नई दिल्ली. रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में तीन दिनों से चल रही मौद्रिक नीति सीमिति (MPC) की बैठक के नतीजा आ गया है. इस बार आरबीआई के सामने कई चुनौतियां थीं. इसलिए कयास लगाए जा रहे थे कि रुपये को थामने के लिए ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन ज्यादातर एक्सपर्ट का यही मानना है कि रिजर्व बैंक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा. आरबीआई ने अपनी पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं किया है.
RBI Policy News: बाहरी झटकों से निपटने के लिए भारत बेहतर स्थिति में
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा और मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए पहले से अधिक मजबूत हुई है. केंद्रीय बैंक के मुताबिक सरकार द्वारा MSME और निर्यात क्षेत्र को दिया गया समर्थन, घरेलू गैस और कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ाने की कोशिशें तथा आयातित उत्पादों के घरेलू विकल्पों को बढ़ावा देने जैसे कदमों ने अर्थव्यवस्था की मजबूती बढ़ाई है.
RBI ने कहा कि महत्वपूर्ण आयातों के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति भी भारत को बाहरी झटकों से बचाने में मदद कर रही है. इन उपायों की वजह से वैश्विक संकट या आपूर्ति संबंधी बाधाओं का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पहले की तुलना में कम पड़ने की उम्मीद है.
RBI का संतुलित रुख अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा
मॉड्यूलस अल्टरनेटिव्स के सीईओ एवं सीआईओ संदीप अग्रवाल ने कहा कि RBI ने ब्याज दरों को स्थिर रखकर विकास, महंगाई और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है. यह फैसला दिखाता है कि केंद्रीय बैंक भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा रखता है, लेकिन वैश्विक जोखिमों को लेकर भी सतर्क है.
उनके मुताबिक RBI द्वारा घोषित उपायों से बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी रहेगी और कारोबारों को वित्तपोषण मिलता रहेगा. उन्होंने कहा कि नीतिगत स्थिरता प्राइवेट क्रेडिट सेक्टर के लिए भी अच्छी खबर है, क्योंकि यह ऐसे समय में मजबूत कंपनियों की फंडिंग जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है, जब पारंपरिक कर्जदाता अधिक सतर्क रुख अपना रहे हैं.
RBI Monetary Policy Meeting: फूड इन्फ्लेशन पर RBI का क्या टेक?
RBI Monetary Policy Meeting: आरबीाई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि खाद्य कीमतों का भविष्य अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. इसकी सबसे बड़ी वजह सामान्य से कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून का अनुमान और एल नीनो की आशंका है. यदि मौसम की स्थिति उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, तो कृषि उत्पादन और खाद्य आपूर्ति पर असर पड़ सकता है, जिससे खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में दबाव बढ़ सकता है.
मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई बढ़ने के जोखिम पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुए हैं. हालांकि, मौद्रिक नीति समिति (MPC) का मानना है कि किसी बड़े कदम से पहले स्थिति को और स्पष्ट होने देना बेहतर होगा. इसी कारण समिति ने फिलहाल इंतजार करने और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर नजर रखने का फैसला किया है.
रेपो रेट में विराम, लेकिन रियल एस्टेट की रफ्तार बरकरार: मोहित मित्तल
MORES के सीईओ मोहित मित्तल ने कहा कि RBI का रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने का फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था, हालांकि कई निवेशक एक और दर कटौती की उम्मीद कर रहे थे. उनके मुताबिक 2025 की शुरुआत से अब तक ब्याज दरों में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कमी का असर अब धीरे-धीरे आम घर खरीदारों तक पहुंच रहा है. इससे EMI का बोझ कम हुआ है, होम लोन सस्ते हुए हैं और बाजार में सकारात्मक माहौल बना है.
मोहित मित्तल ने कहा कि बढ़ते कच्चे तेल के दाम और रुपये पर दबाव को देखते हुए RBI का रुख पूरी तरह उचित है. उन्होंने कहा कि रेपो रेट में फिलहाल कोई बदलाव न होना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए नकारात्मक संकेत नहीं है. पिछले एक साल में हुई दर कटौतियों ने उन खरीदारों को भी बाजार में वापस लाया है, जो लंबे समय से इंतजार कर रहे थे.
