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Palamu News: पलामू की मनौती देवी ने मनरेगा योजना का लाभ लेकर आम की बागवानी शुरू की थी. आज वह अपने बाग के आम सीधे बेचकर रोजाना अच्छी कमाई कर रही हैं और दूसरे किसानों के लिए मिसाल बन गई हैं. प्राकृतिक तरीके से पके उनके ये आम लोग खूब पसंद कर रहे हैं.
पलामू. फलदार वृक्षों की खेती आज किसानों के लिए आय का एक स्थायी और लाभदायक माध्यम बनती जा रही है. पारंपरिक फसलों की तुलना में फलदार पौधों से लंबे समय तक उत्पादन मिलता है और बाजार में फलों की मांग भी लगातार बनी रहती है. आम, अमरूद, लीची और कटहल जैसे फलों की बागवानी से किसान कम जमीन में भी अच्छी कमाई कर सकते हैं.
फलदार वृक्षों की खेती से किसान बन रहे आत्मनिर्भर
सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को फलदार पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, हरियाली और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिल रहा है. कई किसान अब खेती के साथ-साथ सीधे उपभोक्ताओं तक अपने उत्पाद पहुंचाकर अतिरिक्त लाभ कमा रहे हैं. पलामू जिले में भी ऐसे कई उदाहरण देखने को मिल रहे हैं, जहां किसान फलदार वृक्षों की खेती के जरिए आत्मनिर्भर बन रहे हैं.
मनौती देवी कमा रहीं बेहतर मुनाफा
इसी कड़ी में पलामू जिले के चियांकी गांव की रहने वाली मनौती देवी आज आम की बागवानी के जरिए अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं. वर्ष 2019 में उन्होंने एक एकड़ भूमि में आम का बाग लगाया था. वर्तमान में उनके बाग में करीब 120 आम के पेड़ हैं, जो अब बेहतर उत्पादन देने लगे हैं. वह मनरेगा अंतर्गत बागवानी योजना का लाभ लेकर मुनाफा कमा रही हैं.
रोज हो रही इतनी आय
बागवानी के साथ-साथ मनौती देवी अपने आमों की सीधी बिक्री भी कर रही हैं. इसके लिए उन्होंने समाहरणालय परिसर के बाहर एक स्टॉल लगाया है, जहां हर दिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक आम की बिक्री होती है. उनके स्टॉल पर रोजाना करीब 20 से 25 किलोग्राम आम बिक रहे हैं, जिससे उन्हें रोज 500 से 1000 रुपये तक की आय हो रही है.
नेचुरली पके हैं आम
मनौती देवी ने कहा कि इस आम की खास बात यह है कि ये पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से पकाए गए हैं. इन आमों को पकाने के लिए किसी प्रकार के कार्बाइड या रासायनिक पदार्थ का उपयोग नहीं किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं को शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक फल मिल रहे हैं. यही वजह है कि लोगों के बीच इनके आम की मांग लगातार बढ़ रही है.
मनरेगा कर्मी लंकेश कुमार ने बताया कि मनौती देवी ने मनरेगा योजना का लाभ लेकर आम की बागवानी शुरू की थी. योजना के तहत उन्हें आम्रपाली और मल्लिका प्रजाति के आम के पौधे उपलब्ध कराए गए थे. समय के साथ इन पौधों ने फल देना शुरू किया और आज यह बाग उनके लिए आय का मजबूत स्रोत बन चुका है.
स्टॉल की व्यवस्था की गई
उन्होंने बताया कि मनरेगा के माध्यम से लगाए गए फलदार पौधों का लाभ अब किसान सीधे तौर पर प्राप्त कर रहे हैं. किसानों को अपने उत्पाद बेचने में सुविधा हो, इसके लिए समाहरणालय के बाहर ‘दीदी स्टॉल’ की व्यवस्था की गई है. यहां मनौती देवी अपने आम मात्र 40 रुपये प्रति किलो की दर से बेच रही हैं.
मनरेगा के तहत मिली सहायता और अपनी मेहनत के बल पर मनौती देवी आज न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं, बल्कि अन्य किसानों और महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं. उनका यह प्रयास दर्शाता है कि अगर योजनाओं का सही तरीके से लाभ लिया जाए, तो बागवानी किसानों की आय बढ़ाने का असरदार माध्यम बन सकती है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें