. मौसम और फूलों की उपलब्धता के अनुसार बिहार, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में मधुमक्खी पालन किया जाता है. जबकि शहद की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और डिलीवरी डोमचांच स्थित उनके केंद्र से होती है. उनके यहां तुलसी हनी, मोरिंगा हनी, कश्मीरी हनी, ब्लैक फॉरेस्ट बेरी हनी, रेड फॉरेस्ट हनी, लीची हनी, सरसों हनी, करंज हनी, लाल घास हनी, नीम हनी और जामुन हनी समेत 15 प्रकार के शहद उपलब्ध हैं. इनकी कीमत 500 से 1400 रुपये प्रति किलो तक है.
सरकारी योजना से लगा प्रोसेसिंग प्लांट
सचिन ने पीएमएफएमई योजना के तहत 35 प्रतिशत अनुदान पर करीब 4.5 लाख रुपये की सहायता से शहद प्रोसेसिंग प्लांट भी स्थापित किया है. इससे उनके उत्पाद की गुणवत्ता और पैकेजिंग बेहतर हुई है. पैकेजिंग के लिए कांच के जार और ढक्कन फरीदाबाद से मंगाए जाते हैं. उनकी वेबसाइट के माध्यम से देशभर से ऑर्डर प्राप्त होते हैं. वर्तमान में वह हर महीने एक टन से अधिक शहद की आपूर्ति कर रहे हैं.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.