उनके अनुसार किफायती आवास, मिडिल क्लास हाउसिंग और प्रीमियम सेगमेंट तीनों में मांग मजबूत बनी हुई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि FY27 में ब्याज दरों में एक और कटौती होती है, तो रियल एस्टेट बाजार की रफ्तार और तेज हो सकती है. मोहित मित्तल का मानना है कि सेक्टर की बुनियादी स्थिति मजबूत है और किसी एक नीतिगत फैसले से इसकी दीर्घकालिक विकास कहानी नहीं बदलने वाली.
स्थिर रेपो रेट से हाउसिंग डिमांड को मिलेगा समर्थन: आशीष भूटानी
भूटानी इंफ्रा के सीईओ आशीष भूटानी ने कहा कि RBI द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखना और न्यूट्रल रुख जारी रखना मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और बदलते महंगाई परिदृश्य के बीच एक संतुलित फैसला है. उनके मुताबिक रियल एस्टेट सेक्टर के लिए केवल ब्याज दरों में कटौती ही नहीं, बल्कि दरों में स्थिरता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है.
आशीष भूटानी ने कहा कि स्थिर ब्याज दरें घर खरीदारों का भरोसा बढ़ाती हैं और उन्हें लंबी अवधि की वित्तीय योजना बनाने में मदद करती हैं. साथ ही, पूर्वानुमान योग्य उधारी माहौल के कारण डेवलपर्स भी अपनी परियोजनाओं की बेहतर योजना बनाकर उन्हें समय पर पूरा कर सकते हैं.
उन्होंने उम्मीद जताई कि ब्याज दरों में यह स्थिरता आवासीय रियल एस्टेट की मांग को बनाए रखने में मदद करेगी, खासकर मिड-इनकम और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में. उनके अनुसार यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर की विकास रफ्तार को आगे भी मजबूती प्रदान कर सकता है.
RBI ने बढ़ते जोखिमों के बीच संतुलित रुख अपनाया
कोटक महिंद्रा एएमसी में हेड फिक्स्ड इनकम अभिषेक बिसेन (Abhishek Bisen) ने कहा कि जून 2026 की RBI मौद्रिक नीति बैठक ऐसे समय में हुई, जब वैश्विक संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये में कमजोरी और मानसून से जुड़े जोखिम बाजार की चिंता बढ़ा रहे हैं. हालांकि खुदरा महंगाई (CPI) 3.48% के अपेक्षाकृत आरामदायक स्तर पर बनी हुई है, लेकिन थोक महंगाई (WPI) और ईंधन की बढ़ती कीमतें भविष्य में दबाव बढ़ने के संकेत दे रही हैं.
उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन उस पर कुछ चुनौतियों का असर दिखने लगा है और FY27 के लिए विकास की संभावनाएं पहले की तुलना में थोड़ी कमजोर हुई हैं. इसी वजह से बॉन्ड यील्ड और जोखिम प्रीमियम में भी बढ़ोतरी देखी गई है, जो निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है.
अभिषेक बिसेन के मुताबिक बाजार में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका को लेकर चर्चा जरूर थी, लेकिन RBI ने फिलहाल रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखना उचित समझा. साथ ही केंद्रीय बैंक ने महंगाई के अनुमान को बढ़ाया, आर्थिक वृद्धि के अनुमान में मामूली कटौती की और रुपये में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े उपायों पर जोर दिया. इससे संकेत मिलता है कि RBI फिलहाल सतर्क रुख अपनाते हुए महंगाई और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है.
रेपो रेट स्थिर रहने से हाउसिंग सेक्टर को मिलेगा सहारा: BPTP
BPTP के सीईओ एवं प्रेसिडेंट मानिक मलिक ने कहा कि RBI द्वारा रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला आर्थिक स्थिरता और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उनके मुताबिक ब्याज दरों में स्थिरता से घर खरीदारों और डेवलपर्स दोनों को बेहतर वित्तीय योजना बनाने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में आवासीय रियल एस्टेट बाजार ने मजबूत प्रदर्शन किया है, जिसे वास्तविक खरीदारों की मांग और बढ़ते बाजार विश्वास का समर्थन मिला है. मानिक मलिक का मानना है कि स्थिर ब्याज दरें खासकर मिड-सेगमेंट और प्रीमियम हाउसिंग बाजार की रफ्तार बनाए रखने में मदद करेंगी और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत करेंगी.
