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Jodhpur Hindi News: मानसून के आगमन के साथ खिरजा खास की महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल शुरू की है. महिलाओं ने हजारों सीड बॉल तैयार किए हैं, जिन्हें बंजर पहाड़ियों और खाली भूमि पर फैलाया जाएगा. बारिश के दौरान ये सीड बॉल अंकुरित होकर हरियाली बढ़ाने में मदद करेंगे. इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और सूनी पहाड़ियों को फिर से हरा-भरा बनाना है. स्थानीय महिलाओं की यह पहल सामुदायिक भागीदारी और प्रकृति संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बन रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास भविष्य में जैव विविधता और हरित आवरण बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
ग्राम पंचायत खिरजा खास की महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक पहल करते हुए हजारों सीड बॉल तैयार किए हैं. यह अभियान वन एवं पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से चलाया जा रहा है. महिलाओं की मेहनत और सामूहिक भागीदारी से तैयार किए गए ये सीड बॉल आने वाले समय में बंजर भूमि को हरियाली से भरने का माध्यम बनेंगे. यह पहल ग्रामीण स्तर पर पर्यावरण के प्रति जागरूकता का भी संदेश दे रही है.
सीड बॉल को उपजाऊ मिट्टी, गोबर और चिकनी मिट्टी के मिश्रण से तैयार किया गया है. इनके भीतर विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधों के बीज सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि बारिश होने पर वे आसानी से अंकुरित हो सकें.यह तकनीक प्राकृतिक तरीके से पौधों के विकास को बढ़ावा देती है और कम संसाधनों में अधिक हरियाली विकसित करने का प्रभावी माध्यम मानी जाती है.
पर्यावरण प्रेमी गायड सिंह खिरजा ने बताया कि मानसून के दौरान इन सीड बॉल्स को खिरजा खास की ऐतिहासिक भाखर पहाड़ी और आसपास की बंजर भूमि पर बिखेरा जाएगा. वर्षा का पानी मिलने के बाद बीज स्वतः अंकुरित होंगे और प्राकृतिक रूप से पौधों का विकास शुरू हो जाएगा. इससे बिना बड़े स्तर पर पौधारोपण किए भी हरित क्षेत्र बढ़ाने में मदद मिलेगी.
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सीड बॉल तकनीक को कम खर्च में अधिक पौधे तैयार करने का सरल और पर्यावरण अनुकूल उपाय माना जाता है. इस विधि में पौधों की देखभाल का खर्च भी कम होता है और बीज प्राकृतिक परिस्थितियों में विकसित होते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में इस तकनीक को अपनाकर बड़े पैमाने पर हरियाली बढ़ाई जा सकती है और बंजर भूमि को फिर से जीवंत बनाया जा सकता है.
गायड सिंह खिरजा ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल पौधे उगाना नहीं, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है. महिलाओं की यह पहल हरित आवरण बढ़ाने, जैव विविधता के संरक्षण और ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियों से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. यदि ऐसे प्रयास लगातार जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र की बंजर पहाड़ियां भी हरियाली से आच्छादित दिखाई देंगी.