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धनबाद डिवीजन ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में माल ढुलाई में देश के सभी रेलवे डिवीजनों को पीछे छोड़ दिया है. इसने 51.42 मिलियन टन माल ढुलाई कर 6,417.41 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया.
रेलवे को 7,996.59 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है.
नई दिल्ली. ट्रेनों से माल ढुलाई के मामले में अगर आप दिल्ली या मुंबई डिवीजन को अव्वल मानते हैं, तो आप गलत हैं. भारतीय रेलवे के ये आंकड़े आपको चौंका सकते हैं. वित्तीय साल 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में धनबाद डिवीजन ने देश के सभी रेलवे डिवीजनों को पीछे छोड़ते हुए माल लदान में पहला स्थान हासिल किया है.
पूर्व मध्य रेलवे ने इस अवधि में 51.56 मिलियन टन माल की ढुलाई की, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 51.50 मिलियन टन से अधिक है. इस माल ढुलाई से रेलवे को 7,996.59 करोड़ रुपये का शुरुआती राजस्व मिला, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 7,942.36 करोड़ रुपये था.
इस शानदार प्रदर्शन में धनबाद डिवीजनों की सबसे बड़ी भूमिका रही. डिवीजनों ने अकेले 51.42 मिलियन टन माल ढुलाई कर नया रिकॉर्ड बनाया और इससे 6,417.41 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया है. इसी उपलब्धि के साथ धनबाद डिवीजन भारतीय रेलवे के सभी डिवीजनों में पहली तिमाही के दौरान माल ढुलाई के मामले में देश में नंबर-1 बन गया.
इस दौरान रेलवे ने नए माल ढुलाई केंद्र भी विकसित किए. समस्तीपुर मंडल के कुमारबाग और नारायणपुर अनंत गुड्स शेड से पहली बार मकई की ढुलाई की गई. दोनों केंद्रों से कुल 9 रेक मकई भेजी गई, जिससे रेलवे को 3.98 करोड़ रुपये का राजस्व मिला.
वहीं, धनबाद मंडल के सलाईबनवा गुड्स शेड से भी पहली बार सीमेंट की ढुलाई शुरू हुई. यहां से दो रेक सीमेंट भेजे गए, जिससे 11.92 लाख रुपये की आय हुई. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि माल ढुलाई बढ़ाने, नए गुड्स शेड विकसित करने और उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय का असर अब साफ दिखाई दे रहा है. यही वजह है कि पहले मध्य रेलवे लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है और भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता को नई ऊंचाई पर पहुंचा रहा है.
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करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें