भास्कर न्यूज | प्रतापपुर जिले के प्रतापपुर प्रखंड में मनरेगा योजनाओं में फर्जीवाड़ा और सरकारी राशि के गबन का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। सोशल मीडिया पर मिली शिकायत को गंभीरता से लेते हुए चतरा के जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायु क्त (उपायुक्त-सह-जिला कार्यक्रम समन्वयक) ने त्वरित कार्रवाई की है। जांच में दोषी पाए जाने के बाद बाह्य स्रोत (आउटसोर्सिंग) पर कार्यरत दो कम्प्युटर ऑपरेटरों की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।प्रतापपुर प्रखंड के चन्द्रीगोविन्दपुर पंचायत अंतर्गत सलेमपुर गांव में मनरेगा योजनाओं में भारी अनियमितता बरतने की शिकायत सोशल मीडिया के माध्यम से जिला प्रशासन को मिली थी। उपायुक्त के निर्देश पर जिला ग्रामीण विकास शाखा द्वारा मामले की जांच कराई गई। जांच के दौरान जो खुलासे हुए, उसने मनरेगा क्रियान्वयन की पोल खोल कर रख दी।जांच टीम ने सलेमपुर गांव में संचालित कुल 4 मनरेगा योजनाओं की जमीनी हकीकत की जॉच की गई। इनमें वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2025-26 के तहत स्वीकृत तालाब और डोभा निर्माण कार्य शामिल थे। जिसमें राजकुमार शर्मा का नया तालाब निर्माण (FY 2023-24)बलराम कुमार के खेत में डोभा निर्माण (FY 2025-26)राजकिशोर सिंह के खेत में डोभा निर्माण (FY 2025-26)रूपाली देवी के खेत में डोभा निर्माण (FY 2023-24) है।जिसमें आधिकारिक तौर पर मस्टर रॉल निर्गत होने के बावजूद, कार्य दिवस के दिन जांच टीम को किसी भी कार्यस्थल पर एक भी मजदूर काम करते हुए नहीं पाया गया। सबसे चौंकाने वाला मामला रूपाली देवी के खेत में डोभा निर्माण योजना का रहा। यह योजना धरातल (जमीन) पर अस्तित्व में ही नहीं पाई गई। योजना धरातल पर न होने के बाद भी फर्जी मस्टर रॉल जारी कर मजदूरी मद में 18,612 रुपये की अवैध निकासी कर ली गई। प्रशासन ने इसे मनरेगा अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन माना है।
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