रियल एस्टेट में निवेश का भरोसा बढ़ेगा: मैपस्को ग्रुप
मैपस्को ग्रुप के डायरेक्टर राहुल सिंगला ने कहा कि RBI का रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला आर्थिक विकास और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है. उनके अनुसार हाल के महीनों में रियल एस्टेट बाजार ने अच्छी मजबूती दिखाई है और प्रमुख शहरों में घरों की मांग लगातार बनी हुई है. राहुल सिंगला ने कहा कि रियल एस्टेट को लंबे समय से सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता रहा है और अनुकूल नीतिगत माहौल इस धारणा को और मजबूत करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर लिक्विडिटी से डेवलपर्स को परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी.
RBI Policy News: विदेशी मुद्रा भंडार से भारत को मजबूत सुरक्षा कवच
RBI Monetary Policy Today: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) वैश्विक अनिश्चितताओं और बाहरी झटकों के खिलाफ एक बड़ा सुरक्षा कवच प्रदान करता है. उन्होंने भरोसा जताया कि देश के पास ऐसे पर्याप्त संसाधन हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पैदा होने वाले जोखिमों का सामना करने में मदद कर सकते हैं.
गवर्नर ने यह भी कहा कि विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI पूरी तरह सतर्क है और जरूरत पड़ने पर अपने सभी उपलब्ध साधनों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है. उनका कहना था कि केंद्रीय बैंक का लक्ष्य रुपये और विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित तथा संतुलित स्थिति बनाए रखना है, ताकि किसी भी वैश्विक उथल-पुथल का असर भारतीय वित्तीय प्रणाली पर सीमित रहे.
RBI Monetary Policy Meeting: सरकारी बॉन्ड (G-Sec) निवेश पर कैपिटल गेन टैक्स खत्म
RBI Monetary Policy Meeting: सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को आकर्षित करने के लिए सरकारी बॉन्ड (G-Sec) निवेश पर कैपिटल गेन टैक्स खत्म कर दिया है. नए अध्यादेश के तहत अब विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से होने वाले मुनाफे पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना होगा.
पहले 12 महीने से अधिक समय तक रखी गई सरकारी प्रतिभूतियों पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता था, जबकि एक साल से कम अवधि के निवेश पर 20% शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता था. अब इन दोनों टैक्स देनदारियों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है.
इस कदम का मकसद भारतीय बॉन्ड बाजार को विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना और देश में विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देना है. इससे सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश बढ़ने और वित्तीय बाजारों को अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है.
Real Estate : रेपो रेट स्थिर रहने से घर खरीदारों और डेवलपर्स को राहत
गंगा रियल्टी के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर विकास गर्ग ने कहा कि RBI द्वारा रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए उत्साहजनक है. उनके मुताबिक यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देश का आवासीय बाजार मजबूत स्थिति में है और उपभोक्ताओं का भरोसा लगातार बढ़ रहा है.
उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में स्थिरता रहने से होम लोन लेने वाले खरीदारों को राहत मिलेगी, जिससे वे घर खरीदने के अपने फैसले को अधिक विश्वास के साथ आगे बढ़ा सकेंगे. वहीं डेवलपर्स के लिए भी यह माहौल अनुकूल रहेगा क्योंकि इससे बाजार में मांग बनी रहने की संभावना बढ़ेगी.
विकास गर्ग का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, लोगों की बढ़ती आय और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण आवासीय संपत्तियों की मांग लगातार मजबूत हो रही है. ऐसे में मौद्रिक नीति में स्थिरता निवेशकों और खरीदारों दोनों का भरोसा बढ़ाएगी तथा आने वाले महीनों में बिक्री और नए निवेश को अतिरिक्त गति दे सकती है.
स्थिर ब्याज दरों से रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा भरोसा
त्रिगुणा प्रोजेक्ट्स के सह-संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक रघुनाथ रेड्डी भट्टागिरी ने कहा कि रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने का फैसला पूरे रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है. उनके अनुसार स्थिर ब्याज दरों से घर खरीदारों को अपने खरीदारी के फैसले लेने में अधिक भरोसा मिलेगा, जबकि डेवलपर्स को नई परियोजनाओं में निवेश और योजना बनाने के लिए बेहतर स्पष्टता मिलेगी.
उन्होंने कहा कि इसका फायदा केवल आवासीय परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्लॉटेड डेवलपमेंट, मिक्स्ड-यूज कम्युनिटीज और कमर्शियल रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों को भी मिलेगा. रघुनाथ रेड्डी भट्टागिरी का मानना है कि मौद्रिक नीति में स्थिरता से लंबी अवधि की वृद्धि को समर्थन मिलता है, घरों की वहनीयता बेहतर होती है और बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत बना रहता है. उनके मुताबिक यह फैसला रियल एस्टेट उद्योग की निरंतर प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है.
RBI MPC Meeting 2026 Live: विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए बड़ी घोषणा
RBI MPC Meeting 2026 Live: RBI गवर्नर ने प्रवासी भारतीयों (NRI) और ओवरसीज सिटिजन्स ऑफ इंडिया (OCI) के लिए शेयर बाजार में निवेश के नियमों को और आसान बनाने की घोषणा की है. नए फैसले के तहत SEBI में पंजीकरण कराए बिना स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार होने वाले इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश की सीमा बढ़ा दी गई है.
इस बदलाव के बाद NRI और OCI निवेशक भारतीय शेयर बाजार में पहले के मुकाबले अधिक निवेश कर सकेंगे. संशोधित सीमा केवल स्टॉक मार्केट के जरिए किए जाने वाले निवेश पर लागू होगी. RBI का मानना है कि इस कदम से विदेशों में रहने वाले भारतीयों की भारतीय पूंजी बाजार तक पहुंच बढ़ेगी और देश में विदेशी निवेश प्रवाह को भी मजबूती मिलेगी.
RBI Monetary Policy Meeting: विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए RBI के 6 बड़े कदम
भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ाने और रुपये को सहारा देने के लिए RBI ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं. केंद्रीय बैंक ने विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड बाजार तक पहुंच आसान बनाने के उद्देश्य से सभी नई 15, 30 और 40 साल की सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) को FAR व्यवस्था में शामिल कर दिया है.
इसके अलावा, सामान्य निवेश मार्ग के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) पर लागू निवेश एकाग्रता सीमा को हटा दिया गया है. NRI और OCI निवेशकों के लिए सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में निवेश की सीमा भी बढ़ाई गई है, जबकि यह सुविधा विदेश में रहने वाले सभी भारतीय नागरिकों तक विस्तारित कर दी गई है.
RBI Monetary Policy Meeting: RBI ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के विदेशी कर्ज (ECB) के लिए रियायती फॉरेक्स स्वैप विंडो की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी है. साथ ही 3 से 5 वर्ष की FCNR(B) जमा जुटाने वाले बैंकों को मिलने वाली पूर्ण हेजिंग लागत सहायता भी 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी.
केंद्रीय बैंक ने निर्यातकों के लिए भी राहत दी है. निर्यात आय को देश में वापस लाने की समयसीमा, जिसे पहले 15 महीने तक बढ़ाया गया था, अब फिर से 9 महीने कर दी गई है. RBI का मानना है कि इन कदमों से विदेशी निवेश आकर्षित करने, डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने और वित्तीय बाजारों में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी.
स्थिर रेपो रेट से रियल एस्टेट बाजार को मिलेगा समर्थन
रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर Yashank Vasan ने कहा कि RBI की MPC द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक कदम है. उनके अनुसार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होने से घर खरीदारों की EMI पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा, जिससे आवासीय संपत्तियों की मांग को समर्थन मिलेगा. उन्होंने कहा कि स्थिर लोन दरें लोगों को घर खरीदने का फैसला लेने में अधिक भरोसा देंगी. वहीं डेवलपर्स के लिए भी यह माहौल अनुकूल रहेगा, जिससे वे नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने और चल रही परियोजनाओं को तय समय पर पूरा करने की बेहतर योजना बना सकेंगे.
रपो रेट स्थिर रहने से घर खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा
व्हाइटलैंड कॉरपोरेशन के डायरेक्टर (स्ट्रैटेजी) Sudeep Bhatt ने कहा कि RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने का फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में शुरू हुई ब्याज दरों में कटौती के बाद पूरे वर्ष में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कमी की जा चुकी है, जिससे उधारी की लागत पहले ही कम हुई है. सुदीप भट्ट के मुताबिक मौजूदा फैसला होम लोन दरों को स्थिर बनाए रखेगा, जिससे घर खरीदने वालों का विश्वास मजबूत होगा और मांग को समर्थन मिलेगा. साथ ही डेवलपर्स के लिए फंडिंग और लिक्विडिटी की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद है. उनका मानना है कि EMI और कर्ज की लागत में स्थिरता निवेशकों और खरीदारों दोनों की रुचि बढ़ाने में मदद करेगी.
रेपो रेट स्थिर रहने से रियल एस्टेट सेक्टर को सहारा
जिंदल रियल्टी के सीईओ और प्रेसिडेंट Abhay Mishra ने कहा कि रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है. उनके मुताबिक इससे होम लोन की लागत में स्थिरता बनी रहेगी, जिससे घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों का भरोसा बढ़ेगा और बाजार में मांग की रफ्तार कायम रहने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि डेवलपर्स को भी परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें समय पर पूरा करने में अधिक स्पष्टता मिलेगी. अभय मिश्रा का मानना है कि आने वाले समय में इस सेक्टर की पूरी क्षमता को सामने लाने के लिए नीतिगत समर्थन और बाजार में पर्याप्त तरलता बेहद महत्वपूर्ण होगी.
RBI MPC Meeting 2026 Live: FY27 में महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान
RBI Monetary Policy Meeting: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा और उनकी टीम ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान जताया है. केंद्रीय बैंक के मुताबिक कमर्शियल LPG, बेस मेटल्स, प्लास्टिक, रबर और अन्य औद्योगिक कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई पर दबाव बना हुआ है. इन जरूरी इनपुट्स के महंगे होने से उत्पादन लागत बढ़ रही है, जिसका असर आने वाले समय में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है.
- RBI के अनुमान के मुताबिक पहली तिमाही में महंगाई 4.2% रह सकती है.
- दूसरी तिमाही में यह बढ़कर 5.1% होने का अनुमान है.
- तीसरी व चौथी तिमाही में 5.9% तक पहुंच सकती है.
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि फिलहाल महंगाई को लेकर जोखिम और राहत दोनों की संभावनाएं लगभग बराबर हैं.
RBI Meeting Today: महंगी एनर्जी और सप्लाई संकट से बढ़ी चिंता
RBI Meeting Today: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों और सप्लाई चेन में लंबे समय तक बनी रुकावटों का असर अब अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है. इसी वजह से आर्थिक वृद्धि के अनुमान को नीचे किया गया है, जबकि महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी की गई है. उन्होंने कहा कि अप्रैल की मौद्रिक नीति के बाद से वैश्विक परिस्थितियों में आए बदलावों ने लागत का दबाव बढ़ाया है, जिसका असर आने वाले समय में भी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
RBI Monetary Policy Meeting: FY27 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान घटाया गया
RBI Monetary Policy Today: RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की वास्तविक GDP वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.6% कर दिया है. इससे पहले केंद्रीय बैंक ने 6.9% ग्रोथ का अनुमान जताया था. यानी RBI को अब अर्थव्यवस्था की रफ्तार पहले के मुकाबले थोड़ी धीमी रहने की उम्मीद है. वैश्विक अनिश्चितताओं, बढ़ती लागत और बाहरी चुनौतियों को देखते हुए विकास दर के अनुमान में यह कटौती की गई है.